Mendu Lokanatham ACB Raid: TTD अधिकारी मेंडु लोकनाथम के ठिकानों पर ACB का छापा, सोना-नकदी बरामदगी का दावा
आय से अधिक संपत्ति मामले में कई ठिकानों पर तलाशी, सोना, नकदी और संपत्ति दस्तावेज मिलने का दावा
Mendu Lokanatham ACB Raid: विश्वप्रसिद्ध तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रशासनिक महकमे में उस समय भारी खलबली मच गई, जब आंध्र प्रदेश भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने संस्थान के डिप्टी एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (डिप्टी ईओ) मेंडु लोकनाथम से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ सुनियोजित छापेमारी की। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोपों की प्राथमिक जांच के सिलसिले में की गई इस कार्रवाई के तहत अधिकारी के निजी आवास, तिरुमला स्थित आधिकारिक कार्यालय, गेस्ट हाउस, रिश्तेदारों के परिसरों और बैंक लॉकरों की सघन तलाशी ली गई।
जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, तलाशी अभियान के दौरान लगभग 2 किलोग्राम सोने के आभूषण, करीब 5 करोड़ रुपये की बेहिसाबी नकदी और अचल संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण विलेख (डीड्स) व वित्तीय दस्तावेज बरामद किए जाने की बात सामने आई है। लगभग डेढ़ दशक बाद टीटीडी के इतने वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर के अधिकारी के विरुद्ध राज्य निगरानी एजेंसी का इतना व्यापक तलाशी अभियान देखने को मिला है।
Mendu Lokanatham ACB Raid:सुबह 6 बजे से एक साथ कई ठिकानों पर दबिश, बैंक लॉकरों की भी खुली जांच
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की विभिन्न विशेष जांच टीमों ने 2 सितंबर की सुबह करीब छह बजे एक साथ कई ठिकानों पर समन्वित अभियान शुरू किया। अधिकारियों की टीम ने तिरुपति के पेड्डाकापु लेआउट स्थित लोकनाथम के मुख्य आवास पर छापेमारी करने के साथ ही पहाड़ी पर स्थित तिरुमला कार्यालय और उनके नियंत्रण वाले वीआईपी गेस्ट हाउस को भी अपने दायरे में लिया।
तलाशी की परिधि केवल आवासीय परिसरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वित्तीय लेन-देन के स्रोतों की पड़ताल के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की तिरुपति स्थित एसटीवी नगर शाखा में मौजूद लोकनाथम और उनके परिजनों के बैंक लॉकरों को भी खुलवाया गया। इसके अतिरिक्त, कुछ करीबी रिश्तेदारों के आवासों की भी तलाशी ली गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं संदिग्ध वित्तीय संपत्तियों को बेनामी तौर पर स्थानांतरित तो नहीं किया गया था।
कौन हैं मेंडु लोकनाथम: टीटीडी प्रशासन में रहा है लंबा कार्यकाल
मेंडु लोकनाथम लंबे समय से तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के प्रशासनिक तंत्र का प्रमुख हिस्सा रहे हैं। वे अप्रैल 2023 से डिप्टी एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के संवेदनशील पद पर तैनात हैं। इससे पूर्व भी वे मंदिर प्रशासन के विभिन्न अनुभागों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं।
भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन, दैनिक सेवा, प्रोटोकॉल आवंटन, लॉजिस्टिक्स और तीर्थयात्रियों से जुड़ी व्यवस्थाओं के सुचारु संचालन में डिप्टी ईओ स्तर के अधिकारियों की प्रत्यक्ष प्रशासनिक भूमिका होती है। यही कारण है कि उनके खिलाफ हुई इस उच्चस्तरीय निगरानी कार्रवाई को मंदिर प्रबंधन की आंतरिक व्यवस्था और पारदर्शिता के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है।
आय से अधिक संपत्ति का मामला: आय के ज्ञात स्रोतों और परिसंपत्तियों का होगा मिलान
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई यह कार्रवाई ‘आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति’ (Disproportionate Assets) के कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है। किसी भी लोक सेवक के विरुद्ध इस प्रकार के मामलों में जांच एजेंसी संबंधित अधिकारी के संपूर्ण सेवाकाल की वैध आय, टैक्स रिटर्न, बचत और ज्ञात निवेशों का उनके पास पाई गई कुल भौतिक व वित्तीय संपत्तियों से तुलनात्मक मिलान करती है।
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक तलाशी में जब्त की गई नकदी, सोने के आभूषणों और भूमि-भवनों के दस्तावेजों का प्राथमिक पंचनामा तैयार किया गया है। वर्तमान में इन संपत्तियों का मूल्यांकन और खरीद के समय के वैध वित्तीय स्रोतों का सत्यापन किया जा रहा है। यदि अधिकारी इन संपत्तियों के अर्जन के लिए वैध आय स्रोत और स्पष्ट बैंकिंग साक्ष्य प्रस्तुत करने में असमर्थ रहते हैं, तो मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन का शिकंजा और कस जाएगा।
Mendu Lokanatham ACB Raid: चर्चित घी खरीद विवाद और आंतरिक वित्तीय जांच की कड़ियां
आंध्र प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इस छापेमारी को हाल के महीनों में चर्चा में रहे टीटीडी के कथित घी आपूर्ति विवाद और आंतरिक खरीद प्रक्रियाओं की जांच से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, सामग्री खरीद और निविदा प्रक्रियाओं की स्वतंत्र समीक्षा के दौरान संस्थान से जुड़े कुछ अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका और अप्रत्याशित वित्तीय लेनदेन के संकेत प्राप्त हुए थे, जिसके उपरांत निगरानी शाखा ने गोपनीय जांच प्रारंभ की थी।
हालांकि, एसीबी ने अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम औपचारिक आरोप-पत्र जारी नहीं किया है और न ही अधिकारी की औपचारिक गिरफ्तारी की घोषणा की गई है। एजेंसी का मुख्य ध्यान फिलहाल सभी बरामद संपत्तियों का फॉरेंसिक ऑडिट पूरा करने, बैंक खातों की जांच करने और जब्त दस्तावेजों का मूल्यांकन पूरा करने पर केंद्रित है, जिसके आधार पर आगामी विधिक कदमों का निर्धारण किया जाएगा।
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