Thalapathy Vijay: NEET परीक्षा खत्म हो, मेडिकल शिक्षा और प्रवेश व्यवस्था पर राज्यों को मिले पूरा अधिकार

तमिलनाडु वेत्री कड़गम ने NEET समाप्त करने और शिक्षा पर राज्यों के अधिकार की मांग उठाई

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Thalapathy Vijay: तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी तमिलनाडु वेत्री कड़गम (TVK) ने मंगलवार को नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा को लेकर अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। पार्टी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि वह केवल नीट परीक्षा में हो रही अनियमितताओं या पेपर लीक का विरोध नहीं कर रही, बल्कि इस राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा को पूरी तरह से समाप्त करने की मांग कर रही है। इसके साथ ही टीवीके ने जोर देकर कहा है कि देश में मेडिकल शिक्षा से जुड़े सभी मामलों पर राज्य सरकारों को पूर्ण अधिकार दिए जाने चाहिए। पार्टी की यह बड़ी मांग दिल्ली में नीट पेपर लीक के खिलाफ पिछले एक महीने से चल रहे राष्ट्रव्यापी छात्र प्रदर्शनों के बीच आई है।

पार्टी के अनुसार, नीट जैसी एकरूप व्यवस्था लंबे समय से ग्रामीण, गरीब और राज्य बोर्ड से पढ़े छात्रों के हितों के खिलाफ रही है। तमिलनाडु में इस प्रवेश परीक्षा को लेकर लंबे समय से गहरा असंतोष बना हुआ है। टीवीके ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि इस राष्ट्रीय मुद्दे पर पार्टी का रुख पूरी तरह से समझौताहीन, स्पष्ट और दृढ़ है। मुख्यमंत्री थलापति विजय पहले भी कई सार्वजनिक मंचों पर इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी बात मजबूती से रख चुके हैं।

नीट को पूरी तरह समाप्त करने की मांग

टीवीके ने बेहद साफ शब्दों में कहा है कि वह नीट में हो रही प्रशासनिक गड़बड़ियों या धांधली के खिलाफ ही नहीं है, बल्कि इस परीक्षा को जड़ से खत्म कराना चाहती है। पार्टी का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की यह एकरूप प्रवेश परीक्षा देश के अलग-अलग राज्यों के छात्रों के लिए अत्यधिक अनुचित और असमान साबित हो रही है। विशेष रूप से तमिलनाडु जैसे राज्यों में, जहां की स्थानीय भाषा, संस्कृति और राज्य बोर्ड की शिक्षा प्रणाली पूरी तरह अलग है, वहां नीट की व्यवस्था छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक और आर्थिक बोझ डालती है।

पार्टी ने याद दिलाया कि नीट को लेकर तमिलनाडु में पिछले कई वर्षों से लगातार विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं और इस बार दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी देश भर के छात्र सड़कों पर उतरे हुए हैं। टीवीके का कहना है कि इस राष्ट्रीय समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब नीट जैसी केंद्रीकृत परीक्षाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए और मेडिकल में प्रवेश की प्रक्रिया को एक बार फिर से संबंधित राज्यों के हाथों में सौंप दिया जाए।

शिक्षा को राज्य सूची में लाने का संवैधानिक प्रस्ताव

टीवीके ने अपने आधिकारिक बयान में एक बेहद महत्वपूर्ण संवैधानिक मांग भी केंद्र सरकार के समक्ष रखी है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि शिक्षा को भारतीय संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) से हटाकर पुनः पूरी तरह से राज्य सूची (State List) में शामिल किया जाना चाहिए। इस संवैधानिक संशोधन से राज्य सरकारों को अपने राज्य की विशिष्ट जरूरतों के अनुसार शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम और मेडिकल प्रवेश व्यवस्था खुद तय करने का संवैधानिक अधिकार मिल जाएगा।

पार्टी का तर्क है कि शिक्षा का विषय राज्यों की अपनी भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए। जब शिक्षा का अधिकार पूरी तरह राज्य सूची के अंतर्गत होगा, तब मेडिकल शिक्षा पर भी राज्यों का सीधा और पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो जाएगा। टीवीके ने कहा कि यह एक ऐसा दूरगामी और स्थायी समाधान है, जो वर्षों से चले आ रहे इस विवाद को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है।

अंतरिम समाधान के रूप में विशेष समवर्ती सूची का सुझाव

टीवीके ने अपने बयान में यह भी व्यावहारिक रूप से स्वीकार किया है कि शिक्षा को समवर्ती सूची से हटाकर राज्य सूची में ट्रांसफर करने में कुछ कानूनी, विधायी और प्रक्रियात्मक बाधाएं आ सकती हैं। ऐसे में पार्टी ने केंद्र सरकार के सामने एक अंतरिम संवैधानिक उपाय का सुझाव भी पेश किया है। पार्टी का कहना है कि जब तक इस प्रक्रिया का कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक एक विशेष समवर्ती सूची या विशेष कानूनी ढांचा तैयार किया जाना चाहिए।

इस विशेष व्यवस्था के माध्यम से राज्य सरकारों को अपने-अपने राज्यों में शिक्षा और मेडिकल प्रवेश प्रक्रियाओं पर पूर्ण निर्णय लेने का अधिकार दिया जा सकता है। टीवीके ने स्पष्ट किया कि यह उनका स्थायी और अंतरिम दोनों ही स्थितियों के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है। पार्टी ने दोहराया कि मुख्यमंत्री थलापति विजय पहले भी इस त्रिस्तरीय समाधान पर जोर दे चुके हैं और उनका रुख आज भी पूरी तरह अडिग है।

डीएमके पर निशाना साधते हुए राजनीति पर सवाल

टीवीके ने अपने बयान में तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके (DMK) का नाम लिए बिना उस पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि वह केवल चुनाव जीतने और वोट पाने के लिए जनता को गुमराह करने या धोखे में रखने वाली राजनीति में कभी शामिल नहीं होगी। टीवीके का गंभीर आरोप है कि कुछ राजनीतिक दल चुनाव से ठीक पहले जनता से ‘नीट को एक ही हस्ताक्षर में खत्म करने’ जैसे बड़े-बड़े लोक लुभावन वादे करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों पर कोई अमल नहीं करते।

पार्टी ने 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी जनता से नीट खत्म करने का झूठा वादा किया गया था। टीवीके ने इसे राज्य की जनता और छात्रों के साथ एक बड़ा राजनीतिक धोखा करार दिया। पार्टी का कहना है कि वह ऐसी अवसरवादी राजनीति से हमेशा दूर रहेगी और केवल ठोस, पारदर्शी और संवैधानिक समाधानों पर ही जोर देगी।

उदयनिधि स्टालिन की आलोचना के जवाब में पार्टी का रुख

टीवीके का यह कड़ा बयान सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की हालिया बयानबाजी के बाद आया है। उदयनिधि स्टालिन ने हाल ही में राज्य सरकार द्वारा प्रसिद्ध रैप सिंगर थेरुक्कुरल अरिवु के साथ किए गए पुलिस व्यवहार पर सवाल खड़े किए थे। उल्लेखनीय है कि सिंगर अरिवु ने चेन्नई में फोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर स्थित तमिलनाडु सचिवालय के बाहर नीट के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की थी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।

टीवीके ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग दूसरों की मेहनत, जमीनी संघर्षों और मौलिक विचारों पर अपना राजनीतिक लेबल लगाने जैसी अनैतिक राजनीति कर रहे हैं, उन्हें तुरंत टीवीके को निशाना बनाना बंद कर देना चाहिए। पार्टी ने स्पष्ट किया कि नीट जैसे राष्ट्रीय और संवेदनशील मुद्दे पर उसका रुख किसी भी प्रकार के छोटे राजनीतिक विवादों या चुनावी लाभ-हानि से बहुत ऊपर है।

दिल्ली में नीट विरोध प्रदर्शनों के बीच आई मांग

टीवीके की यह बड़ी मांग ऐसे समय में सामने आई है जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा धांधली के खिलाफ सैकड़ों छात्र और युवा पिछले 32 दिनों से लगातार अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। देश के लगभग सभी राज्यों के छात्र राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की निष्पक्षता और संपूर्ण परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। टीवीके ने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर जारी यह आंदोलन इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वर्तमान नीट व्यवस्था में गंभीर और बुनियादी कमियां हैं।

पार्टी का मानना है कि केवल धांधली की जांच करा लेने या कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई करने से काम नहीं चलेगा। इस पूरी समस्या की मूल जड़ राष्ट्रीय स्तर की केंद्रीकृत और एकरूप परीक्षा का मॉडल है, जो अलग-अलग राज्यों की समृद्ध शिक्षा व्यवस्था और विविधता को पूरी तरह से नजरअंदाज करता है। टीवीके ने कहा कि राज्यों को अपने छात्रों के भविष्य के हित में स्वतंत्र फैसले लेने का पूर्ण अधिकार होना ही चाहिए।

नीट विवाद की पृष्ठभूमि और तमिलनाडु का रुख

तमिलनाडु राज्य शुरुआती दिनों से ही नीट परीक्षा का कड़ा विरोध करता रहा है। राज्य की विभिन्न सरकारों का हमेशा से यह स्पष्ट मानना रहा है कि नीट जैसी कठिन राष्ट्रीय परीक्षाएं केवल बड़े-बड़े कोचिंग सेंटरों की संस्कृति को बढ़ावा देती हैं और ग्रामीण, गरीब तथा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कमजोर वर्ग के प्रतिभावान छात्रों को मेडिकल शिक्षा से पूरी तरह वंचित करती हैं। यही कारण है कि तमिलनाडु विधानसभा में कई बार सर्वसम्मति से नीट से छूट देने वाले विधेयक पारित किए जा चुके हैं। टीवीके का मौजूदा रुख भी इसी राज्यव्यापी परंपरा को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाता है।

पार्टी ने कहा कि नीट को पूरे देश में समाप्त करने और मेडिकल शिक्षा पर राज्यों को उनका जायज अधिकार देने से ही इस जटिल समस्या का वास्तविक और स्थायी हल निकल सकता है। टीवीके का दावा है कि उसका यह निर्णय किसी राजनीतिक दबाव या चुनावी मौके की राजनीति से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से छात्रों के भविष्य और राज्य की स्वायत्तता के हित में लिया गया एक विचारशील फैसला है।

Thalapathy Vijay: पार्टी का अडिग रुख और आगे की भावी रणनीति

टीवीके ने अपने बयान के समापन में एक बार फिर दोहराया कि नीट जैसी जनविरोधी परीक्षा व्यवस्था को पूरे देश में तुरंत प्रभाव से समाप्त किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, प्राथमिक से लेकर उच्च और मेडिकल शिक्षा तक के सभी विषयों पर राज्य सरकारों को पूर्ण प्रशासनिक व कानूनी नियंत्रण मिलना चाहिए। पार्टी ने स्पष्ट किया कि चाहे जितना भी राजनीतिक विरोध या विवाद क्यों न हो, इस जनहितकारी मुद्दे पर टीवीके का रुख हमेशा पक्का और अपरिवर्तनीय रहेगा।

मुख्यमंत्री थलापति विजय की अगुवाई वाली तमिलनाडु (Thalapathy Vijay) वेत्री कड़गम (TVK) अब इस मांग को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक जोर-शोर से उठाने की रणनीति तैयार कर रही है। टीवीके का मानना है कि जब तक शिक्षा का पूरा विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में वापस नहीं लाया जाता, तब तक नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाएं हमेशा विवाद, धांधली और असंतोष का केंद्र बनी रहेंगी। पार्टी ने केंद्र सरकार से इस संवैधानिक मांग पर तुरंत और गंभीरता से विचार करने की जोरदार अपील की है।

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