Vishwakarma Puja 2026: 17 सितंबर को मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा विधि जानें
17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा, मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा का पूरा तरीका जानें
Vishwakarma Puja 2026: सनातन हिंदू धर्म परंपरा में सृष्टि के प्रथम दिव्य वास्तुकार, शिल्पकार और तकनीकी ज्ञान के प्रणेता भगवान विश्वकर्मा की आराधना का महापर्व ‘विश्वकर्मा जयंती’ गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और तकनीकी गरिमा के साथ मनाया जाएगा। यह पावन पर्व विशेष रूप से उन सभी श्रमिकों, शिल्पकारों, यांत्रिकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों, उद्योगपतियों और वाहन स्वामियों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है जिनकी आजीविका और दैनिक कार्य औजारों, मशीनों, कल-कारखानों और वाहनों पर आश्रित हैं। इस दिन देश भर की औद्योगिक इकाइयों, वर्कशॉप, निर्माण स्थलों, ऑटोमोबाइल गैराजों, आईटी केंद्रों और छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में विशेष पूजन समारोह आयोजित किए जाते हैं।
साल 2026 में विश्वकर्मा पूजा की तिथि को लेकर बन रहे संशय के बीच ज्योतिषीय पंचांग ने स्पष्ट किया है कि कन्या संक्रांति के समय के अनुसार यह पर्व 17 सितंबर को ही मनाया जाएगा। सूर्य देव के सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश के इस पावन काल में श्रम और औजारों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने की यह अनूठी परंपरा भारतीय संस्कृति की उस वैज्ञानिक दृष्टि को दर्शाती है, जहां केवल जीवित प्राणियों का ही नहीं बल्कि आजीविका के साधन बने निर्जीव उपकरणों का भी सम्मान किया जाता है।
Vishwakarma Puja 2026: 17 सितंबर को ही क्यों मनाई जाएगी विश्वकर्मा पूजा
सनातन धर्म में अधिकांश त्योहार चंद्रमा की तिथियों पर आधारित होते हैं, किंतु विश्वकर्मा पूजा सूर्य के सौर मास चक्र और संक्रांति पर आधारित उन गिने-चुने पर्वों में शामिल है जिसका निर्धारण सूर्य के राशि परिवर्तन से होता है। भाद्रपद मास के समाप्त होने और आश्विन मास के निकट आने पर जब भगवान भास्कर कन्या राशि में गोचर करते हैं, तो उस संक्रमण काल को ‘कन्या संक्रांति’ कहा जाता है।
खगोलीय और पंचांग गणना के अनुसार वर्ष 2026 में सूर्य देव 17 सितंबर की प्रातः लगभग 7:58 बजे कन्या राशि में विधिवत प्रवेश करेंगे। उदया संक्रांति और पुण्यकाल का शुभ संयोग 17 सितंबर को ही घटित होने के कारण विश्वकर्मा जयंती और संक्रांति पूजन 17 सितंबर, गुरुवार को ही शास्त्रसम्मत रूप से संपन्न किया जाएगा। सूर्य के इस राशि परिवर्तन के साथ ही औद्योगिक कार्यस्थलों पर सुबह से ही मंत्रोच्चार और पूजा-अनुष्ठान का दौर प्रारंभ हो जाएगा।
श्रम, शिल्प और आजीविका के साधनों के प्रति कृतज्ञता का पावन पर्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के भव्य नगर, स्वर्ग लोक, भगवान श्रीकृष्ण की स्वर्ण द्वारका, इंद्रपुरी, पुष्पक विमान और भगवान शिव के त्रिशूल व भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र जैसे अमोघ अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था। वे सृष्टि के आदि यांत्रिक इंजीनियर माने जाते हैं, जिन्होंने मानव सभ्यता को शिल्प, निर्माण और वास्तुकला का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया।
आधुनिक परिप्रेक्ष्य में यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान न होकर श्रम की महत्ता (Dignity of Labour) और उत्पादन के साधनों की सुरक्षा का संकल्प दिवस है। एक बढ़ई की आरी, दर्जी की सिलाई मशीन, मिस्त्री का पाना-हथौड़ा, किसान का ट्रैक्टर, फैक्ट्रियों की भारी टरबाइनें और आईटी पेशेवरों के कंप्यूटर—ये सभी वस्तुएं रोजी-रोटी का प्रत्यक्ष आधार हैं। विश्वकर्मा पूजा के दिन इन सभी साधनों को नमन कर यह प्रार्थना की जाती है कि कार्यक्षेत्र में कोई दुर्घटना न हो, मशीनें सुचारू रूप से कार्य करें और व्यापार में निरंतर प्रगति बनी रहे।
कार्यस्थल और उपकरणों की पूर्व तैयारी: स्वच्छता ही पहला संकल्प
विश्वकर्मा पूजन आरंभ करने से पूर्व कार्यस्थल और औजारों की संपूर्ण स्वच्छता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कारखानों, दुकानों या गैराजों में जमा पुरानी धूल, ग्रीस और कचरे को एक दिन पूर्व ही साफ कर लेना चाहिए। जिन भारी मशीनों और उपकरणों का प्रतिदिन संचालन होता है, उनकी बाहरी सफाई करके उन्हें सुव्यवस्थित करना चाहिए।
औजारों और छोटे तकनीकी उपकरणों को साफ जल या कपड़े से पोंछकर पूजा चौकी के निकट करीने से सजाया जाता है। इसी प्रकार दोपहिया, चारपहिया या व्यावसायिक वाहनों को धोकर उन पर फूल-मालाएं लगाने की तैयारी की जाती है। पूजन सामग्री के रूप में रोली, चंदन, अक्षत, कलावा, पीला या लाल रेशमी कपड़ा, गेंदे के फूलों की माला, ताजे फल, मिष्ठान्न, धूप, देशी घी का दीपक, सुपारी, पान के पत्ते और कलश की व्यवस्था पहले से कर लेनी चाहिए।
मशीनों, औजारों और उपकरणों की चरणबद्ध वैदिक पूजा विधि
17 सितंबर की सुबह स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर कार्यस्थल के ईशान कोण में चौकी स्थापित करें। चौकी पर लाल अथवा पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले गणेश जी और कलश की स्थापना कर पूजा का संकल्प लें और शुद्ध देशी घी का दीपक प्रज्वलित करें।
भगवान विश्वकर्मा को रोली, चंदन का तिलक लगाकर अक्षत और पुष्पमाला अर्पित करें। धूप और दीप दिखाकर फल तथा बेसन के लड्डू या पेड़े का भोग लगाएं। इसके पश्चात एकाग्रचित्त होकर “ॐ विश्वकर्मणे नमः” अथवा “ॐ आधार शक्तये नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
भगवान के विधिवत पूजन के उपरांत कार्य में प्रयुक्त होने वाले प्रमुख औजारों, कटर, ड्रिल मशीन, लेथ मशीन, कंप्यूटर और भारी संयंत्रों पर कलावा बांधें और रोली-चंदन से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। उन पर अक्षत और पीले पुष्प छिड़कें। भारी मशीनों को उनके स्थान पर ही प्रणाम कर धूप-दीप दिखाएं और कार्यक्षेत्र में सुरक्षा व सफलता की प्रार्थना करें। अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती उतारकर सभी उपस्थित कर्मचारियों और सहकर्मियों में प्रसाद का वितरण करें।
कार, बाइक और व्यावसायिक वाहनों की पूजा का सही तरीका
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर वाहनों की पूजा का भी विशेष विधान है, क्योंकि वाहन यात्रा और माल ढुलाई के प्राथमिक साधन हैं। वाहन को भली-भांति साफ करने के उपरांत उसे किसी सुरक्षित और समतल स्थान पर पार्क करें। पूजा करते समय वाहन का इंजन पूरी तरह बंद होना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना का अंदेशा न रहे।
वाहन के बोनट अथवा मुख्य हिस्से पर रोली या कुमकुम से शुभ स्वस्तिक का अंकन करें और उस पर अक्षत लगाएं। वाहन के अगले हिस्से पर गेंदे के फूलों की सुंदर माला पहनाएं और स्टियरिंग या हैंडल पर रक्षा सूत्र (कलावा) बांधें। वाहन के सामने धूप और दीपक दिखाकर भगवान विश्वकर्मा से सुरक्षित यात्रा और तकनीकी सुरक्षा की मंगलकामना करें। पूजा के बाद पहियों के नीचे एक नींबू रखकर वाहन को थोड़ा आगे बढ़ाना भी एक पारंपरिक लोक मान्यता का हिस्सा है, जिससे यात्रा निर्विघ्न मानी जाती है।
विश्वकर्मा पूजा पर कार्य विराम की परंपरा और आवश्यक सावधानियां
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार विश्वकर्मा पूजा के दिन अधिकांश कल-कारखानों, वर्कशॉप और दस्तकारों द्वारा मशीनों को पूर्ण विश्राम दिया जाता है और उस दिन उत्पादन कार्य बंद रखा जाता है। यह परंपरा मशीनों की नियमित सर्विसिंग, सुरक्षा ऑडिट और श्रमिकों को एक दिन का मानसिक व शारीरिक विश्राम देने के उद्देश्य से जुड़ी हुई है। हालांकि अस्पताल, आपातकालीन सेवाएं, सार्वजनिक परिवहन और चौबीसों घंटे चलने वाले निरंतर प्रक्रिया उद्योगों (Continuous Process Plants) में यह नियम अनिवार्य नहीं होता, वहां पूजा के उपरांत भी कार्य जारी रखा जा सकता है।
पूजा संपन्न करते समय सुरक्षा के तकनीकी मानकों की कतई अनदेखी न करें। मशीनों के संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, वायरिंग, फ्यूज बॉक्स या मोटर के खुले हिस्सों पर पानी, सिंदूर, तेल या प्रसाद न गिरने दें, जिससे शॉर्ट सर्किट की आशंका न रहे। इसी तरह जलते हुए दीपक या अगरबत्ती को ज्वलनशील रसायनों, पेट्रोल, डीजल या पेंट की बोतलों से सुरक्षित दूरी पर ही स्थापित करें। धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ तकनीकी सुरक्षा का पालन करना ही विश्वकर्मा पूजा की मूल भावना है।
Vishwakarma Puja 2026: निष्कर्ष
17 सितंबर 2026 को पड़ने वाली विश्वकर्मा पूजा केवल रीति-रिवाजों का निर्वहन नहीं, बल्कि मानवीय श्रम, कौशल और विज्ञान की सामूहिक आराधना का पावन दिन है। देवताओं के वास्तुकार की पूजा करते हुए जब कोई कारीगर या उद्यमी अपनी मशीनों और औजारों के प्रति आदर भाव व्यक्त करता है, तो उसके भीतर अपने कार्य के प्रति निष्ठा और समर्पण की भावना गहरी होती है। विधिपूर्वक की गई पूजा, कार्यस्थल की स्वच्छता और सुरक्षा का संकल्प ही व्यक्ति के उद्योग और व्यापार को समृद्धि व उन्नति के नए शिखरों पर ले जाने में सहायक सिद्ध होता है।
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