Disha Salian Case: आदित्य ठाकरे बोले- दिशा से कभी नहीं मिला, CBI जांच के बीच तोड़ी चुप्पी
CBI जांच के बीच आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियन से किसी मुलाकात या पहचान से इनकार किया
Disha Salian Case: बॉलीवुड की दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियन की संदिग्ध मौत के छह साल पुराने मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा औपचारिक प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक और सार्वजनिक गलियारों में जबर्दस्त हलचल मच गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद जांच एजेंसी द्वारा शुरू की गई इस नई पड़ताल के बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत वक्तव्य जारी कर दिशा सालियन से किसी भी तरह की व्यक्तिगत पहचान, परिचय अथवा पूर्व मुलाकात से दो टूक इनकार किया है।
आदित्य ठाकरे ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वह दिशा सालियन को न तो कभी व्यक्तिगत रूप से जानते थे और न ही उनके जीवनकाल में उनसे कभी मिले थे। उन्होंने अपने नाम को लगातार इस मामले से घसीटे जाने को एक दुर्भावनापूर्ण और सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया। उनका आरोप है कि पिछले कई वर्षों से बिना किसी ठोस आधार के उनके चरित्र और सार्वजनिक छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। उनके इस आधिकारिक बयान के सामने आते ही महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो गया है।
Disha Salian Case: बॉम्बे हाई कोर्ट का निर्देश और सीबीआई द्वारा नियमित प्राथमिकी दर्ज करने की पृष्ठभूमि
दिशा सालियन की मृत्यु 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड स्थित एक बहुमंजिला आवासीय परिसर से गिरने के कारण हुई थी। इस घटना के कुछ ही दिन बाद 14 जून 2020 को मशहूर बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की बांद्रा स्थित फ्लैट में संदिग्ध मौत हो गई थी। दिशा सुशांत की पूर्व मैनेजर भी रह चुकी थीं, जिसके चलते दोनों मामलों के बीच आपसी तार जुड़े होने को लेकर लंबे समय से कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। मुंबई पुलिस ने प्रारंभिक जांच में इसे दुर्घटनावश हुई मौत का मामला माना था, किंतु मृतका के परिजनों और अन्य पक्षों द्वारा लगातार जांच में खामियों के आरोप लगाए जाते रहे।
सितंबर 2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले से जुड़ी जनहित याचिकाओं और मृतका के पिता सतीश सालियन द्वारा दर्ज कराई गई नई शिकायतों पर सुनवाई करते हुए पूर्व की पुलिस जांच में पाई गई गंभीर विसंगतियों और अनुत्तरित सवालों का संज्ञान लिया। उच्च न्यायालय ने मामले की निष्पक्ष और समग्र पड़ताल के लिए इसकी संपूर्ण जांच देश की शीर्ष जांच एजेंसी सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया। अदालत के आदेश का अनुपालन करते हुए सीबीआई ने नियमित प्राथमिकी दर्ज कर अपनी आधिकारिक जांच की गति तेज कर दी है।
सीबीआई की एफआईआर में नामों का संदर्भ और कानूनी स्थिति
सीबीआई द्वारा दर्ज की गई इस नई प्राथमिकी को लेकर विधिक विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण कानूनी बारीकियां स्पष्ट की हैं। प्राथमिकी में शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा दी गई जानकारी और पूर्व के बयानों के आधार पर कई प्रमुख हस्तियों और राजनेताओं के नामों का उल्लेख जांच के संदर्भ में किया गया है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक विवरण के अनुसार जांच एजेंसी ने वर्तमान चरण में किसी भी व्यक्ति को औपचारिक आरोपी के रूप में नामजद नहीं किया है।
आपराधिक न्यायशास्त्र के तहत प्राथमिकी केवल किसी संज्ञेय अपराध के संबंध में जांच आरंभ करने का प्रारंभिक दस्तावेज होती है। एफआईआर में किसी व्यक्ति का नाम आने मात्र से उसे दोषी या अभियुक्त नहीं माना जा सकता। सीबीआई का प्राथमिक कार्य शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता, उपलब्ध फॉरेंसिक रिपोर्ट, घटनाक्रम की प्रामाणिकता और गवाहों के बयानों की निष्पक्ष जांच करना है।
सीबीआई अधिकारी सीमा पाहुजा के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन
जांच की संवेदनशीलता और हाई-प्रोफाइल प्रकृति को देखते हुए सीबीआई मुख्यालय ने इस मामले की कमान अपनी तेजतर्रार अधिकारी सीमा पाहुजा को सौंपी है। सीमा पाहुजा को देश के कई चर्चित और जटिल मामलों—जैसे हाथरस कांड और कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले—की जांच का व्यापक अनुभव प्राप्त है। उनके नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल ने मुंबई में डेरा डाल दिया है।
जांच एजेंसी की यह विशेष टीम वर्ष 2020 में मुंबई पुलिस द्वारा जुटाए गए संपूर्ण केस डायरी, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, विसरा जांच के नतीजे, घटनास्थल के पंचनामे और तकनीकी साक्ष्यों जैसे मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और टॉवर लोकेशन की नए सिरे से स्क्रूटनी कर रही है। इसके साथ ही, उस समय जांच में शामिल रहे स्थानीय पुलिस अधिकारियों, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और घटना की रात उस इमारत या पार्टी में मौजूद सभी प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दोबारा दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
सूरज पंचोली की प्रतिक्रिया और अन्य हस्तियों के बयानों का दौर
सीबीआई द्वारा नए सिरे से जांच शुरू किए जाने के बाद मामले में पूर्व में घसीटे गए अभिनेता सूरज पंचोली ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की है। अभिनेता ने दोहराया कि उनका दिशा सालियन से कभी कोई सीधा या परोक्ष संपर्क नहीं रहा और न ही वे कभी उनसे मिले थे। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए एजेंसी की जांच में पूर्ण सहयोग का भरोसा जताया।
जांच के दायरे में आए विभिन्न व्यक्तियों द्वारा दी जा रही यह सार्वजनिक स्पष्टीकरण यह दर्शाता है कि छह साल पुराने इस संवेदनशील मामले में सीबीआई की सक्रियता से कानूनी हलचल काफी तेज हो चुकी है। हालांकि विधिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक बयानों से इतर जांच एजेंसी केवल भौतिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी।
Disha Salian Case: निष्कर्ष
दिशा सालियन मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई नई प्राथमिकी और आदित्य ठाकरे का खुलकर सामने आना इस प्रकरण में एक बड़ा मोड़ लेकर आया है। जहां एक ओर ठाकरे ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे छवि खराब करने का षड्यंत्र बताया है, वहीं दूसरी ओर सीबीआई की विशेष टीम घटना की रात से जुड़े हर अनसुलझे रहस्य, फॉरेंसिक साक्ष्य और बयानों की स्वतंत्र पड़ताल में जुटी है। छह साल बीत जाने के बाद भी यह मामला न्याय, सत्य और पारदर्शिता के तराजू पर तौला जा रहा है, और अब संपूर्ण देश की निगाहें सीबीआई की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं जो इस बात का फैसला करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और कानून की नजर में वास्तविक तथ्य क्या हैं।
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