Bihar Flood: गंगा-सोन-पुनपुन खतरे से ऊपर, 13 जिले प्रभावित, राहत राशि का ऐलान

Bihar Flood: पटना समेत 13 जिलों में बाढ़ का कहर। गंगा गांधी घाट पर 127 सेमी ऊपर। घर, फसल और मौत पर कितनी राहत मिलेगी, जानें पूरी डिटेल और बचाव की तैयारी।

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Bihar Flood: बिहार के कई इलाकों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पटना में गंगा, सोन और पुनपुन ने चिंता बढ़ा दी है। राज्य के 13 जिले बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। निचले इलाकों में पानी घुसने से जनजीवन ठप हो गया है। प्रशासन हाई अलर्ट पर है और राहत-बचाव का काम चल रहा है।

गांधी घाट पर गंगा खतरे से 127 सेंटीमीटर ऊपर है। दीघा पर 61 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। श्रीपालपुर में पुनपुन दो मीटर से ज्यादा ऊपर चढ़ चुकी है और घरों तक पानी पहुंच गया है। सवाल यह है कि जलस्तर और कितना बढ़ेगा और फंसे लोगों को कब तक निकाला जाएगा।

Bihar Flood: पटना और आसपास नदियों का हाल

देखने पर लगता है कि राजधानी समेत आसपास के इलाके सबसे ज्यादा दबाव में हैं। इंद्रपुरी बराज से सोन में साढ़े पांच लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया है। इसके बाद मनेर, दानापुर, बख्तियारपुर और मोकामा के दियारा इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। फंसे लोगों को निकालने के लिए 12 सरकारी नावें तैनात की गई हैं।

समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर में गंगा खतरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर पहुंच गई है। भागलपुर में कटाव की समस्या अलग है। राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर तेज कटाव हो रहा है। इससे रेलवे के टैगिंग बांध को खतरा पैदा हो गया है। बांध बचाने के लिए करीब 200 ट्रैक्टर और तीन स्टीमर बालू की बोरियां गिराने में जुटे हैं। काम दिन-रात चल रहा है।

रोहतास में टीलों पर फंसे लोग

रोहतास के नौहट्टा में सोन का जलस्तर बढ़ने से नदी के टीलों पर खेती करने वाले करीब सौ लोग फंस गए हैं। उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश चल रही है। मामला कुछ इस तरह से है कि पानी चढ़ने की रफ्तार के साथ बचाव टीमों को भी तेज करना पड़ रहा है।

बाढ़ से प्रभावित जिलों में दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, समस्तीपुर और मुंगेर शामिल हैं। इनके निचले इलाकों में पानी फैलने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। फसल और मवेशी भी प्रभावित हो रहे हैं।

गंगा, सोन और पुनपुन की स्थिति

गंगा दीघा, गांधी घाट, हाथीदह और कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मुंगेर में चेतावनी स्तर पार हो चुका है। सोन मनेर में खतरे से ऊपर है। पुनपुन श्रीपालपुर में करीब दो मीटर ऊपर है और आसपास के घरों में घुस चुकी है।

जानकार बताते हैं कि बराज से पानी छोड़ने के बाद निचले इलाकों में स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए प्रशासन निगरानी बनाए हुए है। आम लोगों को निचले इलाकों में सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

Bihar Flood: घर, फसल और जान-माल पर राहत कितनी

आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रभावित परिवारों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मकसद फसल, पशु और मकान के नुकसान का जल्द आकलन कर अनुदान देना है। पानी उतरने के बाद कृषि विभाग अंतिम आकलन करेगा।

पक्का घर पूरी तरह ध्वस्त होने पर 1.20 लाख रुपये का प्रावधान है। आंशिक रूप से पक्का घर क्षतिग्रस्त हो तो 6500 रुपये मिल सकते हैं। आंशिक कच्चा घर पर 4000 रुपये और झोपड़ी पूरी तरह नष्ट होने पर 8000 रुपये दिए जाने का प्रावधान है। पशुओं का बाड़ा नष्ट होने पर 3000 रुपये मिल सकते हैं।

सामान्य स्थिति में फसल नुकसान पर प्रति परिवार 7000 रुपये राहत का प्रावधान है। अलग-अलग फसलों की निर्धारित दर के हिसाब से बाद में भुगतान होगा। बाढ़ में मौत होने पर आश्रितों को 4 लाख रुपये दिए जाते हैं। एक सप्ताह या उससे ज्यादा अस्पताल भर्ती पर 16 हजार और एक सप्ताह से कम पर 5400 रुपये का प्रावधान है। चालीस प्रतिशत अंग क्षति पर 74 हजार और साठ प्रतिशत पर ढाई लाख रुपये मिल सकते हैं।

घर बहने या पूरी तरह प्रभावित होने पर कपड़ों के लिए 2500, बर्तन के लिए 2500 और अन्य जरूरी सामान के लिए 2000 रुपये की सहायता का भी प्रावधान है। ये राशियां नुकसान के आकलन के बाद जारी होती हैं।

यहां एक बात और है। सूची बनने और आकलन पूरा होने में समय लगता है। फंसे परिवार तब तक नावों और स्थानीय मदद पर निर्भर रहते हैं। प्रशासन राहत और बचाव दोनों पर नजर रखे हुए है। जलस्तर की निगरानी जारी है। आगे की स्थिति नदियों के पानी और मौसम पर निर्भर करेगी। प्रभावित इलाकों में लोग सतर्क रहें और आधिकारिक सलाह का पालन करें। राहत प्रक्रिया की अगली जानकारी विभाग की ओर से आने वाली है।

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