Mental Health Crisis: World Health Organization की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता: दुनिया का हर 8वां व्यक्ति मानसिक विकार से जूझ रहा
दुनियाभर में बढ़ते डिप्रेशन, एंग्जायटी और सुसाइड मामलों ने बढ़ाई चिंता
Mental Health Crisis: आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और अनिश्चितताओं ने मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर चुनौती बना दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताजा रिपोर्ट ने इस समस्या की भयावह तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में हर आठवां व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से जूझ रहा है। यानी पूरी दुनिया की आबादी में करीब 13 प्रतिशत लोग मेंटल हेल्थ समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में इस मुद्दे को प्रमुखता दी गई, जहां स्विट्जरलैंड के जिनेवा में वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि मेंटल हेल्थ संकट अब उपेक्षा किए जाने लायक नहीं रहा है। युवा पीढ़ी पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है और स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है Lights Max।
Mental Health Crisis: WHO रिपोर्ट में छिपे चौंकाने वाले आंकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान समय में दुनिया भर में एक अरब से ज्यादा लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से ग्रस्त हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है और सबसे चिंताजनक बात यह है कि युवाओं में यह समस्या तेजी से फैल रही है। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पुरुषों में आत्महत्या के मामले ज्यादा हैं, जबकि महिलाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन की समस्या प्रमुख रूप से देखी जा रही है।
वैश्विक स्तर पर सरकारें अपने कुल स्वास्थ्य बजट का महज दो प्रतिशत हिस्सा ही मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च करती हैं, जो बेहद कम है। मेंटल हेल्थ को अब भी कई देशों में गंभीर बीमारी के रूप में नहीं देखा जाता, जिसके कारण लाखों लोग बिना उचित इलाज के अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं।
मेंटल डिसऑर्डर क्या है और इसके प्रमुख प्रकार
मानसिक विकार वह स्थिति है जो व्यक्ति के सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को प्रभावित करती है। यह कोई कमजोरी नहीं बल्कि चिकित्सीय समस्या है जिसका उचित इलाज संभव है। डब्ल्यूएचओ (WHO) और डीएसएम-5 (DSM-5) के अनुसार प्रमुख मानसिक विकारों में डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर, एंग्जायटी डिसऑर्डर, सोशल फोबिया, पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), स्किजोफ्रेनिया और ईटिंग डिसऑर्डर शामिल हैं। इनमें एंग्जायटी और डिप्रेशन सबसे आम हैं जो लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।
क्षेत्रीय स्तर पर स्थिति कितनी गंभीर
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका क्षेत्र में मानसिक विकारों की दर सबसे ज्यादा 15.6 प्रतिशत है। यूरोप में यह 14.2 प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व एशिया में 13.2 प्रतिशत दर्ज की गई है। भारत समेत विकासशील देशों में भी यह समस्या बढ़ती जा रही है। कोविड-19 महामारी के बाद मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में भारी उछाल आया। लॉकडाउन, नौकरी छिनने, सामाजिक दूरी और आर्थिक तंगी ने एंग्जायटी और डिप्रेशन को बढ़ावा दिया। इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन की रिपोर्ट भी यही इशारा करती है कि डिप्रेशन और एंग्जायटी अब विकलांगता के प्रमुख कारण बन चुके हैं।
आत्महत्या के बढ़ते मामले: हर 43 सेकंड में एक मौत
मेंटल हेल्थ संकट का सबसे दर्दनाक पहलू आत्महत्या के मामले हैं। मेडिकल जर्नल द लैंसेट के अनुसार हर साल करीब 7.4 लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं। इसका मतलब है कि दुनिया में हर 43 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान दे रहा है। 15 से 29 वर्ष के युवाओं में आत्महत्या मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। पुरुषों में नशे की लत और आक्रामक व्यवहार जबकि महिलाओं में डिप्रेशन और एंग्जायटी ज्यादा देखी जाती है। पुर्तगाल में एंग्जायटी और सीरिया में डिप्रेशन के मामले सबसे ज्यादा हैं। भारत में भी हर साल लाखों लोग आत्महत्या करते हैं, जिसमें युवा और छात्रों की संख्या चिंताजनक है।
युवाओं पर क्यों पड़ रहा सबसे ज्यादा असर?
आज की युवा पीढ़ी प्रतिस्पर्धा, सोशल मीडिया, करियर प्रेशर और रिश्तों की अनिश्चितता से कूटनीतिक रूप से जूझ रही है। इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर परफेक्ट लाइफ देखकर तुलना की भावना बढ़ रही है, जो डिप्रेशन को जन्म दे रही है। शिक्षा और नौकरी के चक्कर में युवा अपनी वास्तविक भावनाओं को दबा रहे हैं, जिसका असर लंबे समय में उनकी मानसिक सेहत पर पड़ रहा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार युवाओं में मानसिक विकारों की संख्या पहले से दोगुनी हो चुकी है।
बचाव और समाधान के कूटनीतिक उपाय
मानसिक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। इसके तहत सबसे पहले एक हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें, नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें और तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रखने से मानसिक स्वास्थ्य भी मजबूत होता है। जब भी उदासी, चिंता या अकेलापन महसूस हो तो इसे मन में दबाकर न रखें। परिवार के सदस्यों, दोस्तों या भरोसेमंद लोगों से अपनी भावनाएं साझा करें क्योंकि बात करने से आधा बोझ कम हो जाता है।
अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें जैसे लगातार उदासी, नींद न आना, भूख न लगना या आत्महत्या के विचार आना, तो तुरंत मनोचिकित्सक या काउंसलर से संपर्क करें। समय पर इलाज से ज्यादातर समस्याओं का कूटनीतिक समाधान संभव है। इसके साथ ही सरकारों को स्वास्थ्य बजट में मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज्यादा आवंटन करना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में मेंटल हेल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम चलाए जाएं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी अपनी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
भारत में मेंटल हेल्थ की वर्तमान स्थिति
भारत में करीब 15 करोड़ लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। शहरों में यह समस्या ज्यादा है लेकिन गांवों में भी बढ़ रही है। टेली-मानस जैसे सरकारी कार्यक्रम मददगार साबित हो रहे हैं, लेकिन जागरूकता की अभी भी कमी है। कई राज्य सरकारें मेंटल हेल्थ सेंटर खोल रही हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच अभी सीमित है। युवाओं में बढ़ती सुसाइड दर को रोकने के लिए काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है।
Mental Health Crisis: मेंटल हेल्थ को लेकर बदल रही सोच
पहले मानसिक बीमारी को कमजोरी समझा जाता था, लेकिन अब लोग इसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या मानने लगे हैं। सेलिब्रिटी और प्रभावशाली लोग अपनी कहानियां शेयर कर रहे हैं, जिससे जागरूकता बढ़ रही है। मेंटल हेल्थ को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व दिया जाना चाहिए। छोटी-छोटी आदतों से हम खुद को और अपने आसपास वालों को कूटनीतिक रूप से सुरक्षित रख सकते हैं।
निष्कर्ष
डब्ल्यूएचओ (WHO) की यह रिपोर्ट एक बड़ी चेतावनी है कि मेंटल हेल्थ संकट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हर व्यक्ति को अपनी और अपनों की मानसिक सेहत का ध्यान रखना चाहिए। छोटे बदलाव जैसे नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और खुलकर बात करना बड़े फर्क ला सकते हैं। अगर आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति मानसिक तनाव से गुजर रहा है तो मदद लेने में देरी न करें। याद रखें, मदद मांगना कमजोरी नहीं बल्कि समझदारी है। स्वस्थ समाज तभी संभव है जब हर व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ हो। आइए मिलकर इस संकट से लड़ें और एक बेहतर, खुशहाल भविष्य का निर्माण करें।
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