West Bengal News: सेना भर्ती में अटक गया सपना, मतदाता सूची से नाम कटा तो डोमिसाइल नहीं मिला, युवक हाईकोर्ट पहुंचा

West Bengal News: पश्चिम बंगाल के युवक ने सेना भर्ती का पहला चरण पास किया लेकिन मतदाता सूची से नाम हटने पर डोमिसाइल नहीं मिला। कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका, जल्द सुनवाई संभव।

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West Bengal News: पश्चिम बंगाल के एक युवक का सेना में भर्ती होने का सपना कागजी अड़चन पर अटक गया है। शुरुआती चरण में सफलता मिलने के बाद अगले चरण के लिए डोमिसाइल प्रमाणपत्र चाहिए था। प्रशासन ने प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया क्योंकि उसका नाम मतदाता सूची से हट चुका है। अब मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच गया है।

युवक का कहना है कि भर्ती के अहम मोड़ पर सिर्फ एक दस्तावेज न मिलने से भविष्य प्रभावित हो सकता है। उसने अदालत से हस्तक्षेप मांगा है ताकि आगे की प्रक्रिया में शामिल हो सके। सुनवाई के बाद ही पता चलेगा कि राहत मिलती है या नहीं।

West Bengal News: भर्ती के पहले चरण के बाद अटकी प्रक्रिया

जानकारी के मुताबिक अभ्यर्थी ने भारतीय सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए आवेदन किया था। चयन के शुरुआती चरण में वह सफल रहा और आगे बढ़ने की पात्रता भी पा ली। दस्तावेज सत्यापन के समय डोमिसाइल प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ी। यहीं अड़चन आई।

सशस्त्र बलों की भर्ती में डोमिसाइल कई बार जरूरी दस्तावेज माना जाता है। बिना इसके अगला चरण मुश्किल हो जाता है। देखने पर लगता है कि परीक्षा या शारीरिक परीक्षण पार करने के बाद भी कागजी काम अधूरा रह गया।

प्रशासन ने प्रमाणपत्र क्यों नहीं दिया

Indian Army Recruitment
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अभ्यर्थी ने संबंधित प्रशासन के पास डोमिसाइल के लिए आवेदन किया। प्रशासन ने जारी करने से मना कर दिया। वजह बताई गई कि उसका नाम मतदाता सूची में नहीं है। इसी आधार पर प्रमाणपत्र नहीं बन सकता।

मामला कुछ इस तरह से है कि मतदाता सूची से नाम कट जाना स्थानीय निवास साबित करने में बाधा बन गया। युवक का तर्क है कि वह भर्ती के महत्वपूर्ण चरण तक पहुंच चुका है। सिर्फ इस दस्तावेज की कमी से पूरा सपना अधर में लटक सकता है।

हाईकोर्ट में क्या मांग की गई

अभ्यर्थी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। वह अदालत से हस्तक्षेप चाहता है ताकि दस्तावेज संबंधी समस्या सुलझे और वह भर्ती के अगले चरण में शामिल हो पाए। बिना डोमिसाइल के आगे बढ़ना उसके लिए कठिन हो गया है।

कोर्ट के समक्ष अब यह तय होगा कि ऐसी स्थिति में प्रमाणपत्र जारी करने या प्रक्रिया में राहत देने का कोई रास्ता निकलता है या नहीं। जल्द सुनवाई की संभावना बताई जा रही है। फैसला आने तक अभ्यर्थी की नियुक्ति प्रक्रिया रुकी हुई है।

West Bengal News: युवाओं के लिए दस्तावेज कितने अहम

सेना या अन्य सरकारी भर्तियों में डोमिसाइल, निवास प्रमाण और मतदाता पहचान कई बार एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। नाम सूची से हटने की वजह अलग-अलग हो सकती है, लेकिन नतीजा एक ही होता है। कागजात पूरे न होने पर चयन अटक जाता है।

जानकार बताते हैं कि कई युवा पहले चरण में मेहनत करके आगे बढ़ते हैं। फिर एक प्रमाणपत्र की कमी रास्ता रोक देती है। यह मामला उसी कड़ी में दिखता है। पश्चिम बंगाल के अन्य अभ्यर्थी भी ऐसे अनुभव सुनकर सतर्क हो सकते हैं कि मतदाता सूची और निवास संबंधी कागजात समय पर अपडेट रहें।

यहां एक बात और उभरती है। भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध होती है। अदालती राहत मिलने में भी समय लग सकता है। इसलिए अभ्यर्थी को दोनों तरफ नजर रखनी पड़ती है। एक ओर कोर्ट की तारीख, दूसरी ओर भर्ती बोर्ड की समयसीमा।

युवक ने देश की सेवा का सपना देखा था। पहला पड़ाव पार करने के बाद मतदाता सूची से नाम न होने की वजह से डोमिसाइल नहीं मिला। प्रशासन ने प्रमाणपत्र देने से इनकार किया। अब कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका लंबित है। अदालत की सुनवाई के बाद ही साफ होगा कि दस्तावेज मिलता है या भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ने की कोई राहत मिलती है। मामला कोर्ट के सामने है। अगली सुनवाई का इंतजार है।

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