DUSU Election 2026: नॉर्थ कैंपस में ABVP-NSUI के बीच झड़प, चुनाव से पहले बढ़ा तनाव
ABVP-NSUI कार्यकर्ताओं में झड़प के बाद पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई, 18 सितंबर को मतदान
DUSU Election 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 के मतदान से ठीक दो दिन पहले नॉर्थ कैंपस में चुनावी सरगर्मियों के बीच भारी तनाव और हिंसक टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रचार अभियान के अंतिम चरण में 16 सितंबर की शाम लॉ फैकल्टी और कैंपस लॉ सेंटर के समीप अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प और मारपीट हुई। इस घटना में दो छात्र आंशिक रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से एक को सिर पर चोट लगने के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मतदान से ठीक पहले परिसर में हुए इस बवाल के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं।
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पूरे नॉर्थ कैंपस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है। पुलिस बल द्वारा संवेदनशील मार्गों, आर्ट्स फैकल्टी और छात्रावास परिसरों के आसपास अतिरिक्त बैरिकेडिंग कर फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है ताकि शांति व्यवस्था कायम रखी जा सके। वहीं, दोनों ही प्रमुख छात्र संगठनों ने एक-दूसरे पर सुनियोजित हमले, गुंडागर्दी और चुनावी माहौल बिगाड़ने के गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
DUSU Election 2026: लॉ फैकल्टी और कैंपस लॉ सेंटर के पास भड़का विवाद, दो छात्र हुए घायल
यह पूरा विवाद 16 सितंबर की शाम करीब पांच बजे उस समय शुरू हुआ जब विभिन्न छात्र संगठनों के कार्यकर्ता अपने-अपने पैनल के पक्ष में अंतिम दौर का सघन चुनाव प्रचार कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लॉ फैकल्टी के लॉ सेंटर-1 (LC-1) के गेट नंबर-4 और कैंपस लॉ सेंटर के निकट आमने-सामने प्रचार कर रहे छात्र गुटों के बीच पहले नारेबाजी और तीखी नोकझोंक हुई। देखते ही देखते यह जुबानी जंग हाथापाई और पथराव में बदल गई, जिससे आसपास अफरा-तफरी मच गई और अन्य छात्रों को भागकर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।
झड़प की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और रिजर्व सुरक्षा बल के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने हस्तक्षेप कर दोनों गुटों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित किया। घटना में घायल दोनों छात्रों को तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। परिसर में किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है।
ABVP का कांग्रेस और NSUI पर सुनियोजित हमले का आरोप
घटना के तुरंत बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्षी संगठन पर हिंसक राजनीति करने का आरोप लगाया। विद्यार्थी परिषद के दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने आधिकारिक बयान में कहा कि जब एनएसयूआई को कैंपस में छात्रों का समर्थन नहीं मिल रहा, तो वह भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) और सेवादल के बाहरी तत्वों को लाकर माहौल खराब करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ता पर योजनाबद्ध तरीके से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें उसका सिर फूट गया।
इसके अतिरिक्त एबीवीपी ने यह भी दावा किया कि उनके कार्यकर्ताओं के एक दल पर हरि मंदिर क्षेत्र में स्थित एक आवास पर भी हमला किया गया, जहां वे संगठनात्मक बैठक कर रहे थे। परिषद के अनुसार, वहां जबरन घुसकर मारपीट करने वाले एक बाहरी संदिग्ध को पकड़कर स्थानीय पुलिस को सौंपा गया है। विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस आयुक्त से इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
NSUI ने आरोपों को नकारा, अपने प्रत्याशियों के आवास पर दबाव बनाने की कही बात
दूसरी ओर, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया ने एबीवीपी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे चुनावी लाभ लेने के लिए रचा गया प्रोपेगैंडा करार दिया है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने स्पष्ट किया कि इस कथित मारपीट और विवाद से उनके संगठन का कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद अपनी संभावित चुनावी हार से घबराकर सहानुभूति बटोरने के लिए अनर्गल आरोप लगा रही है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रवि पांडेय ने भी जवाबी आरोप लगाते हुए दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी कार्यकर्ताओं द्वारा उनके केंद्रीय पैनल के उम्मीदवारों—अध्यक्ष पद प्रत्याशी विजय शंकर मीणा और सह-सचिव पद प्रत्याशी गोपाल चौधरी के आवासीय ठिकानों को निशाना बनाकर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की गई। संगठन ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि वह किसी एक पक्षीय दबाव में आए बिना सभी उम्मीदवारों और सामान्य छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करे।
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस, संदिग्धों की पहचान के लिए जारी है जांच
नॉर्थ दिल्ली की डीसीपी निहारिका भट्ट ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कैंपस में छात्रों के दो गुटों के बीच हुए आपसी झगड़े में दो छात्रों को मामूली चोटें आई थीं, जिनकी स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नॉर्थ कैंपस में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी असामाजिक तत्व को शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना की वास्तविक शुरुआत किस वजह से हुई और इसमें किन बाहरी व्यक्तियों की संलिप्तता थी, इसका पता लगाने के लिए आर्ट्स फैकल्टी, लॉ फैकल्टी और आसपास के मुख्य चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस ने साफ किया है कि डिजिटल साक्ष्यों और तथ्यों के सत्यापन के उपरांत ही आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
18 सितंबर को मतदान और 19 को मतगणना, चुनाव कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं
विश्वविद्यालय प्रशासन और चुनाव समिति द्वारा घोषित आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, डूसू चुनाव 2026 के लिए मतदान 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को दो पालियों में संपन्न कराया जाएगा। डे-कॉलेजों में सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और ईवनिंग कॉलेजों में अपराह्न 3:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक मत डाले जाएंगे। इसके उपरांत 19 सितंबर को मतों की गणना कर विजेताओं की घोषणा की जाएगी। 17 सितंबर को ‘साइलेंट पीरियड’ होने के कारण किसी भी प्रकार के प्रचार पर औपचारिक रोक रहेगी।
नॉर्थ कैंपस में हुई इस झड़प के बावजूद चुनाव कार्यक्रम में किसी प्रकार के बदलाव अथवा स्थगन की कोई संभावना नहीं है। विश्वविद्यालय के मुख्य चुनाव अधिकारी ने सभी कॉलेज प्राचार्यों और सुरक्षा प्रभारियों को निर्देश जारी किया है कि वे मतदान केंद्रों पर पहचान पत्र की सघन जांच के बाद ही छात्रों को प्रवेश दें। फर्जी वोटिंग और बाहरी तत्वों के अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए विश्वविद्यालय के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर अर्धसैनिक बलों और दिल्ली पुलिस की संयुक्त निगरानी रहेगी।
DUSU Election 2026: निष्कर्ष
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के मुहाने पर नॉर्थ कैंपस में हुई यह हिंसक झड़प लोकतांत्रिक छात्र राजनीति के स्वस्थ वातावरण पर एक चिंताजनक आघात है। चुनाव प्रचार की अंतिम शाम उपजा यह तनाव इस बात को रेखांकित करता है कि दोनों प्रमुख संगठनों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा और प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है। हालांकि पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप, फ्लैग मार्च और सख्त सुरक्षा घेरे ने स्थिति को नियंत्रण में ला दिया है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और सामान्य छात्रों की यही साझा प्राथमिकता होगी कि 18 सितंबर को होने वाला मतदान पूरी तरह भयमुक्त, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके।
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