Maternal Health Bihar: बिहार में संस्थागत प्रसव बढ़कर 81.1%, मातृ-नवजात देखभाल में भी बड़ा सुधार
संस्थागत प्रसव 76.2% से बढ़कर 81.1% हुआ, ANC और प्रसवोत्तर देखभाल में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी
Maternal Health Bihar: बिहार में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा नीतिगत और जमीनी सुधार दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में संस्थागत प्रसव (अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसव) का अनुपात बढ़कर 81.1 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। पूर्ववर्ती सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 76.2 प्रतिशत दर्ज किया गया था। महज तीन वर्षों के अंतराल में लगभग 5 प्रतिशत की यह ठोस वृद्धि दर्शाती है कि राज्य के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क न केवल मजबूत हुआ है, बल्कि सुरक्षित प्रसव को लेकर सामाजिक व्यवहार में भी बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है।
संस्थागत प्रसव में आई इस प्रगति के साथ-साथ गर्भावस्था के शुरुआती चरण में जांच (एएनसी), प्रसवोत्तर देखभाल और नवजात शिशुओं की तत्काल चिकित्सकीय निगरानी से जुड़े पैमानों पर भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है।
Maternal Health Bihar: पहली तिमाही में प्रसव पूर्व जांच (ANC) और कवरेज में उछाल
गर्भावस्था के जोखिमों को समय रहते पहचानने के लिए सबसे अहम मानी जाने वाली पहली तिमाही की एंटी-नेटल केयर (ANC) में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही में एएनसी कराने वाली गर्भवती महिलाओं का अनुपात 52.9 प्रतिशत से बढ़कर 63.9 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान कम से कम एक बार स्वास्थ्य जांच या एएनसी सेवाओं से जुड़ने वाली महिलाओं का कुल दायरा 81.6 प्रतिशत से उछलकर सीधे 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती तीन महीनों में जांच होने से उच्च रक्तचाप (प्री-एक्लेम्पसिया), गंभीर एनीमिया, गर्भावधि मधुमेह और भ्रूण के विकास संबंधी विकारों की समय पर पहचान हो जाती है। आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम द्वारा जमीनी स्तर पर किए गए निरंतर ट्रैकिंग अभियानों के चलते महिलाएं अब गर्भधारण के शुरुआती हफ्तों में ही नजदीकी स्वास्थ्य उप-केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में पंजीकरण करा रही हैं।
प्रसवोत्तर निगरानी और नवजात देखभाल में ऐतिहासिक सुधार
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं का दूसरा सबसे संवेदनशील चरण प्रसव के तुरंत बाद के 48 घंटे होते हैं। इस दिशा में बिहार के स्वास्थ्य तंत्र ने व्यापक सुधार दर्ज किया है। प्रसव के दो दिनों के भीतर माताओं को मिलने वाली प्रसवोत्तर देखभाल (Postnatal Care) का अनुपात 57.3 प्रतिशत से बढ़कर 69.9 प्रतिशत हो गया है।
इससे भी अधिक उल्लेखनीय सुधार नवजात शिशुओं की तत्काल देखभाल के मोर्चे पर देखा गया है, जहां प्रसव के 48 घंटों के भीतर नवजात की स्वास्थ्य जांच का दायरा 59.3 प्रतिशत से बढ़कर 76.2 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। प्रसव के तुरंत बाद संक्रमण, हाइपोथर्मिया और श्वसन संबंधी अवरोधों की त्वरित पहचान होने से नवजात शिशु मृत्यु दर (NMR) पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिल रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों की रीढ़ मजबूत
राज्य में होने वाले कुल प्रसवों में से 57.5 प्रतिशत प्रसव सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में संपन्न हुए हैं। विशेष रूप से ग्रामीण बिहार में यह निर्भरता और भी अधिक है, जहां 58.4 प्रतिशत महिलाओं ने प्रसव के लिए प्राथमिक, सामुदायिक और अनुमंडलीय सरकारी अस्पतालों का चयन किया है।
मुफ्त दवा, जांच, आहार, 102 एम्बुलेंस सेवा और जननी सुरक्षा योजना (JSY) के तहत मिलने वाले प्रत्यक्ष वित्तीय लाभ ने ग्रामीण गरीब परिवारों को निजी नर्सिंग होम के भारी खर्च या असुरक्षित घरेलू प्रसव के जोखिम से बचाकर संस्थागत व्यवस्था की ओर मोड़ा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के सुदृढ़ीकरण और 24 घंटे प्रसव सुविधाओं की बहाली ने सरकारी स्वास्थ्य ढांचे के प्रति आमजन का भरोसा बढ़ाया है।
Maternal Health Bihar: स्वास्थ्य सेवाओं की सतत निरंतरता और आगामी चुनौतियां
स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों की सबसे बड़ी खूबी ‘कंटीन्यूम ऑफ केयर’ यानी स्वास्थ्य सेवाओं की निर्बाध निरंतरता है। पहली तिमाही की जांच से लेकर संस्थागत प्रसव और फिर प्रसवोत्तर देखभाल तक के तीनों महत्वपूर्ण चरणों में एक साथ सुधार आना यह साबित करता है कि मातृ स्वास्थ्य प्रणाली अब टुकड़ों में काम करने के बजाय एक एकीकृत चक्र के रूप में सक्रिय हो चुकी है।
यद्यपि 81.1 प्रतिशत का स्तर एक बड़ी प्रशासनिक सफलता है, लेकिन राज्य में अब भी लगभग 19 प्रतिशत प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों से बाहर (असुरक्षित घरेलू परिस्थितियों में) हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग अब इन शेष 19 प्रतिशत वंचित और भौगोलिक रूप से दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों तक पहुंचने, प्राथमिक केंद्रों पर महिला चिकित्सकों व एनेस्थेटिस्ट्स की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने और संस्थागत प्रसव के आंकड़े को 90 प्रतिशत के पार ले जाने की नई रणनीति पर काम कर रहा है।
Read more here
Kawasaki Ninja 500 भारत में लॉन्च, ₹5.76 लाख कीमत और 190 kmph टॉप स्पीड