Azamgarh Encounter: पत्नी और दो पुजारियों की हत्या के आरोपी की मुठभेड़ में मौत, बेटे की भी गई जान

सात घंटे के ऑपरेशन के बाद पुलिस ने दो बच्चों को सुरक्षित बचाया, आरोपी का बेटा भी मृत

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Azamgarh Encounter: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र अंतर्गत शंभूपुर गांव में मंगलवार शाम से शुरू हुआ रोंगटे खड़े कर देने वाला खूनी घटनाक्रम बुधवार तड़के एक भीषण पुलिस मुठभेड़ के साथ समाप्त हुआ। अपने ही घर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अपनी पत्नी और पूजा करा रहे दो पुजारियों की लाइसेंसी असलहे से गोली मारकर हत्या करने वाले सिरफिरे आरोपी अरविंद सिंह को पुलिस ने जवाबी मुठभेड़ में मार गिराया है।

इस अत्यंत संवेदनशील ऑपरेशन के दौरान आरोपी द्वारा कमरे के भीतर की गई अंधाधुंध फायरिंग में उसके एक नाबालिग बेटे को भी गोली लग गई, जिसने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस की विशेष स्वाट और एसओजी टीमों ने करीब सात घंटे तक चले भारी गतिरोध के बाद कमरे में बंधक बने दो अन्य बच्चों को सकुशल बाहर निकाल लिया। एक ही घर में हुए इस वीभत्स हत्याकांड और मुठभेड़ में आरोपी व उसके बेटे सहित कुल पांच लोगों की मौत के बाद समूचे पूर्वांचल में सनसनी फैल गई है और गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

Azamgarh Encounter: पहचान पत्र मांगने पर शुरू हुआ खूनी संघर्ष

शंभूपुर गांव में मंगलवार की शाम अरविंद सिंह के पैतृक आवास पर एक धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा था। स्थानीय पुलिस व प्रत्यक्षदर्शियों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह पूजा अरविंद के दिवंगत भाई की आत्मशांति के लिए आयोजित की गई थी, जिनकी कुछ वर्ष पूर्व संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। परिवार के अन्य सदस्य इस अनुष्ठान को परंपरागत रूप से करा रहे थे, किंतु अरविंद सिंह इसके पक्ष में नहीं था।

शाम के समय जब अरविंद सिंह बाहर से घर लौटा और उसने दलान में पूजा की वेदी पर पुजारियों को देखा, तो वह भड़क उठा। चश्मदीदों के अनुसार, अरविंद ने अनुष्ठान करा रहे पुजारियों से आक्रामक लहजे में उनकी जाति, पृष्ठभूमि और पहचान से संबंधित सरकारी दस्तावेज दिखाने की मांग शुरू कर दी। पत्नी बबीता सिंह ने जब इस अमर्यादित व्यवहार का विरोध करते हुए धार्मिक कार्य में व्यवधान न डालने की गुहार लगाई, तो विवाद हाथापाई तक पहुंच गया।

लाइसेंसी असलहे से ताबड़तोड़ फायरिंग: पत्नी और दो आचार्यों की मौके पर ही मौत

विवाद के चरम पर पहुंचते ही आक्रोशित अरविंद सिंह ने अपना लाइसेंसी हथियार निकाल लिया और अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। घर के आंगन में मची चीख-पुकार के बीच गोलियां लगने से उसकी 42 वर्षीय पत्नी बबीता सिंह, पूजा करा रहे आचार्य महेंद्र पाठक और सहयोगी पुरोहित अखिलेश मिश्रा लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े।

सिर और सीने में गोलियां लगने के कारण तीनों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। गोलीबारी की भीषण आवाज सुनकर अनुष्ठान में उपस्थित अन्य ग्रामीण और यजमान जान बचाकर बाहर की ओर भागे। घटना की सूचना मिलते ही गांव में कोहराम मच गया और स्थानीय ग्रामीणों ने तत्काल अहरौला थाना पुलिस को सामूहिक हत्याकांड की सूचना दी।

तीन बच्चों को कमरे में बनाया बंधक: पुलिस छावनी में तब्दील हुआ शंभूपुर

तिहरे हत्याकांड को अंजाम देने के पश्चात आरोपी अरविंद सिंह अपने तीन मासूम बच्चों को खींचते हुए घर के पिछले हिस्से में स्थित एक पक्के कमरे में ले गया और उसने अंदर से मजबूत कुंडी और सिटकनी बंद कर ली। सूचना पाकर जब आजमगढ़ पुलिस, स्वाट टीम और कई थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचा, तो आरोपी ने खिड़की से हथियार लहराते हुए पुलिस को पीछे हटने की चेतावनी दी और बच्चों को जान से मारने की धमकी देकर उन्हें ‘मानव ढाल’ बना लिया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण और प्रशासनिक अधिकारी भारी फोर्स और बुलेटप्रूफ जैकेटों के साथ मौके पर पहुंचे। कमरे के भीतर तीन मासूमों की जान दांव पर लगी होने के कारण पुलिस ने किसी भी प्रकार की सीधी बल प्रयोग की कार्रवाई से परहेज किया और आरोपी को बातचीत के जरिए आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने की रणनीति बनाई गई।

सात घंटे चला तनावपूर्ण गतिरोध: समझाने के सारे प्रयास हुए विफल

मंगलवार रात आठ बजे से बुधवार तड़के तीन बजे तक, लगभग सात घंटे तक पुलिस और हत्यारोपी के बीच हाई-वोल्टेज ड्रामा और संवाद चलता रहा। लाउडस्पीकर और खिड़की के झरोखे से पुलिस अधिकारियों ने लगातार अरविंद से अपने हथियार डालकर बाहर आने की भावुक अपील की।

परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों और उसके परिचितों से भी फोन और खिड़की के जरिए मिन्नतें करवाई गईं कि वह बच्चों को कोई नुकसान न पहुंचाए और कानून के सामने आत्मसमर्पण कर दे। किंतु मानसिक रूप से विक्षिप्तता की हद तक उग्र हो चुका आरोपी केवल एक ही रट लगाए हुए था कि यदि पुलिस ने घेरा नहीं हटाया तो वह किसी को जीवित नहीं छोड़ेगा। रात के गहराने के साथ ही कमरे के भीतर से बच्चों की रोने और चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं, जिससे बाहर खड़े सुरक्षाबलों का तनाव चरम पर पहुंच गया।

कमरे से आई गोली की आवाज और पुलिस का निर्णायक धावा

बुधवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे अचानक कमरे के भीतर से एक जोरदार फायर की आवाज गूंजी, जिसके बाद बच्चों की तेज चीखें सुनाई दीं। अंदर अनहोनी की आशंका को देखते हुए पुलिस नेतृत्व ने बिना एक पल गंवाए ‘टैक्टिकल असॉल्ट’ का आदेश दिया।

विशेष कमांडो और पुलिसकर्मियों ने कमरे के मजबूत दरवाजे को बस्टिंग टूल्स से तोड़ा और अंदर प्रवेश किया। पुलिस को देखते ही कोने में खड़े अरविंद सिंह ने अपनी राइफल से सुरक्षाबलों पर सीधा फायर झोंक दिया। पुलिस की जवाबी आत्मरक्षात्मक गोलीबारी में आरोपी अरविंद सिंह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा।

कमरे के भीतर धुआं छंटने पर पुलिस ने देखा कि आरोपी द्वारा चलाई गई गोली से उसका एक नाबालिग बेटा फर्श पर खून से लथपथ पड़ा था। पुलिसकर्मियों ने अदम्य साहस दिखाते हुए कोने में सहमे खड़े अन्य दो बच्चों को सुरक्षित अपनी गोद में उठाकर बाहर निकाला और सुरक्षित घेरे में ले लिया।

अस्पताल में आरोपी और बेटे ने तोड़ा दम, दो बच्चे सुरक्षित

गोलीबारी शांत होते ही पुलिस ने तत्काल एंबुलेंस मंगवाकर गंभीर रूप से घायल आरोपी अरविंद सिंह और उसके गोली लगे बेटे को जिला अस्पताल आजमगढ़ भेजा। चिकित्सकों के दल ने आपातकालीन चिकित्सा कक्ष में दोनों को बचाने का भरसक प्रयास किया, किंतु अत्यधिक रक्तस्राव और घातक चोटों के कारण उपचार के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई।

मुठभेड़ के चंगुल से बचाए गए दोनों बच्चों को प्राथमिक चिकित्सीय जांच और मनोवैज्ञानिक परामर्श के उपरांत उनके निकटतम परिजनों के संरक्षण में सौंप दिया गया है। घटना की भयावहता से बच्चे गहरे सदमे में हैं, जिनकी काउंसलिंग की व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है।

फोरेंसिक साक्ष्य, लाइसेंसी हथियारों की जब्ती और विधिक कार्रवाई

बुधवार सुबह फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की फील्ड यूनिट ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पूजा स्थल और मुठभेड़ वाले कमरे से दर्जनों खोखा कारतूस, जिंदा राउंड, रक्त के नमूने और अपराध में प्रयुक्त लाइसेंसी हथियार को विधिक रूप से सील कर कब्जे में ले लिया गया है।

पुलिस विभाग अब इस बात की भी गहन जांच कर रहा है कि आरोपी को किन परिस्थितियों और सत्यापन के आधार पर शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया था और क्या उसका पूर्व में कोई आपराधिक अथवा मनोरोग संबंधी इतिहास रहा था। सभी पांचों मृतकों—बबीता सिंह, महेंद्र पाठक, अखिलेश मिश्रा, अरविंद सिंह और उसके बेटे—के शवों का पंचनामा भरकर मेडिकल बोर्ड द्वारा वीडियोग्राफी की निगरानी में पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

Azamgarh Encounter: निष्कर्ष

आजमगढ़ के शंभूपुर गांव का यह हृदयविदारक हत्याकांड अंधविश्वास, पारिवारिक वैमनस्य और अनियंत्रित क्रोध का ऐसा खौफनाक रूप है जिसने पलक झपकते ही एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया और दो निर्दोष आचार्यों की बलि ले ली। यद्यपि पुलिस प्रशासन ने सात घंटे तक धैर्य और संयम का परिचय देकर दो मासूम बच्चों को नई जिंदगी दी, किंतु इस त्रासद अंत ने समाज के समक्ष घरेलू हिंसा और लाइसेंसी हथियारों के दुरुपयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। समूचे क्षेत्र में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है, जबकि पुलिस की अग्रिम विधिक व दंडात्मक जांच जारी है।

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