UPSC-BPSC Exam: सलाखों के पीछे से सपनों की उड़ान, मुंगेर जेल में बंद कैदी कर रहे हैं सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी
UPSC-BPSC Exam: कोई पेशेवर आपराधिक इतिहास नहीं, छोटे विवादों में बंद विचाराधीन कैदी बनना चाहते हैं अफसर।
UPSC-BPSC Exam: बिहार के मुंगेर मंडल कारा (जेल) से बदलाव की एक ऐसी हैरान करने वाली और सकारात्मक तस्वीर सामने आई है, जिसने समाज की सोच को बदल कर रख दिया है। जेल अब सिर्फ सजा काटने का अंधियारा कोना नहीं, बल्कि कैदियों के लिए सुधार, शिक्षा और नए भविष्य के निर्माण का केंद्र बन गया है। मुंगेर जेल प्रशासन की एक अनोखी पहल के कारण यहां बंद विचाराधीन कैदी सलाखों के पीछे रहकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) जैसी देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। जून 2026 में सामने आई जेल प्रशासन की यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे सही मार्गदर्शन और किताबें मिलने पर कैदी अपने अतीत की गलतियों को भुलाकर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
UPSC-BPSC Exam: यूपीएससी से लेकर बैंकिंग तक, जेल में बन रहा है पढ़ाई का माहौल
मुंगेर जेल के भीतर इन दिनों आपको सुबह और शाम के वक्त आम कैदियों के गपशप की जगह किताबों के पन्नों के पलटने की आवाजें सुनाई देंगी। जेल प्रशासन के माध्यम से शुरू किए गए इस विशेष शैक्षणिक अभियान का जमीन पर बहुत बड़ा और साफ असर दिखाई देने लगा है।
वर्तमान में जेल के अंदर एक बंदी देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा यूपीएससी (UPSC) की तैयारी में जुटा है, जबकि तीन अन्य बंदी बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा पास कर अधिकारी बनने का सपना देख रहे हैं। इतना ही नहीं, जेल के भीतर अलग-अलग सरकारी नौकरियों के लिए बाकायदा एक स्टडी ग्रुप बन गया है, जहां कैदी मिलकर पढ़ाई करते हैं।
किस परीक्षा की तैयारी में कितने बंदी जुटे हैं:
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शिक्षक और पुलिस भर्ती: 3 अभ्यर्थी बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा और 4 बंदी बिहार पुलिस परीक्षा की तैयारी में लगे हैं।
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डिफेंस और एसएससी: 3 बंदी सेना/डिफेंस और 3 अन्य कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की पढ़ाई कर रहे हैं।
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बैंकिंग, आईटीआई और लॉ: 2 बंदी बैंकिंग, 2 तकनीकी शिक्षा (ITI) और 1 बंदी कानून (विधि) की पढ़ाई में व्यस्त है।
तैयारी करने वाले किसी भी बंदी का नहीं है आपराधिक इतिहास
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प और राहत देने वाली बात यह है कि जेल में रहकर इतनी लगन से तैयारी करने वाले इन बंदियों में से कोई भी पेशेवर अपराधी नहीं है। जेल प्रशासन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, परीक्षा की तैयारी कर रहे ये सभी कैदी फिलहाल ‘विचाराधीन’ (Under Trial) हैं यानी अदालत की तरफ से अभी इन्हें सजा नहीं सुनाई गई है।
इनमें से किसी भी व्यक्ति का कोई पुराना आपराधिक इतिहास (Criminal History) नहीं रहा है। ये सभी लोग किन्हीं परिस्थितियों वश छोटे-मोटे विवादों या मामलों के कारण जेल के अंदर बंद हैं और इनके मामलों का ट्रायल कोर्ट में चल रहा है। ये अभ्यर्थी पूरी तन्मयता के साथ पढ़ रहे हैं ताकि जब भी इन्हें कोर्ट से जमानत मिले या ये निर्दोष साबित होकर बाहर आएं, तो समाज में एक जिम्मेदार और सम्मानित नागरिक के रूप में सिर उठाकर जी सकें।
UPSC-BPSC Exam: रेगुलर क्लास और सीमित संसाधनों के बीच बढ़ रहा आत्मविश्वास
मुंगेर जेल के भीतर बंदियों में शिक्षा के प्रति रुचि जगाने के लिए बकायदा नियमित रूप से कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। जेल प्रशासन इन अभ्यर्थियों को जरूरी कोर्स बुक्स, मैजीन्स, करंट अफेयर्स और अन्य अध्ययन सामग्री के साथ-साथ समय-समय पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी उपलब्ध करा रहा है।
सीमित संसाधनों और तमाम पाबंदियों के बावजूद कैदियों का यह उत्साह देखने लायक है। जेल के पिछले वर्षों के परीक्षा परिणाम भी इस बड़े बदलाव की गवाही दे रहे हैं। साल 2024 में इंटर की परीक्षा में शामिल हुए 34 बंदियों में से 12 ने परीक्षा पास की थी। वहीं साल 2025 में भी 10 बंदियों में से 4 ने सफलता हासिल की, जो यह साबित करता है कि बंदियों को अगर सही माहौल मिले तो वे अपनी किस्मत खुद बदल सकते हैं।
UPSC-BPSC Exam: सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनने की ट्रेनिंग
मुंगेर जेल प्रशासन बंदियों के पुनर्वास (Rehabilitation) पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रहा है। जेल अधीक्षक किरण निधि के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य बंदियों को केवल सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें सुधारने का अवसर देना है। यही वजह है कि पढ़ाई के साथ-साथ बंदियों को कई तरह के रोजगारपरक और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं:
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मशरूम उत्पादन: जेल के भीतर अब तक कुल 74 बंदियों को आधुनिक तरीके से मशरूम उगाने का पूरा प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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पशुपालन विकास: करीब 60 बंदियों को पशुपालन से जुड़े डेयरी और अन्य कार्यक्रमों के तहत स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है।
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संगीत और कला: बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने और उनके रचनात्मक विकास के लिए जेल में एक संगीत शिक्षक की नियुक्ति की गई है, जो कैदियों को गायन और वादन सिखाते हैं।
जेल प्रशासन का यह साफ मानना है कि जब ये कैदी अपनी सजा या ट्रायल पूरा करके जेल की चहारदीवारी से बाहर कदम रखेंगे, तो इनके हाथों में एक ऐसा हुनर होगा जिससे ये किसी पर बोझ नहीं बनेंगे। ये खुद का काम शुरू कर सम्मानजनक आजीविका कमा सकेंगे और दोबारा कभी अपराध के दलदल में नहीं फंसेंगे।
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