Vivek Vihar Fire Update: 9 मौतों के बाद अब बिल्डर पर भी गिरेगी गाज, दिल्ली पुलिस ने एमसीडी से खंगाली इमारत की कुंडली

Vivek Vihar Fire Update: 9 मौतों के बाद बिल्डर पर गिरेगी गाज; दिल्ली पुलिस ने MCD से मांगी कुंडली!

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Vivek Vihar Fire Update: देश की राजधानी दिल्ली के विवेक विहार इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर शहरी रिहायशी इलाकों में सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। इस हादसे में 9 बेगुनाह लोगों की दर्दनाक मौत के बाद दिल्ली पुलिस अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। मामले की गहराई से जांच कर रही पुलिस ने अब अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए इमारत के बिल्डर को भी निशाने पर ले लिया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इमारत के निर्माण के समय नियमों की अनदेखी की गई थी। इस संबंध में दिल्ली पुलिस ने नगर निगम (MCD) को एक पत्र लिखकर इमारत के निर्माण, नक्शे और बिल्डर से जुड़ी तमाम जानकारियां तलब की हैं। माना जा रहा है कि यदि निर्माण में लापरवाही के सबूत मिलते हैं, तो बिल्डर के खिलाफ सख्त आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।

Vivek Vihar Fire Update: जांच के घेरे में बिल्डर की भूमिका और निर्माण संबंधी नियम

विवेक विहार अग्निकांड मामले में अब तक की जांच मुख्य रूप से आग लगने के कारणों तक सीमित थी, लेकिन अब पुलिस भवन निर्माण की गुणवत्ता और कानूनी वैधता की भी पड़ताल कर रही है। पुलिस ने एमसीडी से पूछा है कि क्या इस चार मंजिला इमारत का निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार हुआ था? सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या इस रिहायशी इमारत के पास ‘कम्प्लीशन सर्टिफिकेट’ (CC) था? नियमों के मुताबिक, किसी भी इमारत में लोग रहने के लिए तभी जा सकते हैं जब नगर निगम उसे सुरक्षित और नियमों के अनुरूप पाकर सीसी जारी कर दे। यदि बिना सर्टिफिकेट के लोग वहां रह रहे थे, तो यह बिल्डर की बड़ी लापरवाही मानी जाएगी। पुलिस ने एमसीडी से बिल्डर का नाम, पता और उसके पिछले प्रोजेक्ट्स का विवरण भी मांगा है ताकि उसकी जवाबदेही तय की जा सके।

सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी और संकीर्ण निकास मार्ग

हादसे वाली जगह का मुआयना करने पर जांच एजेंसियों को कई चौंकाने वाली खामियां मिली हैं। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, इमारत में आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए पर्याप्त रास्ते नहीं थे। निकास मार्ग बहुत संकीर्ण थे, जिसके कारण जब तड़के आग लगी, तो लोगों को संभलने और बाहर भागने का मौका ही नहीं मिला। अग्निशमन विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इमारत में फायर सेफ्टी के बुनियादी इंतजाम होते और इमरजेंसी एग्जिट का रास्ता साफ होता, तो शायद इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान नहीं जाती। जांच टीम यह भी देख रही है कि क्या बिल्डर ने अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में सुरक्षा के लिए जरूरी खाली जगह को भी कमरों में बदल दिया था।

ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट के एंग्ल से भी जांच जारी

पुलिस और फोरेंसिक टीमें आग लगने की असली वजह को पुख्ता करने में जुटी हैं। प्राथमिक तौर पर इसे शॉर्ट सर्किट या एसी ब्लास्ट का मामला माना जा रहा है। हालांकि, जांच एजेंसियां बिजली के लोड की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस ने बिजली वितरण कंपनी बीएसईएस से यह जानकारी मांगी है कि उस बिल्डिंग के लिए कितना बिजली लोड स्वीकृत था और वास्तव में वहां कितना लोड इस्तेमाल किया जा रहा था। अक्सर देखा जाता है कि बिल्डर एक मीटर पर ही पूरी बिल्डिंग का लोड डाल देते हैं या स्वीकृत क्षमता से कहीं ज्यादा उपकरण चलाए जाते हैं। यदि बिल्डिंग ओवरलोड पाई गई, तो इसे भी बिल्डर और प्रबंधन की बड़ी लापरवाही के तौर पर देखा जाएगा।

Vivek Vihar Fire Update: दिल्ली सरकार और प्रशासन का सख्त रुख

इस भीषण अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार और स्थानीय प्रशासन भी काफी दबाव में हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री और पार्षद स्तर पर अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की है। सरकार ने अग्निशमन विभाग को मजबूत करने के लिए 25 साल के विजन के साथ एक नया रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है। इसके तहत नए फायर स्टेशन बनाए जाएंगे और आधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे। वहीं, एमसीडी को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन सभी इमारतों का सर्वे करें जहां रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं या जो बिना फायर एनओसी के संचालित हैं। विवेक विहार की यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक है कि नियमों की अनदेखी कितनी जानलेवा हो सकती है।

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