Bihar MLC Election 2026: RJD-कांग्रेस के बीच 3 सीटों पर सीधी टक्कर, उम्मीदवारों की सूची जारी
बिहार MLC चुनाव में RJD और कांग्रेस के उम्मीदवार 3 सीटों पर सीधे मुकाबले में, 23 अक्टूबर को मतदान
Bihar MLC Election 2026: बिहार विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के आगामी चुनाव ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में अचानक भारी हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी महागठबंधन के दो सबसे बड़े घटक दल—राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस—सीट बंटवारे पर किसी ठोस सहमति के अभाव में सीधे टकराव की स्थिति में आ गए हैं। कांग्रेस आलाकमान की ओर से गुरुवार देर रात जारी की गई 5 उम्मीदवारों की अधिकृत सूची ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। इस सूची में शामिल पांच में से चार सीटों पर राजद अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा पहले ही कर चुका था।
दोनों दलों द्वारा एक ही सीट पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारने से यह साफ हो गया है कि कम से कम विधान परिषद के स्तर पर महागठबंधन की चुनावी एकजुटता तार-तार हो चुकी है। इस घटनाक्रम के बाद जहां विपक्षी खेमे में कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच भारी भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है, वहीं सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) इसे विपक्षी एकता का अंत करार देकर राजनीतिक बढ़त लेने की कोशिश में जुट गया है।
Bihar MLC Election 2026: कांग्रेस की 5 उम्मीदवारों वाली सूची
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा जारी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अनुमोदन से घोषित सूची में पांच प्रमुख नेताओं को प्रत्याशी बनाया गया है। पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को दोबारा चुनाव मैदान में उतारकर बड़ा दांव चला है। डॉ. झा इस सीट से पहले भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और शिक्षक समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
इसके अलावा कांग्रेस ने कोसी स्नातक सीट से मनोज कुमार जायसवाल, दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से रजनीकांत पाठक, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजय यादव और पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. असदुल्लाह खान को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया है। कांग्रेस की इस रणनीति से साफ झलकता है कि पार्टी अब बिहार में क्षेत्रीय सहयोगियों के आगे पूरी तरह बैकफुट पर रहने के बजाय अपने पारंपरिक जनाधार और संगठनात्मक उपस्थिति को मजबूत करने का जोखिम उठाने को तैयार है।
राजद ने सितंबर में ही 6 सीटों पर उतार दिए थे प्रत्याशी
कांग्रेस के इस आक्रामक कदम से पहले राष्ट्रीय जनता दल ने सितंबर के मध्य में ही बिहार विधान परिषद की 8 रिक्त हो रही सीटों में से 6 सीटों पर एकतरफा तरीके से अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। राजद की सूची में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार सिंह, पटना स्नातक सीट से दिलीप कुमार, कोसी स्नातक क्षेत्र से नितेश कुमार और दरभंगा स्नातक सीट से अनिल कुमार झा के नाम शामिल थे।
इसके साथ ही लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली राजद ने सारण शिक्षक सीट से प्रो. जयराम यादव और तिरहुत स्नातक सीट से डॉ. रश्मि विनायक गौतम को भी चुनावी अखाड़े में उतार दिया था। राजद ने उस समय दरभंगा शिक्षक और एक अन्य सीट को रणनीतिक रूप से छोड़ दिया था, लेकिन बाकी प्रमुख सीटों पर बिना सहयोगी दलों से अंतिम विमर्श किए प्रत्याशियों के नाम घोषित करने से कांग्रेस खेमे में अंदरूनी नाराजगी पनप रही थी।
दरभंगा शिक्षक सीट पर राजद ने नहीं दिया प्रत्याशी, झा के लिए राहत
इस पूरे सियासी घमासान के बीच केवल दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र बनकर उभरा है जहां दोनों सहयोगियों के बीच सीधी भिड़ंत टल गई है। राजद ने अपनी शुरुआती सूची में दरभंगा शिक्षक सीट से किसी प्रत्याशी का ऐलान नहीं किया था। कांग्रेस ने इस सीट पर अपने वरिष्ठ ब्राह्मण चेहरे और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को उम्मीदवार बनाया है।
इस सीट पर राजद प्रत्याशी न होने से डॉ. झा को महागठबंधन के मूल सामाजिक समीकरणों का लाभ मिलने की संभावना बनी हुई है। हालांकि, यहां उन्हें एनडीए और निर्दलीय शिक्षक प्रत्याशियों की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि शिक्षकों की समस्याओं, वेतन विसंगतियों और पुरानी पेंशन योजना को लेकर शिक्षक मतदाता पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने के लिए जाने जाते हैं।
क्या बिहार में औपचारिक रूप से टूट गया महागठबंधन?
कांग्रेस द्वारा राजद के खिलाफ चार सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बाद राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया में यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या बिहार में महागठबंधन टूट चुका है। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे ‘फ्रेंडली फाइट’ (दोस्ताना मुकाबला) का नाम दे रहे हैं, जबकि जमीनी राजनीति के जानकार इसे गहरे आंतरिक अविश्वास और सीट शेयरिंग में तालमेल की विफलता मान रहे हैं।
हालांकि, राजनीतिक रूप से यह समझना आवश्यक है कि विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक कोटे के चुनावों में उम्मीदवार उतारने मात्र से मुख्य विधानसभा या लोकसभा स्तर का गठबंधन औपचारिक रूप से समाप्त नहीं माना जा सकता। भारतीय राजनीति में कई मौकों पर नगर निकाय, पंचायत या विधान परिषद स्तर के चुनावों में सहयोगी दल स्थानीय समीकरणों के आधार पर स्वतंत्र रूप से लड़ते रहे हैं। लेकिन यह भी एक निर्विवाद सत्य है कि इस खुले टकराव से दोनों दलों के निचले स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच कटुता बढ़ेगी, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों में साझा प्रचार अभियानों पर अवश्य पड़ सकता है।
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का अनूठा चुनावी स्वरूप
बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों का चुनाव सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनावों से पूरी तरह भिन्न होता है। यहां राज्य की आम जनता मतदान नहीं करती, बल्कि केवल वही नागरिक वोट देने के पात्र होते हैं जो संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की विशिष्ट मतदाता सूची में विधिवत पंजीकृत होते हैं।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान करने के लिए मतदाता के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की उपाधि होनी चाहिए और उसने चुनाव अधिसूचना जारी होने से कम से कम तीन वर्ष पूर्व अपनी डिग्री पूरी कर ली हो। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में वोट डालने के लिए माध्यमिक विद्यालय या उससे उच्च स्तर के शिक्षण संस्थानों में न्यूनतम तीन वर्ष का अध्यापन अनुभव अनिवार्य होता है। यही कारण है कि इन सीटों पर जातियों के पारंपरिक गठजोड़ से ज्यादा स्थानीय पहुंच, बौद्धिक प्रभाव और शिक्षकों व कर्मचारियों के मुद्दों पर काम करने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिलती है।
23 अक्टूबर को मतदान: दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की खामोशी के मायने
बिहार विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक सीटों के मौजूदा सदस्यों का छह वर्षीय कार्यकाल नवंबर के अंत में समाप्त हो रहा है। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार इन सभी आठ सीटों के लिए आगामी 23 अक्टूबर 2026 को मतदान कराया जाएगा और इसके तुरंत बाद मतगणना की जाएगी।
फिलहाल उम्मीदवारों की घोषणा के बाद दोनों ही दलों के शीर्ष नेतृत्व—तेजस्वी यादव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष—ने इस सीधे मुकाबले पर कोई तल्ख बयानबाजी नहीं की है। माना जा रहा है कि नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक दोनों दलों के रणनीतिकार बैकडोर बातचीत के जरिए किसी समझौते पर पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। यदि नामांकन वापस नहीं होते हैं, तो महागठबंधन के पारंपरिक मतों में विभाजन निश्चित होगा, जिसका सीधा चुनावी लाभ भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड (JDU) नीत एनडीए गठबंधन को मिल सकता है।
Bihar MLC Election 2026: आगामी चुनावी भविष्य के लिए एक बड़ा इम्तिहान
बिहार विधान परिषद चुनाव में राजद और कांग्रेस के बीच चार सीटों पर खुला चुनावी मुकाबला विपक्षी राजनीति के लिए एक कठिन परीक्षा साबित होने जा रहा है। एक तरफ जहां राजद खुद को बिहार में विपक्ष का निर्विवाद अगुआ साबित करने की जल्दी में है, वहीं कांग्रेस यह स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि वह राज्य में अपने अस्तित्व और आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं करेगी।
23 अक्टूबर को होने वाला मतदान केवल विधान परिषद के नए सदस्यों का चुनाव नहीं करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि बिहार में महागठबंधन की एकता जमीनी हकीकत है या केवल चुनावी सुविधा का एक अस्थिर गठबंधन। आने वाले दिनों में नामांकन वापसी के घटनाक्रम और दोनों दलों के संयुक्त प्रचार की रणनीति पर समूचे बिहार की राजनीतिक निगाहें टिकी रहेंगी।
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