CJI Surya Kant: सीजेपी मार्च पर पुलिस कार्रवाई की याचिका पर सीजेआई सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी, तत्काल सुनवाई से इनकार; बोले- ‘हमारा समय बर्बाद मत कीजिए’
पुलिस कार्रवाई मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार, वीडियो देखने से भी सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार
CJI Surya Kant: उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में बुधवार को सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के रुख पर कड़ी टिप्पणी की। सीजेआई ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमारा समय बर्बाद मत कीजिए।” जब याचिकाकर्ता के वकील ने पुलिस की कथित ज्यादती से जुड़े वीडियो साक्ष्यों का उल्लेख करने की कोशिश की, तो पीठ ने साफ किया कि कोर्ट के पास ऐसे वीडियो देखने का समय नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर तत्काल सुनवाई से साफ इनकार कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
शीर्ष अदालत में सीजेपी मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पेश की गई थी। याचिका में पुलिस बल द्वारा कथित बर्बरता और अत्यधिक बल प्रयोग का दावा किया गया था। सुनवाई के दौरान वकील ने डिजिटल साक्ष्य के रूप में वीडियो कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास किया, जिस पर सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाया।
सीजेआई ने कहा कि न्यायालय का समय अत्यंत कीमती और सीमित है, इसलिए ऐसी याचिकाओं के जरिए अदालत का समय व्यर्थ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा:
“हमें इन वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है और न ही हमारे पास इन्हें देखने का समय है।”
इस कड़ी टिप्पणी के साथ ही पीठ ने मामले की त्वरित सुनवाई की मांग को खारिज कर दिया और याचिका को सामान्य प्रक्रिया के तहत आने के निर्देश दिए।
सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी का निहितार्थ
मुख्य न्यायाधीश की यह टिप्पणी न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं को रेखांकित करती है। पीठ के इस रुख से स्पष्ट संकेत मिलता है कि शीर्ष अदालत हर प्रशासनिक या कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटना में तत्काल हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी मामले को तय प्रक्रिया और नियमों के तहत ही सुना जाएगा। बिना ठोस कानूनी आधार के केवल वीडियो क्लिप प्रस्तुत कर तुरंत राहत पाने की कोशिशों को अदालत स्वीकार नहीं करेगी।
मामले की पृष्ठभूमि और पुलिस कार्रवाई का संदर्भ
यह याचिका सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च से जुड़ी हुई है। नीट (NEET) पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी को लेकर जंतर-मंतर पर लंबे समय से चल रहे आंदोलनों के बीच यह मार्च निकाला गया था। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया था, जिसे प्रदर्शनकारियों ने असंवैधानिक और बर्बर बताया था।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का पक्ष है कि जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में उपद्रव और अनियंत्रित भीड़ को रोकने के लिए उचित कदम उठाए गए थे। पुलिस के अनुसार, कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की थी, जिसके बाद कार्रवाई आवश्यक हो गई थी।
CJI Surya Kant: राजनीतिक हलचल और दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
पुलिस कार्रवाई और छात्र आंदोलनों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक पारा भी चढ़ा हुआ है। विपक्षी सांसदों ने इस कार्रवाई के विरोध में संसद परिसर में काले कपड़े पहनकर विरोध दर्ज कराया। वहीं, दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है।
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मेट्रो सेवाएं प्रभावित: सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के राजीव चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, पटेल चौक और जनपथ समेत 16 प्रमुख स्टेशनों को अस्थाई रूप से बंद रखा गया है।
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जंतर-मंतर पर चौकसी: जंतर-मंतर और संसद भवन के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
निष्कर्ष और आगे की स्थिति
सुप्रीम कोर्ट द्वारा तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार किए जाने के बाद अब यह याचिका सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही सूचीबद्ध होगी। मुख्य न्यायाधीश की सख्त टिप्पणी ने यह साफ कर दिया है कि अदालतें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार ही मामलों का निपटारा करेंगी। फिलहाल दिल्ली में प्रदर्शनों और उनसे जुड़े राजनीतिक विवादों का दौर जारी है।
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