Supersonic flights return: क्या फिर लौटेगा सुपरसोनिक उड़ानों का दौर? जानें, 53 साल पहले लगे बैन को क्यों हटा रहा अमेरिका
अमेरिका 53 साल बाद हटा रहा सुपरसोनिक बैन, नई तकनीक से कम शोर, कॉनकॉर्ड जैसी उड़ानें वापस
Supersonic flights return: दुनिया में हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बहुत ही रोमांचक और बड़ी खबर सामने आ रही है। आने वाले समय में हवा की रफ्तार से भी तेज़ उड़ने वाले विमानों यानी सुपरसोनिक उड़ानों का दौर एक बार फिर वापस लौट सकता है। अमेरिकी सरकार अपने देश में पिछले 53 सालों से इन सुपरसोनिक विमानों पर लगे पुराने प्रतिबंध (बैन) को पूरी तरह से हटाने की बड़ी तैयारी कर रही है। साल 1970 के दशक में इन विमानों के उड़ने से पैदा होने वाली बेहद भयंकर आवाज़ के कारण अमेरिका ने इस पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब विज्ञान और आधुनिक तकनीक की बदौलत इस बैन को हटाने का रास्ता पूरी तरह साफ़ हो गया है। नए ज़माने के सुपरसोनिक विमानों को इस तरह डिज़ाइन किया जा रहा है कि वे आसमान में उड़ते समय बहुत ही कम आवाज़ करेंगे, जिससे आम जनता और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा।
अमेरिकी प्रशासन के इस नए और ऐतिहासिक फैसले से दुनिया भर की बड़ी एयरलाइंस कंपनियों और यात्रियों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है। कॉनकॉर्ड (Concorde) जैसे मशहूर और जादुई विमान एक बार फिर नए रूप में आसमान की ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार हो रहे हैं। आइए इस न्यूज़ रिपोर्ट में बिल्कुल आसान शब्दों में समझते हैं कि अमेरिका इस 53 साल पुराने कड़े कानून को क्यों बदल रहा है, इसके पीछे कौन सी नई तकनीक काम कर रही है और इससे हमारे भारत के हवाई सफर पर क्या असर पड़ सकता है।
Supersonic flights return: क्या है 53 साल पुराना अमेरिकी प्रतिबंध और क्यों लगी थी सुपरसोनिक उड़ानों पर रोक
अमेरिकी सरकार और वहां के नागरिक उड्डयन विभाग (FAA) ने साल 1973 में एक कड़ा कानून बनाकर अपने देश की धरती के ऊपर किसी भी नागरिक विमान की सुपरसोनिक उड़ान पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। सुपरसोनिक का मतलब होता है ध्वनि यानी आवाज़ की गति से भी तेज़ रफ्तार से उड़ना। जब कोई हवाई जहाज इस जादुई रफ्तार को पार करता है, तो आसमान में एक बहुत ही भयंकर धमाके जैसी आवाज़ पैदा होती है, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘सोनिक बूम’ (Sonic Boom) कहा जाता है।
यह धमाका इतना तेज़ होता था कि जमीन पर बने घरों की खिड़कियों के कांच टूट जाते थे और इंसानों व पशु-पक्षियों के कानों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता था। इसी भारी शोर और प्रदूषण को देखते हुए अमेरिका ने अपने आसमान में इन विमानों के उड़ने पर हमेशा के लिए ताला लगा दिया था। लेकिन अब अमेरिकी प्रशासन के नए निर्देशों के बाद इस कड़े कानून में ढील देने और नए नियम बनाने की प्रक्रिया बहुत तेज़ी से शुरू हो चुकी है, जिससे न्यूयॉर्क से लॉस एंजिल्स जैसे बेहद लंबे सफर की हवाई यात्रा का समय घटकर मात्र 3 घंटे रह जाएगा।
कॉनकॉर्ड विमान का सुनहरा इतिहास और सवा दो घंटे में पूरी होने वाली वो रोमांचक उड़ानें
अगर इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें, तो सुपरसोनिक उड़ानों का असली दौर साल 1976 से लेकर 2003 के बीच देखा गया था। उस समय ब्रिटेन और फ्रांस की कंपनियों ने मिलकर ‘कॉनकॉर्ड’ नाम का एक बेहद आलीशान और अनोखा यात्री विमान बनाया था। यह विमान ध्वनि की गति से भी दोगुनी रफ्तार से उड़ता था और लंदन से न्यूयॉर्क की हज़ारों किलोमीटर की दूरी को मात्र सवा तीन घंटे में पूरी कर लेता था, जबकि आम विमानों को इस सफर में 7 से 8 घंटे का समय लगता है।
लेकिन साल 2000 में हुए एक भीषण कॉनकॉर्ड विमान हादसे और इसके भारी-भरकम रखरखाव के खर्च के कारण साल 2003 में इस ऐतिहासिक सेवा को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था। अब लगभग दो दशकों के लंबे इंतज़ार के बाद नई पीढ़ी के विमान इस सुनहरे और सुपर-फास्ट दौर को एक नए अवतार में वापस लाने के लिए पूरी तरह तैयार खड़े हैं।
नासा (NASA) की नई तकनीक और ‘सोनिक बूम’ के भारी शोर को काबू करने का बड़ा चैलेंज
सुपरसोनिक उड़ानों को दोबारा शुरू करने के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट वही पुराना सोनिक बूम यानी तेज़ धमाके की आवाज़ थी। इस बड़ी समस्या को हल करने के लिए अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और ‘बूम सुपरसोनिक’ जैसी दुनिया की बड़ी प्राइवेट टेक कंपनियां पिछले कई सालों से रात-दिन कड़े रिसर्च में जुटी हुई थीं। वैज्ञानिकों ने अब विमानों के आकार को आगे से बहुत नुकीला और लंबा बनाकर एक ऐसी नई तकनीक विकसित कर ली है, जिससे यह तेज़ धमाका घटकर महज़ एक हल्की सी थपथपाहट की आवाज़ में बदल जाता है।
ये नए आधुनिक विमान ज़मीन से करीब 60,000 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर उड़ान भरेंगे, जिसके कारण उनकी बची-कुची आवाज़ भी ज़मीन तक पहुँचते-पहुँचते पूरी तरह गायब हो जाएगी। अमेरिकी उड्डयन विभाग ने इसके शोर की एक कड़क सीमा तय की है, जिसके भीतर आने वाले विमानों को ही अमेरिका के आसमान में उड़ने की सरकारी मंज़ूरी दी जाएगी।
पर्यावरण की सुरक्षा, सस्टेनेबल फ्यूल और भारत के एविएशन सेक्टर पर इसका असर
पुराने समय में इन विमानों का विरोध इस बात पर भी होता था कि ये बहुत ज़्यादा धुआं छोड़ते हैं और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाते हैं। लेकिन इस बार कंपनियों ने पर्यावरण की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा है। ये नए सुपरसोनिक विमान पूरी तरह से ‘सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल’ (SAF) यानी पर्यावरण के अनुकूल बनाए गए विशेष ईंधन पर चलेंगे, जिससे कार्बन का उत्सर्जन 80 प्रतिशत तक कम हो जाएगा और हमारे वायुमंडल को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा।
अगर भारत के नज़रिए से बात करें, तो अमेरिका के इस बड़े फैसले का असर आने वाले समय में भारतीय आसमान पर भी साफ़ तौर पर देखने को मिलेगा। बोइंग और एयरबस जैसी बड़ी विमान निर्माता कंपनियां भारतीय एयरलाइंस के साथ मिलकर इस नई तकनीक पर काम करने की योजना बना रही हैं। जब ये विमान पूरी तरह चालू हो जाएंगे, तो दिल्ली या मुंबई से न्यूयॉर्क और लंदन जैसी लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का समय लगभग आधा हो जाएगा, जिससे भारतीय व्यापारियों, पर्यटकों और आम यात्रियों का कीमती समय बचेगा और देश के एविएशन सेक्टर को एक बहुत बड़ी वैश्विक पहचान मिलेगी।
निष्कर्ष: तेज़ हवाई यात्रा का नया सवेरा, अद्भुत विज्ञान और बदलती हुई दुनिया का सपना
इस प्रकार 53 साल पुराने कड़े प्रतिबंध को हटाकर (Supersonic flights return) अमेरिका ने पूरी दुनिया के सामने तेज़ हवाई यात्रा के एक नए और आधुनिक युग की शुरुआत कर दी है। यह साफ़ दिखाता है कि विज्ञान और सही तकनीक की मदद से इंसानों के सामने आने वाली बड़ी से बड़ी समस्याओं का भी एक सुंदर और सुरक्षित हल निकाला जा सकता है। भारी शोर की समस्या को दूर करके बनाए जा रहे ये नए विमान आने वाले समय में हवाई सफर की पूरी परिभाषा को हमेशा के लिए बदल कर रख देंगे।
एक जागरूक पाठक और नागरिक के रूप में हमें यह समझना होगा कि दुनिया बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रही है। विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल 2026 के अंत तक या अगले साल की शुरुआत तक ये सुपरसोनिक विमान अपनी पहली व्यावसायिक उड़ानें शुरू कर सकते हैं। जब ये विमान आसमान में दौड़ेंगे, तो हज़ारों किलोमीटर दूर बैठे दो देशों के बीच की दूरियां बिल्कुल खत्म हो जाएंगी, जिससे वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था को एक नई ताकत मिलेगी और इंसानों का हवा से भी तेज़ उड़ने का पुराना सपना एक बार फिर पूरी सुरक्षा के साथ सच हो सकेगा।
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