Asian Games 2026: कुमकुम, अंकिता और कीर्ति ने रचा इतिहास, भारत को महिला रिकर्व टीम में पहला गोल्ड

भारत ने फाइनल में दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर महिला रिकर्व टीम का पहला गोल्ड जीता

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Asian Games 2026: एशियाई खेल 2026 के तीरंदाजी मैदान से भारत के लिए खेल इतिहास की सबसे गौरवशाली खबर सामने आई है। भारतीय महिला तीरंदाजों ने शुक्रवार को वह कर दिखाया जो आज से पहले महाद्वीपीय खेलों के इतिहास में कभी नहीं हुआ था। महिला रिकर्व टीम स्पर्धा के बेहद कड़े और तनावपूर्ण फाइनल मुकाबले में अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम अनिल मोहोड़ की भारतीय तिकड़ी ने तीरंदाजी की वैश्विक महाशक्ति मानी जाने वाली दक्षिण कोरियाई टीम को 5-3 के सेट स्कोर से पराजित कर ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

एशियन गेम्स के इतिहास में भारतीय महिला रिकर्व टीम का यह अब तक का पहला स्वर्ण पदक है। इससे पूर्व भारतीय टीम कभी इस स्पर्धा के फाइनल में भी नहीं पहुंच पाई थी और देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कांस्य पदक तक ही सीमित रहा था। भारतीय तिकड़ी ने न केवल पहली बार खिताबी मुकाबले में जगह बनाकर इतिहास रचा, बल्कि फाइनल में ओलंपिक स्तर की दिग्गज कोरियाई टीम को घुटने टेकने पर मजबूर कर भारतीय तीरंदाजी का डंका पूरी दुनिया में बजा दिया।

Asian Games 2026: पहले दो सेटों में रही कांटे की टक्कर

अईची-नागोया के खचाखच भरे तीरंदाजी एरेना में जब भारत और दक्षिण कोरिया की टीमें स्वर्ण पदक के मुकाबले के लिए आमने-सामने उतरीं, तो दबाव दोनों खेमों पर साफ देखा जा सकता था। कोरियाई टीम कई दशकों से रिकर्व वर्ग में एकछत्र राज करती आई है, किंतु भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक और सटीक निशाने साधे। पहले सेट में दोनों ही टीमों के तीरंदाजों ने जबर्दस्त कौशल दिखाया और यह सेट 54-54 की बराबरी पर समाप्त हुआ, जिससे दोनों टीमों को 1-1 सेट अंक मिला।

दूसरे सेट में भी तनाव चरम पर था। दक्षिण कोरियाई खिलाड़ियों ने लगातार नौ और दस के स्कोर बनाए, जिसके जवाब में भारतीय तिकड़ी ने भी कोई ढिलाई नहीं बरती और दबाव के बीच शांत रहते हुए 56-56 से सेट को फिर से टाई करा दिया। दो सेटों के उपरांत दोनों देशों का कुल स्कोर 2-2 की बराबरी पर था। इस कड़े मुकाबले ने हर तीर के साथ स्टेडियम में बैठे भारतीय समर्थकों की धड़कनें तेज कर दी थीं।

तीसरे सेट में भारत का निर्णायक वार: कोरिया पर बनाई 4-2 की बढ़त

तीसरे सेट में मुकाबले का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मुड़ गया। भारतीय तिकड़ी ने हवा के रुख को बेहतरीन ढंग से भांपते हुए अत्यंत अनुशासित निशाने साधे। भारत ने इस सेट में 55 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। दूसरी ओर, भारतीय तीरंदाजों के सटीक निशानों से कोरियाई टीम मानसिक दबाव में आ गई और उनके तीरों ने बाहरी रिंग्स को छुआ, जिसके चलते कोरियाई टीम केवल 51 अंक ही जुटा सकी।

इस महत्वपूर्ण सेट को 55-51 से जीतकर भारत ने दो महत्वपूर्ण सेट अंक अर्जित किए और कुल स्कोर में 4-2 की मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली। अब भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए अंतिम चौथे सेट को केवल टाई कराने की आवश्यकता थी, जबकि कोरिया के लिए मुकाबले को शूट-ऑफ में ले जाने हेतु यह सेट हर हाल में जीतना अनिवार्य हो चुका था।

निर्णायक क्षण में 17 वर्षीय कुमकुम का ‘परफेक्ट 10’: और भारत बना चैंपियन

चौथा सेट फाइनल का सबसे नाटकीय और सांसें थाम देने वाला दौर साबित हुआ। कोरियाई तीरंदाजों ने वापसी का पूरा जोर लगाते हुए शुरुआत में ही बढ़त बना ली। भारतीय टीम को स्वर्ण पदक पक्का करने के लिए अपने अंतिम तीर पर किसी भी सूरत में ‘परफेक्ट 10’ की दरकार थी, अन्यथा यह सेट कोरिया के खाते में चला जाता और मैच टाई-ब्रेकर शूट-ऑफ में खिंच जाता।

इस असीम दबाव के क्षण में 17 वर्षीय युवा खिलाड़ी कुमकुम अनिल मोहोड़ ने कमान संभाली। पूरे स्टेडियम में छाई निस्तब्धता के बीच कुमकुम ने अपनी सांसें साधते हुए तीर छोड़ा, जो सीधे लक्ष्य के मध्य बिंदु (Bullseye) में जाकर धंसा और बोर्ड पर 10 अंक चमक उठे। इस अद्भुत शॉट के साथ ही भारत ने चौथा सेट 54-54 से टाई करा लिया। इसके साथ ही अंतिम सेट स्कोर 5-3 हो गया और भारतीय दल खुशी से झूम उठा।

सेमीफाइनल में चीन को 5-1 से रौंदकर किया था फाइनल में प्रवेश

इस ऐतिहासिक स्वर्णिम विजय की पटकथा भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में ही लिख दी थी। सेमीफाइनल मुकाबले में भारत की टक्कर एक अन्य एशियाई ताकत चीन से हुई थी। उस मैच में भी भारतीय तिकड़ी ने अप्रत्याशित संयम और तालमेल का प्रदर्शन करते हुए चीनी टीम को एकतरफा अंदाज में 5-1 से धूल चटा दी थी।

चीन को मात देकर भारतीय महिला रिकर्व टीम ने पहली बार एशियन गेम्स के फाइनल में कदम रखा था। टूर्नामेंट के सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों पर पहले चीन और फिर दक्षिण कोरिया जैसी दो दिग्गज टीमों को लगातार मात देकर स्वर्ण पदक जीतना यह सिद्ध करता है कि भारतीय तीरंदाजी का स्तर अब दुनिया के किसी भी देश से कमतर नहीं है।

अंकिता का अनुभव और कीर्ति का दृढ़ संकल्प बना टीम की रीढ़

इस ऐतिहासिक जीत में सीनियर तीरंदाज अंकिता भकत का लंबा अनुभव अत्यंत निर्णायक रहा। अंकिता पूर्व में भी एशियाई खेलों और एशियन चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और पिछले खेलों में कांस्य पदक विजेता टीम की मुख्य स्तंभ रही थीं। फाइनल के नाजुक मोड़ों पर जब कोरियाई टीम लगातार दबाव बना रही थी, तब अंकिता ने टीम की एंकर की भूमिका निभाते हुए युवा खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया और स्कोरबोर्ड को निरंतर गति दी।

वहीं, कीर्ति शर्मा ने भी पूरे टूर्नामेंट में असाधारण निरंतरता का परिचय दिया। टीम इवेंट में किसी एक खिलाड़ी के दम पर जीत संभव नहीं होती, बल्कि तीनों तीरों का समग्र संतुलन ही अंतर पैदा करता है। कीर्ति ने सेमीफाइनल और फाइनल दोनों मुकाबलों में लगातार 9 और 10 के स्कोर साधकर टीम के कुल योग को हमेशा सुरक्षित दायरे में बनाए रखा।

कुमकुम अनिल मोहोड़: भारतीय तीरंदाजी का नया चमकता सितारा

इस स्वर्णिम सफलता की सबसे चर्चित नायिका बनकर उभरी हैं 17 वर्षीय कुमकुम अनिल मोहोड़। इतनी कम उम्र में और अपने पहले ही बड़े एशियाई खेलों में फाइनल के अंतिम तीर पर परफेक्ट 10 लगाकर स्वर्ण पदक सुरक्षित करना उनकी अद्वितीय मानसिक दृढ़ता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।

कुमकुम ने इसी वर्ष अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर अपनी छाप छोड़नी शुरू की थी, जहां उन्होंने वर्ल्ड कप स्तर पर टीम और मिश्रित स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते थे। एशियन गेम्स के इस महामंच पर दबाव के पलों में उनके द्वारा साधे गए निशाने यह प्रमाणित करते हैं कि वे भारतीय तीरंदाजी के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत ध्वजवाहक हैं।

Asian Games 2026: भारतीय तीरंदाजी के लिए मील का पत्थर और पदक तालिका में छलांग

महिला रिकर्व वर्ग में यह स्वर्ण पदक भारतीय खेल परिदृश्य के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। भारत ने कम्पाउंड तीरंदाजी में निरंतर वैश्विक दबदबा बनाए रखा है, किंतु पारंपरिक और ओलंपिक विधा माने जाने वाले रिकर्व वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोरियाई और चीनी दबदबे को तोड़ना हमेशा एक कठिन चुनौती रहा है। इस जीत ने भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी को वैश्विक मानचित्र पर शीर्ष पायदान पर स्थापित कर दिया है।

इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही एशियाई खेल 2026 में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है, जिससे भारत की कुल पदक तालिका को भी नई मजबूती मिली है। तीरंदाजी के व्यक्तिगत और मिश्रित स्पर्धाओं के मुकाबले अभी शेष हैं, और इस ऐतिहासिक स्वर्ण पदक ने पूरे भारतीय दल में नए उत्साह, आत्मविश्वास और पदक जीतने की अदम्य ऊर्जा का संचार कर दिया है।

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