UP Health Services: यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प, सीएम योगी का बड़ा निर्देश – ‘आयुष्मान योजना के क्लेम का भुगतान समय पर हो, मरीजों को न हो परेशानी’
UP Health Services: आयुष्मान क्लेम पर सीएम योगी सख्त
UP Health Services: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाया है। आज यानी 26 मई 2026 को लखनऊ में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभागों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि ‘आयुष्मान भारत योजना’ (Ayushman Yojana) के तहत अस्पतालों के क्लेम दावों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर किया जाए। सीएम योगी ने साफ तौर पर कहा कि आयुष्मान योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों का सबसे बड़ा सहारा है और यदि अस्पतालों को समय पर भुगतान होता रहेगा, तो मरीजों को बिना किसी बाधा के बेहतर इलाज और आधुनिक सुविधाएं मिलती रहेंगी। इस बैठक में चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्य में तेजी लाने जैसे कई बड़े नीतिगत फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर उत्तर प्रदेश की आम जनता की सेहत और चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सरकारी अस्पतालों में इलाज, पैथोलॉजी जांच, दवाइयों और इमरजेंसी सेवाओं की गुणवत्ता लगातार सुधरनी चाहिए ताकि आम आदमी को इसका सीधा लाभ दिखे। आइए जानते हैं यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर हुई इस महा-बैठक की सभी मुख्य बातें, आंकड़े और आने वाले समय में होने वाले बड़े बदलावों की पूरी रिपोर्ट।
UP Health Services: पिछले 10 वर्षों में सीटों में भारी बढ़ोतरी, मेडिकल कॉलेजों की संख्या हुई 83
समीक्षा बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को लेकर बेहद सकारात्मक आंकड़े सामने आए हैं। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वर्ष 2016-17 की तुलना में सत्र 2025-26 तक प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर सीधे 83 हो गई है, जो कि कुल 88.6 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि को दर्शाता है।
इसके अलावा, राज्य में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए मेडिकल सीटों में भी बड़ा इजाफा किया गया है। पिछले 10 वर्षों में उत्तर प्रदेश के भीतर पोस्ट ग्रेजुएट (PG) सीटों की संख्या 1344 से बढ़ाकर 5067 कर दी गई है। वहीं, एमबीबीएस (MBBS) की सीटें भी 5390 से बढ़कर अब 12800 तक पहुंच चुकी हैं, जबकि सुपर स्पेशियलिटी सीटों में लगभग 165 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
‘मिशन निरामया’ से मजबूत हुआ नर्सिंग नेटवर्क, 3.95 लाख स्टाफ तैयार
राज्य में डॉक्टरों के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 652 नर्सिंग संस्थान सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। ANM, GNM और BSc Nursing जैसे पाठ्यक्रमों की सीटों में बड़े पैमाने पर वृद्धि की गई है, जिसके चलते आज राज्य में लगभग 3.95 लाख पंजीकृत नर्सिंग स्टाफ सेवा के लिए उपलब्ध हैं।
नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए चलाए गए ‘मिशन निरामया 1.0’ की प्रगति की भी सराहना की गई। इस मिशन के तहत प्रदेश के 17 हजार स्कूलों में काउंसलिंग सेशन आयोजित किए गए, जिससे 3.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को करियर गाइडेंस मिला। इसके साथ ही, नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े 10,570 संकाय सदस्यों (Faculty Members) को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के अनुसार प्रशिक्षित किया गया है।
कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल होंगी आयुष पद्धतियां, मरीजों को मिलेगा विकल्प
सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना’ का दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया है। अब इस योजना के अंतर्गत पारंपरिक और आयुष चिकित्सा पद्धतियों को भी शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एलोपैथी के साथ-साथ अब आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियों की आईपीडी (IPD – इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट) सेवाओं को भी इस कैशलेस योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि मरीजों को अपनी पसंद की पद्धति से इलाज कराने की पूरी आजादी मिल सके।
इसके अतिरिक्त, सीएम योगी ने नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत कोविड कालखंड में अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं देने वाले संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को प्राथमिकता के आधार पर समायोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आशा वर्करों (ASHA Workers) का मानदेय या किसी भी प्रकार का भुगतान किसी भी स्थिति में पेंडिंग नहीं रहना चाहिए।
अस्पतालों के लिए सख्त नियम: 3 महीने से कम एक्सपायरी वाली दवाएं तुरंत हटेंगी
अस्पतालों में मिलने वाली दवाइयों की क्वालिटी को लेकर मुख्यमंत्री ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के स्टोर में ऐसी कोई भी दवा नहीं होनी चाहिए जिसकी एक्सपायरी अवधि 3 महीने से कम बची हो। ऐसी दवाओं को समय रहते हटाकर उनकी जगह नई और लंबी एक्सपायरी वाली दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं।
बैठक में यह भी बताया गया कि यूपी के सभी 75 जिलों में मुफ्त डायलिसिस सेवा और 74 जिलों में सीटी स्कैन (CT Scan) की आधुनिक सुविधा चालू है। मार्च 2026 तक राज्य में 35.69 लाख से अधिक डायलिसिस सत्र और 45.35 लाख से अधिक सीटी स्कैन पूरी तरह निशुल्क या रियायती दरों पर किए जा चुके हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए 227 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) पर टेली-रेडियोलॉजी सेवा चलाई जा रही है।
UP Health Services: 15 करोड़ से ज्यादा लोगों की बनी ‘आभा आईडी’, डिजिटल हुआ हेल्थ रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश अब ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ को लागू करने में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। बैठक में तकनीकी प्रगति का ब्योरा देते हुए बताया गया कि प्रदेश में अब तक 15.28 करोड़ से अधिक नागरिकों की डिजिटल ‘आभा आईडी’ (ABHA ID) बनाई जा चुकी है।
इस डिजिटल पहल के माध्यम से 15.14 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड्स को लिंक किया जा चुका है। इसकी मदद से मरीजों को अपने पुराने पर्चे और मेडिकल रिपोर्ट साथ लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी। अस्पतालों में बेहतर प्रबंधन के लिए हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम (HIS) और लैब इंफॉर्मेशन सिस्टम (LIS) का दायरा भी जिला स्तर पर तेजी से विस्तृत किया जा रहा है।
UP Health Services: चिकित्सा अनुसंधान में 1500 करोड़ का निवेश, एम्बुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम होगा और कम
यूपी को मेडिकल रिसर्च का हब बनाने के लिए ‘UP-IMRAS’ डिजिटल पहल, मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट और क्लिनिकल ट्रायल यूनिट्स पर तेजी से काम चल रहा है। चिकित्सा अनुसंधान और मेडटेक (MedTech) के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को लगभग 1500 करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव (Intents) भी प्राप्त हो चुके हैं, जिससे राज्य में उन्नत चिकित्सा उपकरणों का निर्माण स्थानीय स्तर पर हो सकेगा।
आपातकालीन सेवाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने 108 एम्बुलेंस और एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम को और ज्यादा कम करने के निर्देश दिए। वर्तमान में राज्य में 375 एएलएस एम्बुलेंस चल रही हैं। सीएम ने कहा कि आपात स्थिति में हर एक मिनट कीमती होता है, इसलिए तकनीकी ट्रैकिंग को मजबूत किया जाए और एम्बुलेंस ऑपरेटरों का भुगतान भी समय से किया जाए।
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