Yoga for Seniors: बढ़ती उम्र में क्यों बढ़ जाता है गिरने का खतरा? जानिए इसके वैज्ञानिक कारण और बैलेंस, ताकत व आत्मविश्वास बढ़ाने वाले 4 असरदार योगासन
ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन और सेतुबंधासन से संतुलन व मांसपेशियां होंगी मजबूत।
Yoga for Seniors: आज के इस आधुनिक, भागदौड़ भरे और अत्यधिक व्यस्त डिजिटल युग में जहां हर इंसान अपनी आजीविका कमाने में रात-दिन कड़ा परिश्रम कर रहा है, वहीं हमारे घरों में रहने वाले पूजनीय बुजुर्गों और 60 साल की उम्र पार कर चुके वरिष्ठ नागरिकों के शारीरिक स्वास्थ्य पर एक बहुत ही गंभीर, कड़ा और मौन संकट लगातार पैर पसार रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और देश के शीर्ष चिकित्सा डॉक्टरों द्वारा जारी किए गए ताज़ा मेडिकल आंकड़ों के अनुसार, बढ़ती उम्र के साथ अचानक पैर फिसलने, चक्कर आने या संतुलन बिगड़ने के कारण ‘गिरने का खतरा’ (रिस्क ऑफ फॉल्स) बहुत ही भयानक रूप से ऊपर भाग जाता है। बुढ़ापे में एक बार गिरना महज़ एक छोटी सी चोट नहीं होती, बल्कि यह रीढ़ की हड्डी टूटने, कूल्हे के फ्रैक्चर (हिप इंजरी) और गंभीर रूप से बिस्तर पर आ जाने का एक बहुत बड़ा व सीधा सुरक्षा खतरा पैदा कर देता है। इस कड़े संकट से हमारे बुजुर्गों को हमेशा के लिए पूरी तरह सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब योग विज्ञान के डॉक्टरों और कूटनीतिज्ञों ने कुछ बेहद सरल, कड़े और अचूक योगासनों की एक साफ़ सूची जारी की है।
उम्र बढ़ने के साथ-साथ मानव शरीर के भीतर कई प्रकार के जैविक और संरचनात्मक बदलाव बहुत ही साफ़ तरीके से होने लगते हैं जो हमारे मस्तिष्क और पैरों के बीच के लाइव तालमेल को पूरी तरह कमज़ोर कर देते हैं। इस सुहावने लेकिन उमस भरे और गीले मानसूनी मौसम में जब फर्श पर फिसलन बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है, तब बुजुर्गों की शारीरिक स्थिरता और न्यूरोलॉजिकल संतुलन को बनाए रखना उनके लंबे व स्वस्थ जीवन के लिए सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण और ज़रूरी हो जाता है। योग का नियमित और अनुशासित अभ्यास न केवल उनकी मांसपेशियों की ताकत को लोहे जैसा मजबूत बनाता है, बल्कि उनके भीतर एक नया और जादुई आत्मविश्वास भी पैदा करता है जो बुढ़ापे के कड़े मानसिक तनाव को पूरी तरह से डिलीट (खत्म) कर देता है। आइए इस हेल्थ और योग स्पेशल न्यूज़ रिपोर्ट में बिल्कुल आसान और सीधी हिंदी भाषा में समझते हैं कि बढ़ती उम्र में गिरने के पीछे का असली वैज्ञानिक कारण क्या है और घर पर सुरक्षित तरीके से किए जाने वाले 4 सबसे बड़े व पावन आसनों का पूरा इनसाइड गणित क्या है।
मांसपेशियों के क्षरण (सार्कोपेनिया) का कड़ा सच और हड्डियों के खोखले होने का वैज्ञानिक चक्रव्यूह
अगर बहुत ही आसान और सीधे शब्दों में समझा जाए कि आखिर 60 की उम्र पार करते ही हमारे दादा-दादी या माता-पिता के पैर अचानक क्यों डगमगाने लगते हैं, तो आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इसका सबसे मुख्य कारण ‘सार्कोपेनिया’ (Sarcopenia) है। सार्कोपेनिया असल में उम्र के साथ मांसपेशियों के घनत्व और उनकी ताकत में होने वाली एक कड़क और प्राकृतिक गिरावट को कहा जाता है। इसके कारण हमारे पैरों, घुटनों और जांघों की मांसपेशियां इतनी कमज़ोर हो जाती हैं कि वे पूरे शरीर का वजन संभालने में पूरी तरह सुस्त पड़ने लगती हैं।
इसके साथ ही, बुढ़ापे में हड्डियों के भीतर कैल्शियम की कमी होने से वे बहुत ही भंगुर और खोखली हो जाती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में ‘ऑस्टियोपोरोसिस’ कहा जाता है। शरीर का आंतरिक संतुलन बनाए रखने वाला हमारे कान का जो मुख्य हिस्सा (वेस्टिबुलर सिस्टम) होता है, उसकी कोडिंग भी उम्र के साथ थोड़ी कमज़ोर हो जाती है जिससे अचानक उठने या मुड़ने पर बुजुर्गों को कड़ा चक्कर आ जाता है और वे फर्श पर सीधे गिर पड़ते हैं। यह मंदी और शारीरिक गिरावट उनके मन के भीतर एक बहुत बड़ा मानसिक तनाव और हर समय गिरने का एक अजीब सा लाइव डर पैदा कर देती है, जिससे वे घर से बाहर निकलने या टहलने जाने से भी पूरी तरह कतराने लगते हैं और उनकी आजीविका की गुणवत्ता पूरी तरह ठप हो जाती है।
1. ताड़ासन से शरीर का कड़ा संरेखण और 2. वृक्षासन से एकाग्रता व संतुलन बढ़ाने का जादुई गणित
ताड़ासन की मजबूत बुनियादी नींव: वास्तु और योग विज्ञान के कड़े नियमों के अनुसार, ताड़ासन (माउंटेन पोज) हमारे पूरे कंकाल तंत्र को एक सही, साफ़ और सीधा संरेखण (अलाइनमेंट) प्रदान करने का सबसे सुंदर और बुनियादी आसन है। इसे करने के लिए बुजुर्गों को बिल्कुल सीधे खड़े होकर अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ पूरी तरह खींचना होता है। यह आसन उनकी रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखता है, पैरों के पंजों की ग्रिप को फर्श पर मजबूत बनाता है और शरीर के पूरे वजन को दोनों पैरों पर समान रूप से बांटने का कड़ा काम बहुत ही साफ़ तरीके से करता है।
वृक्षासन से संतुलन का महा-योग: हमारा दूसरा और सबसे मुख्य संतुलनकारी आसन ‘वृक्षासन’ (ट्री पोज) माना गया है। इस आसन में एक पैर पर सीधे खड़े होकर दूसरे पैर के पंजे को जांघ पर कड़ाई से टिकाना होता है। वृक्षासन बुजुर्गों के तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मस्तिष्क के बीच एक बहुत ही सुंदर व पारदर्शी कोडिंग स्थापित करता है जिससे उनके शरीर की न्यूरो-मस्कुलर कोआर्डिनेशन (दिमाग और पैर का तालमेल) चार गुना ज़्यादा बढ़ जाती है। यदि शुरुआत में बुजुर्गों को एक पैर पर खड़े होने में रत्ती भर भी कोई परेशानी या गिरने का जोखिम महसूस हो, तो वे किसी मजबूत दीवार, लोहे की कुर्सी या अपने किसी प्रियजन का साफ़ सहारा लेकर इस आसन का कड़ा अभ्यास बहुत ही सुरक्षित तरीके से कर सकते हैं।
3. भुजंगासन से पीठ की रीढ़ को लोहे जैसी ताकत और 4. सेतुबंधासन से कूल्हों का अभेद्य सुरक्षा चक्र
भुजंगासन की कड़क तांत्रिक मार: हमारा तीसरा मुख्य आसन ‘भुजंगासन’ (कोबरा पोज) है जो पेट के बल लेटकर बहुत ही साफ़ मन से किया जाता है। बढ़ती उम्र में बुजुर्गों की पीठ और कमर की मांसपेशियां आगे की तरफ झुकने लगती हैं जिससे उनका गुरुत्वाकर्षण केंद्र (सेंटर ऑफ ग्रेविटी) बिगड़ जाता है। भुजंगासन उनकी रीढ़ की हड्डी को पीछे की तरफ झुकाकर उसकी लचीलेपन को बहुत तेज़ी से ऊपर बढ़ाता है और पीठ के निचले हिस्से की नसों को पूरी तरह से हील (Detox) कर देता है, जिससे उनके चलने-फिरने की रफ़्तार बहुत ही कड़क, सुरक्षित और शानदार बन जाती है।
सेतुबंधासन का मजबूत पुल: हमारी चौथी सबसे जादुई और अनिवार्य आदत ‘सेतुबंधासन’ (ब्रिज पोज) के अभ्यास से जुड़ी हुई है। पीठ के बल लेटकर अपने कूल्हों और कमर को ऊपर उठाना एक बहुत ही मजबूत पुल (ब्रीज) का निर्माण करता है। यह आसन बुजुर्गों के पेल्विक एरिया (कूल्हे के जोड़) और घुटनों की कड़क लिगामेंट्स को एक अभेद्य सुरक्षा चक्र प्रदान करता है। बुढ़ापे में होने वाले हिप फ्रैक्चर के भयानक खतरे को पूरी तरह से डिलीट करने में सेतुबंधासन एक बहुत ही बड़ी और कूटनीतिक भूमिका निभाता है, जिससे बुजुर्गों की पूरी चाल बिल्कुल स्थिर, आत्मनिर्भर और लोहे की तरह मजबूत साफ़ तौर पर बनी रहती है।
Yoga for Seniors: बुजुर्गों के लिए योग अभ्यास के 5 कड़े सरकारी सेफ्टी गाइडलाइंस और मानसून में स्वस्थ रहने के डॉक्टर टिप्स
देश के शीर्ष योग डॉक्टरों और स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of AYUSH) ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर पर योग करते समय किसी भी कड़े नुकसान या मोच से पूरी तरह महफ़ूज़ रहने के लिए कुछ बेहद कड़े और अनिवार्य सेफ्टी रूल्स (सुरक्षा नियम) जारी किए हैं:
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बिना सहारे के कड़ा स्टेप उठाने से बचें: शुरुआत के दिनों में कभी भी अकेले या बिना किसी सहारे के योग का अभ्यास बिल्कुल न करें, हमेशा अपने पास एक मजबूत कुर्सी या दीवार का सपोर्ट कड़ाई से तैयार रखें।
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झटके और जल्दबाज़ी को पूरी तरह करें डिलीट: योग करते समय अपने शरीर के साथ रत्ती भर भी कोई ज़बरदस्ती या कड़ा झटका देने की भूल बिल्कुल न करें, हर एक आसन को बहुत ही सुस्त, शांत और पारदर्शी रफ़्तार से करें।
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साफ एंटी-स्किड मैट का पक्का नियम: योग हमेशा चिकने फर्श या टाइल्स पर सीधे खड़े होकर न करें, हमेशा अच्छी ग्रिप वाली और कड़क एंटी-स्किड योग मैट (Anti-Skid Mat) का ही उपयोग पूरी मुस्तैदी से करें।
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खाली पेट सुबह का पावन समय है सबसे बेस्ट: योगासनों का अभ्यास हमेशा सुबह उठकर शौच आदि से निवृत्त होकर पूरी तरह खाली पेट ही करें, शाम को भोजन के तुरंत बाद योग करने की भूल रत्ती भर भी न करें।
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उबले पानी और संतुलित आहार का सुरक्षा कवच: जुलाई के इस सुहावने लेकिन उमस भरे गीले मौसम में बुजुर्गों के इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखने के लिए डॉक्टरों ने सख़्त सलाह दी है कि उन्हें पीने के लिए हमेशा उबले हुए साफ पानी का ही कड़ाई से उपयोग करना चाहिए और अपने दैनिक आहार में ताज़ी हरी सब्जियों व दालों का सात्विक सूप ज़रूर शामिल करना चाहिए।
निष्कर्ष: योग और कड़े संकल्प का अलौकिक महा-संगम, पूरी आस्था से संवारें अपने बुजुर्गों का उज्ज्वल कल
इस प्रकार बढ़ती उम्र में गिरने के खतरों से बचने और अपने शरीर (Yoga for Seniors) के बैलेंस व ताकत को चार गुना बढ़ाने के लिए इन 4 सरल व कड़े योगासनों का अभ्यास साफ़ दर्शाता है कि हमारी प्राचीन भारतीय योग संस्कृति के नियम आज के इस आधुनिक और डिजिटल युग में भी हमारे शरीर को निरोगी, समृद्ध और सुरक्षित बनाए रखने के लिए कितने कड़े, तार्किक और वैज्ञानिक रूप से मुस्तैदी से काम करते हैं। वृद्धावस्था कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह जीवन का एक बहुत ही सुंदर, साफ़ और पावन पड़ाव है जिसे यदि सही दिनचर्या, कड़े अनुशासन और योग की छांव में जिया जाए, तो इंसान 80 साल की उम्र में भी पूरी तरह से आत्मनिर्भर और खुशहाल बना रह सकता है।
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