Census 2027: अगर जनगणना में नहीं किया सहयोग तो जाना पड़ सकता है जेल, उत्तराखंड सरकार ने जारी की सख्त अधिसूचना

Census 2027: जनगणना में सहयोग न करने पर 3 साल की जेल; उत्तराखंड सरकार की सख्त अधिसूचना जारी!

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Census 2027: भारत में आगामी जनगणना 2027 की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। इसी कड़ी में उत्तराखंड में जनगणना के प्रथम चरण यानी ‘भवन गणना’ (Houselisting) का कार्य आधिकारिक रूप से प्रारंभ कर दिया गया है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को निर्बाध रूप से संपन्न करने के लिए शासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी एक ताजा अधिसूचना के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जनगणना कार्य में बाधा डालता है या पूछे गए सवालों का जवाब देने से इनकार करता है, तो उसे भारी जुर्माना और जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है। यह नियम केवल आम जनता पर ही नहीं, बल्कि जनगणना ड्यूटी में लगे उन कर्मचारियों पर भी लागू होगा जो अपने काम में लापरवाही बरतेंगे। शासन का मानना है कि सटीक आंकड़ों के बिना भविष्य की योजनाएं बनाना संभव नहीं है, इसलिए हर नागरिक का सहयोग अनिवार्य है।

Census 2027: जनगणना कार्य में लापरवाही पर तीन साल तक की कैद

उत्तराखंड शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जनगणना कोई वैकल्पिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक कानूनी जिम्मेदारी है। अधिसूचना के मुताबिक, यदि कोई भवन स्वामी जनगणना अधिकारी को घर में प्रवेश करने से रोकता है या पूछे गए 33 अनिवार्य प्रश्नों का उत्तर देने से मना करता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर व्यक्ति को तीन साल तक की कैद हो सकती है। इसके साथ ही एक हजार रुपये तक के आर्थिक दंड का भी प्रविधान किया गया है। यही नियम जनगणना कार्मिकों पर भी लागू होता है। यदि कोई कर्मचारी डेटा दर्ज करने में कोताही बरतता है या अपनी ड्यूटी से भागता है, तो उसके खिलाफ भी कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भवन गणना के तहत पूछे जाएंगे 33 महत्वपूर्ण प्रश्न

वर्तमान में चल रहे प्रथम चरण के दौरान जनगणना कार्मिक घर-घर जाकर भवन गणना का कार्य कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से 33 प्रश्नों पर आधारित जानकारी जुटाई जा रही है। इन प्रश्नों में घर की स्थिति, कमरों की संख्या, उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, शौचालय और घर में रहने वाले सदस्यों की सामान्य जानकारी शामिल है। शासन ने अपील की है कि लोग इन सवालों के सटीक और सही जवाब दें ताकि सरकार के पास विकास योजनाओं के लिए सही डेटा उपलब्ध हो सके। गलत जानकारी देना भी दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि सही डेटा के आधार पर ही आने वाले समय में राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं का खाका तैयार किया जाएगा।

नियमों में दी गई है कुछ खास रियायतें

सख्ती के बीच सरकार ने सामाजिक और पारंपरिक मान्यताओं का भी पूरा ख्याल रखा है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में लोगों को जानकारी साझा करने से छूट दी गई है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी क्षेत्र या परिवार में ऐसी परंपरा है जहां कोई व्यक्ति अपनी पत्नी का नाम सीधे तौर पर नहीं लेता है, तो उसे नाम बताने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार, कोई भी महिला अपने पति या दिवंगत पति का नाम बताने के लिए विवश नहीं होगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि जनगणना की प्रक्रिया समावेशी रहे और किसी की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। हालांकि, अन्य सभी तकनीकी और व्यक्तिगत जानकारियां देना अनिवार्य होगा।

जनगणना अधिकारी को परिसर में प्रवेश देना होगा जरूरी

अधिसूचना के एक और महत्वपूर्ण बिंदु के अनुसार, कोई भी भवन स्वामी जनगणना अधिकारी या कर्मचारी को अपने परिसर या अहाते में प्रवेश करने से नहीं रोक सकता। जनगणना के उद्देश्य से मकानों पर नंबर डालने या विशिष्ट चिह्न लगाने का कार्य भी किया जा रहा है। यदि कोई व्यक्ति इन चिह्नों को मिटाता है या कर्मचारी को नंबर डालने से मना करता है, तो उसे जनगणना कार्य में बाधा माना जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह नंबरिंग भविष्य में सरकारी लाभों और पते के सत्यापन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए नागरिकों को चाहिए कि वे कार्मिकों को उनके कर्तव्यों का पालन करने में पूरा सहयोग प्रदान करें।

उत्तर प्रदेश में भी जल्द शुरू होगी प्रक्रिया, SE ID का महत्व

उत्तराखंड के साथ-साथ पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी जनगणना 2027 की सुगबुगाहट तेज हो गई है। यूपी में भी जल्द ही इसी तरह की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। वहां के प्रशासन ने पहले ही सूचित किया है कि प्रत्येक परिवार को एक 11 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या (SE ID) दी जाएगी। इस आईडी को भविष्य के संदर्भों के लिए सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। उत्तराखंड और यूपी दोनों ही राज्यों में डिजिटल माध्यमों का अधिक प्रयोग किया जा रहा है ताकि डेटा में किसी भी तरह की हेरफेर की गुंजाइश न रहे।

सटीक डेटा से ही संभव है बेहतर भविष्य का निर्माण

जनगणना केवल सिर गिनने का काम नहीं है, बल्कि यह देश के संसाधनों के सही बंटवारे का आधार है। जब सरकार के पास यह जानकारी होती है कि किस क्षेत्र में कितने लोग रहते हैं और उनकी जरूरतें क्या हैं, तभी स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों का निर्माण सही ढंग से हो पाता है। शासन ने आमजन से अनुरोध किया है कि वे इसे केवल एक सरकारी प्रक्रिया न समझें, बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। किसी भी भ्रम की स्थिति में लोग स्थानीय प्रशासन या जनगणना हेल्पडेस्क से संपर्क कर सकते हैं। 2027 की यह जनगणना भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें डिजिटल टूल्स का व्यापक उपयोग हो रहा है, जिससे भविष्य में कागजी कार्रवाई और भी कम हो जाएगी।

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