Qeshm Island Attack: US ने केशम द्वीप पर हमला किया, ईरान ने कुवैत-बहरीन पर दागी मिसाइलें, मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट
US ने ईरान के केशम द्वीप पर एयरस्ट्राइक किया, ईरान ने कुवैत-बहरीन पर दागी बैलिस्टिक मिसाइलें
Qeshm Island Attack: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप (Qeshm Island) पर हमला कर दिया है, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन की तरफ मिसाइलें दागी हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि ईरान द्वारा पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को उन्होंने सफलतापूर्वक विफल कर दिया है।
यह ताजा घटनाक्रम मध्य पूर्व (Middle East) में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका दे रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से चल रहा छद्म युद्ध (Proxy War) अब एक व्यापक क्षेत्रीय महायुद्ध की आहट दे रहा है। अमेरिका ने केशम द्वीप पर जिन ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, वहां एक रणनीतिक वाटर प्लांट भी मौजूद है।
अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के बयान के अनुसार, ईरान ने कुवैत पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से एक अपने लक्ष्य से पूरी तरह चूक गई या उसे हवा में ही नष्ट कर दिया गया। वहीं, बहरीन पर दागी गई तीन मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन की संयुक्त पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) ने इंटरसेप्ट करके आसमान में ही मार गिराया।
इसके तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी वायुसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास स्थित सामरिक रूप से महत्वपूर्ण केशम द्वीप पर ईरानी सेना के ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और वाटर प्लांट को निशाना बनाया। पेंटागन ने इसे ‘आत्मरक्षा’ में उठाया गया आवश्यक कदम बताया है। इसी बीच, ईरान की दो अर्धसरकारी समाचार एजेंसियों ने दावा किया है कि तेहरान ने मध्यस्थों के जरिए होने वाली सभी राजनयिक बातचीत बंद कर दी है, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दावे को खारिज किया है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि और 40 दिनों का तनाव
ईरान और अमेरिका-इजराइल गठबंधन के बीच तनाव फरवरी 2026 से लगातार हिंसक रूप लेता जा रहा है। इस संघर्ष की मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं:
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शुरुआती हमले: 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर सिलसिलेवार हवाई हमले शुरू किए थे।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी: जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए और लगभग 40 दिनों तक दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह बंद रखा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो गई थी।
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अस्थायी संघर्ष विराम: वैश्विक दबाव के बाद 8 मई 2026 को एक अस्थायी संघर्ष विराम (Ceasefire) का ऐलान हुआ था। हालांकि, इस्लामाबाद टॉक्स के जरिए स्थायी शांति की कोशिशें जारी थीं, लेकिन दोनों पक्षों के अड़ियल रुख के कारण बातचीत अब पूरी तरह बेपटरी होती दिख रही है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर संकट
कुवैत और बहरीन जैसे खाड़ी देश इस समय दो महाशक्तियों की सैन्य लड़ाई के बीच फंस गए हैं। मध्य पूर्व की यह अस्थिरता सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह तनाव पूर्ण रूप से युद्ध में तब्दील होता है, तो निम्नलिखित गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं:
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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा बंद होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे भारी तेल आयातक देशों के राजकोषीय घाटे पर पड़ेगा।
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शेयर बाजारों में गिरावट: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते निवेशक इक्विटी मार्केट से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे सोना और सरकारी बॉन्ड) की तरफ मोड़ रहे हैं।
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सहयोगी समूहों की सक्रियता: ईरान अपने क्षेत्रीय सहयोगी समूहों, जैसे लेबनान में हिजबुल्लाह और यमन में हूतियों के जरिए इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर मोर्चे खोल सकता है, जिससे यह जंग कई देशों में फैल जाएगी।
निष्कर्ष
अमेरिका द्वारा ईरान के केशम द्वीप पर की गई एयरस्ट्राइक और ईरान द्वारा कुवैत-बहरीन पर दागी गई मिसाइलों ने मध्य पूर्व को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से तुरंत युद्ध रोकने और संयम बरतने की अपील की है। भारत समेत दुनिया भर की निगाहें इस समय खाड़ी क्षेत्र के घटनाक्रमों पर टिकी हैं, क्योंकि यहां की अशांति पूरे वैश्विक व्यापार और शांति व्यवस्था को पटरी से उतारने की ताकत रखती है। फिलहाल, आने वाले कुछ दिनों में राजनयिक चैनलों की सक्रियता ही इस महायुद्ध को टालने का एकमात्र रास्ता नजर आ रही है।
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