Bihar Teacher Vacancy: बिहार के अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों का संकट होगा दूर, एक महीने के भीतर होगी प्रतिनियुक्ति

Bihar Teacher Vacancy: बिहार के अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में खाली पदों पर बड़ा फैसला; एक महीने के भीतर प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे शिक्षकों के पद।

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Bihar Teacher Vacancy: बिहार की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर विधानसभा के भीतर मंगलवार को एक बेहद अहम मुद्दा गूंजा, जिस पर सरकार की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है। राज्य के डॉक्टर भीमराव अंबेडकर इंटर अनुसूचित जाति एवं जनजाति आवासीय विद्यालयों में लंबे समय से शिक्षकों की भारी कमी चली आ रही थी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए सदन में स्थिति स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया है।

आने वाले एक महीने के भीतर इन आवासीय विद्यालयों में प्रतिनियुक्ति के जरिए सभी खाली पदों को भरने की बात कही गई है। सरकार के इस कदम से उन हजारों बच्चों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जग गई है, जो संसाधनों के अभाव में अपनी पढ़ाई को लेकर चिंतित थे।

Bihar Teacher Vacancy: विधानसभा में उठा खाली पदों का गंभीर मामला

प्रश्नकाल के दौरान सदन की कार्यवाही चल रही थी तभी यह गंभीर मसला उठाया गया। इस विषय को उठाते हुए सदन में बताया गया कि राज्यभर में संचालित इन आवासीय परिसरों में शिक्षकों के जितने पद स्वीकृत किए गए हैं, उनकी तुलना में बहुत कम शिक्षक ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

कम स्टाफ होने की वजह से बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है और समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने में भी दिक्कतें आ रही हैं। इस पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए तत्काल प्रभाव से शिक्षकों की व्यवस्था करने की पुरजोर मांग रखी गई, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में फौरन हरकत तेज हो गई।

क्या है वर्तमान स्थिति और स्वीकृत पदों का गणित?

सदन के पटल पर आंकड़े रखते हुए विभाग की वास्तविक स्थिति का खुलासा किया गया। अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार ने सदन को बताया कि इन विशेष विद्यालयों के लिए कुल 2406 पद स्वीकृत किए गए हैं।

इसके विपरीत, जमीनी हकीकत यह है कि इस समय केवल 1200 के आसपास शिक्षक ही मैदानी स्तर पर काम संभाल रहे हैं। यानी आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि इन रिक्तियों को स्थाई रूप से भरने के लिए बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी के पास विधिवत अधियाचना भेजी जा चुकी है ताकि नियमित नियुक्तियों की प्रक्रिया को गति मिल सके।

Bihar Teacher Vacancy: एक महीने की समय-सीमा और प्रतिनियुक्ति का फार्मूला

स्थाई बहाली की प्रक्रिया लंबी होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए सरकार ने तात्कालिक समाधान निकाल लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन को आश्वस्त किया कि जब तक आयोग के माध्यम से नियमित शिक्षकों का चयन होकर वे स्कूलों में नहीं पहुंच जाते, तब तक अंतरिम व्यवस्था के तहत प्रतिनियुक्ति का सहारा लिया जाएगा।

ठीक तीस दिन यानी एक महीने के भीतर सभी संबंधित आवासीय विद्यालयों में जरूरत के हिसाब से शिक्षकों की तैनाती पूरी कर ली जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी सीधे तौर पर शिक्षा विभाग के जिम्मे होगी ताकि किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जा सके।

Bihar Teacher Vacancy: नियमित मॉनिटरिंग से व्यवस्था सुधारने का दावा

सरकार का यह स्पष्ट निर्देश है कि बच्चों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पूरी प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया पर अपनी पैनी नजर रखेंगे और लगातार यह सुनिश्चित करेंगे कि तय समय-सीमा के भीतर हर संस्थान में शिक्षक अपनी उपस्थिति दर्ज करा दें।

विभाग की इस सक्रियता से यह उम्मीद बंध चली है कि आने वाले दिनों में इन आवासीय परिसरों का माहौल सुधरेगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल पाएगा। इस घोषणा के बाद से शिक्षा जगत और राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि सरकार ने संकट से निपटने के लिए एक व्यावहारिक रास्ता चुन लिया है।

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