CEC ज्ञानेश कुमार पर भड़के Abhijeet Dipke, कहा- ‘देश के दुश्मन’, SIR रिपोर्ट के बाद मचा सियासी बवाल

CEC ज्ञानेश कुमार पर भड़के Abhijeet Dipke, कहा- 'देश के दुश्मन', SIR रिपोर्ट के बाद मचा सियासी बवाल

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Abhijeet Dipke: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर तीखा हमला बोलते हुए ज्ञानेश कुमार को सीधे तौर पर देश का दुश्मन करार दे दिया है। यह विवाद उस समय और गहरा गया जब एक न्यूज रिपोर्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होने का दावा किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक दो चुनाव आयुक्तों ने इस प्रक्रिया के दौरान कई बार औपचारिक रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर आगे के फैसले लागू कर दिए गए। इस खुलासे के बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने भी सीईसी पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। पूरा मामला अब राजनीतिक गलियारों में गरमाता जा रहा है, जिससे चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से मचा बवाल

पूरा विवाद इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान करीब दस महीनों में कुल चौदह बार औपचारिक रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन आपत्तियों के बावजूद कई अहम फैसले आगे बढ़ा दिए गए। इस खबर के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई, क्योंकि चुनाव आयोग के भीतर इस तरह के मतभेदों की जानकारी सार्वजनिक रूप से पहले कम ही सामने आई थी। रिपोर्ट के प्रकाशित होते ही विपक्षी दलों ने इसे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाला मुद्दा बताते हुए हमलावर रुख अपना लिया।

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर बोला हमला

कॉकरोच जनता पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि ज्ञानेश कुमार भारत के दुश्मन हैं और कथित तौर पर बारह करोड़ से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का आरोप लगाया। दीपके के अनुसार यह संख्या 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान पंजीकृत कुल सत्तानबे करोड़ मतदाताओं का करीब साढ़े बारह फीसदी बैठती है, जबकि भाजपा नीत एनडीए और विपक्ष के बीच मत प्रतिशत का अंतर महज दो फीसदी का ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीईसी चुनाव नहीं करवा रहे, बल्कि उसकी पहले से पटकथा तैयार कर रहे हैं। एक अन्य पोस्ट में दीपके ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी तीखी टिप्पणी करते हुए इसे विशेष रूप से गड़बड़ी वाली प्रक्रिया बताया।

आशुतोष रांका ने भी साधा निशाना

सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने भी इस विवाद में कूदते हुए ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि जब देश का इतिहास लिखा जाएगा, तो लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की सूची में ज्ञानेश कुमार का नाम काफी ऊपर दर्ज होगा। इसके बाद उन्होंने दीपके की पोस्ट को भी साझा करते हुए समर्थन जताया और कहा कि यह कहने में किसी को हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए कि ज्ञानेश कुमार देश के दुश्मन हैं। रांका की इस टिप्पणी के बाद पार्टी के भीतर सीईसी के खिलाफ रुख और स्पष्ट होता नजर आया, जिससे यह विवाद और तेज हो गया।

आम आदमी पार्टी ने की विपक्षी एकता की अपील

इंडिया गठबंधन से पहले ही अलग हो चुकी आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि सभी विपक्षी दलों को सबसे पहले निर्वाचन आयोग से जुड़े इस मुद्दे को प्राथमिकता के साथ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग को व्यवस्थित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए और बाकी राजनीतिक मुद्दे इसके बाद ही आने चाहिए। भारद्वाज की इस अपील को विपक्षी खेमे में चुनाव आयोग को लेकर बढ़ती नाराजगी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

विपक्षी दलों में बढ़ती नाराजगी के संकेत

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद से कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। पहले से ही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग पर निशाना साधता रहा है, और अब इस रिपोर्ट ने इस असंतोष को और हवा दे दी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि चुनाव आयोग के भीतर ही आपत्तियां दर्ज की गई थीं, तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए था। इस पूरे मामले ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जो आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

चुनाव आयोग की तरफ से अब तक नहीं आई प्रतिक्रिया

फिलहाल इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरफ से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्षी दलों और सीजेपी की तीखी टिप्पणियों के बीच सभी की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि आयोग इस मामले में क्या रुख अपनाता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब विपक्षी दल पहले से ही चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

चुनाव आयोग को लेकर उठा यह विवाद आने वाले दिनों में देश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका की तीखी टिप्पणियों के बाद विपक्षी दलों के बीच चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति और मजबूत होती दिख रही है। आम आदमी पार्टी की विपक्षी एकता की अपील यह संकेत देती है कि यह मुद्दा आगे चलकर व्यापक राजनीतिक गोलबंदी का कारण बन सकता है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है, इसलिए मामले की पूरी तस्वीर आने वाले समय में ही साफ हो पाएगी।

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