BRICS Summit 2026: भारत की कूटनीति की बड़ी कामयाबी, घोषणापत्र से Global South तक बढ़ा प्रभाव
नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति, Global South और स्थानीय मुद्रा व्यापार पर बनी रणनीति
BRICS Summit 2026: देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन केवल एक बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भर नहीं था, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में भारत के रणनीतिक संतुलन और कूटनीतिक प्रभाव की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हुआ। नए सदस्य देशों के प्रवेश के बाद विस्तारित ब्रिक्स समूह में भिन्न-भिन्न आर्थिक हितों, वैचारिक दृष्टिकोणों और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धाओं के बीच सर्वसम्मति कायम करना एक अत्यंत जटिल चुनौती थी। भारतीय कूटनीति के कुशल समन्वय के परिणामस्वरूप सम्मेलन के समापन पर सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ऐतिहासिक ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration 2026) को अंगीकार किया। इस घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार, स्थानीय मुद्राओं में सीमा-पार व्यापार, वैश्विक दक्षिण (Global South) की सशक्त आवाज, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर एक ठोस साझा रोडमैप तैयार किया गया है।
BRICS Summit 2026: भारत की अध्यक्षता और जन-केंद्रित ब्रिक्स का नया मॉडल
वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालते हुए भारत ने ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास’ (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) की व्यापक थीम पर काम किया। भारत ने इस बहुपक्षीय मंच को केवल बंद कमरों में होने वाली राष्ट्राध्यक्षों की वार्षिक बैठकों तक सीमित रखने के बजाय इसे वास्तविक जन-भागीदारी और संस्थागत स्तर पर विस्तारित किया। पूरे वर्ष के दौरान भारत के 30 अलग-अलग शहरों में 400 से अधिक उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठकें, व्यापारिक मंच, संसदीय सम्मेलन, युवा महोत्सव और थिंक टैंक संवाद आयोजित किए गए, जिससे समूह के भीतर सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान को अभूतपूर्व धरातलीय गति मिली।
नई दिल्ली घोषणापत्र पर आम सहमति: भारतीय कूटनीति की ऐतिहासिक विजय
विस्तारित ब्रिक्स समूह में शामिल नए देशों के क्षेत्रीय समीकरणों और पश्चिम एशिया में जारी भीषण भू-राजनीतिक तनाव के बीच साझा घोषणापत्र पर सभी सदस्यों के हस्ताक्षर प्राप्त करना भारतीय वार्ताकारों की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। भारतीय नेतृत्व ने मतभेदों के स्थान पर साझा आर्थिक प्राथमिकताओं को केंद्र में रखा और बातचीत की मेज पर सभी पक्षों को साधते हुए 100 से अधिक पैराग्राफ वाले व्यापक दस्तावेज पर पूर्ण सहमति बनाई। नई दिल्ली घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून की सर्वोच्चता, बहुपक्षीय वैश्विक व्यवस्था के पुनरुद्धार और संप्रभु समानता के सिद्धांतों पर सभी देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।
ग्लोबल साउथ का नेतृत्व और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार का शंखनाद
इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से भारत ने एक बार फिर विकासशील और अविकसित देशों यानी ग्लोबल साउथ के सर्वमान्य प्रवक्ता के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ किया है। सम्मेलन में भारत ने यह तर्क मजबूती से रखा कि बीसवीं सदी के मध्य में स्थापित वैश्विक वित्तीय और सुरक्षा संस्थान आज की जनसांख्यिकीय और आर्थिक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। नई दिल्ली घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की संरचना में अनिवार्य सुधार, अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को स्थायी और अस्थायी श्रेणियों में न्यायसंगत प्रतिनिधित्व देने, तथा विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कोटा सिस्टम में तात्कालिक बदलाव की पुरजोर मांग दर्ज की गई।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और ब्रिक्स पेमेंट नेटवर्क की दिशा में प्रगति
आर्थिक संप्रभुता और प्रतिबंधों के जोखिम से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों ने अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को क्रमिक रूप से संतुलित करने पर गहरा मंथन किया। सम्मेलन में ‘ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स’ की प्रगति की समीक्षा की गई, जो सदस्य देशों की राष्ट्रीय वित्तीय मैसेजिंग प्रणालियों और डिजिटल भुगतान नेटवर्क्स के अंतर्संबंध पर कार्य कर रही है। घोषणापत्र में सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के निपटान के लिए स्थानीय मुद्राओं के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जिससे मुद्रा रूपांतरण की लागत में कमी आएगी और सीमा-पार व्यापारिक लेनदेन अधिक सुगम व सुरक्षित हो सकेगा।
पश्चिम एशिया संकट के बीच संतुलित मध्यस्थता का परिचय
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब पश्चिम एशिया का समुद्री और भू-भाग गंभीर सैन्य तनाव के साए में था। ब्रिक्स के नव-विस्तारित सदस्यों के रूप में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की उपस्थिति ने सम्मेलन के गलियारों में कूटनीतिक संवेदनशीलता को चरम पर पहुंचा दिया था। भारत ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ अपने प्रगाढ़ द्विपक्षीय संबंधों का उपयोग करते हुए संवाद और कूटनीतिक संयम का माहौल तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाई। भारतीय विदेश नीति के रणनीतिक संतुलन और गुटनिरपेक्षता के आधुनिक स्वरूप ने यह सिद्ध किया कि भारत प्रतिस्पर्धी हितों वाले देशों के बीच भी आम सहमति का विश्वसनीय सेतु बन सकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीसीआई और संक्रामक रोगों पर भारतीय पहल
सम्मेलन के एजेंडे को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप ढालते हुए भारत ने तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग को प्राथमिकता दी। भारत ने अपने सफल ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (DPI) और यूपीआई के मॉडल को साझा करने के साथ-साथ ‘ब्रिक्स साइंस एंड रिसर्च रिपोजिटरी’ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग पर एक संयुक्त कार्यबल का प्रस्ताव रखा। इसके अतिरिक्त, भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए भारत द्वारा प्रस्तावित संक्रामक रोगों की पूर्व-चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने के साझा तंत्र को नई दिल्ली घोषणापत्र में पूर्ण समर्थन प्रदान किया गया।
चीन को अध्यक्षता का हस्तांतरण और आगे की चुनौतियां
18वें शिखर सम्मेलन के सफल समापन के उपरांत भारत ने ब्रिक्स की आगामी अध्यक्षता वर्ष 2027 के लिए औपचारिक रूप से चीन को सौंप दी है। नई दिल्ली में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों और संस्थागत प्रस्तावों की वास्तविक सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले महीनों में इन पर कितनी तेजी से अमल होता है। सीमा विवाद और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के बावजूद भारत और चीन का एक ही आर्थिक मंच पर सहयोग करना यह दर्शाता है कि बहुपक्षीय कूटनीति में राष्ट्रीय हितों की सीमाएं कितनी व्यापक हो सकती हैं।
BRICS Summit 2026: निष्कर्ष
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, कूटनीतिक परिपक्वता और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का एक उत्कृष्ट प्रमाण बनकर उभरा है। नई दिल्ली घोषणापत्र पर आम सहमति बनाकर, ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को केंद्र में लाकर और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए व्यावहारिक आर्थिक समाधान प्रस्तुत करके भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई प्रदान की है। अब संपूर्ण विश्व की दृष्टि इस बात पर टिकी रहेगी कि नई दिल्ली में तय किए गए ये नीतिगत संकल्प आने वाले समय में वैश्विक शांति, व्यापार और स्थिरता को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।
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