Cortisol Balance: ये 3 रोजाना की डाइटरी आदतें बढ़ा सकती हैं तनाव और बिगाड़ सकती हैं कोर्टिसोल बैलेंस, जानें स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सटीक सलाह

ये 3 रोजाना की डाइटरी आदतें बढ़ा सकती हैं तनाव और बिगाड़ सकती हैं कोर्टिसोल बैलेंस, जानें स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सटीक सलाह

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Cortisol Balance: आधुनिक और अत्यधिक व्यस्त जीवनशैली में एंग्जायटी, मानसिक थकान और तनाव एक बेहद आम समस्या बन चुके हैं। अधिकांश लोग जब भी मानसिक तनाव से गुजरते हैं, तो वे इसके पीछे काम के दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियों या अनिद्रा को मुख्य कारण मानते हैं। परंतु, बहुत कम लोग इस वैज्ञानिक तथ्य से वाकिफ हैं कि हमारी रोजाना की कुछ गलत डाइटरी आदतें (खान-पान की आदतें) भी शरीर में तनाव के स्तर को चुपके से बढ़ा देती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हम दिन भर में जो कुछ भी खाते-पीते हैं, उसका सीधा संबंध हमारे शरीर के मुख्य स्ट्रेस हार्मोन यानी ‘कोर्टिसोल’ (Cortisol) के संतुलन से होता है।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, कोर्टिसोल एक बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेस हार्मोन है, जिसे एड्रिनल ग्लैंड्स (अधिवृक्क ग्रंथियां) द्वारा स्रावित किया जाता है। यह हार्मोन संकट या खतरे के समय शरीर को ‘फाइट या फ्लाइट’ रिस्पॉन्स के लिए तैयार करने, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखने में मदद करता है। लेकिन जब हमारी गलत खान-पान की आदतों के कारण रक्त में कोर्टिसोल का स्तर लगातार ऊंचा बना रहता है, तो यह शरीर के हार्मोनल संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ देता है। कोर्टिसोल का यह क्रोनिक असंतुलन अंततः अत्यधिक मानसिक तनाव, क्रोनिक थकान, तेजी से वजन बढ़ना और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) के कमजोर होने का मुख्य कारण बनता है। आइए जानते हैं उन तीन प्रमुख डाइटरी आदतों के बारे में जो हमारे स्ट्रेस लेवल को बढ़ा रही हैं।

कैफीन का अत्यधिक सेवन और कोर्टिसोल स्पाइक का सीधा संबंध

सुबह की शुरुआत एक कड़क कप कॉफी या चाय के साथ करना दुनिया भर के लाखों लोगों की सबसे पसंदीदा आदत है। सीमित मात्रा में कैफीन का सेवन मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को सक्रिय करता है और सुस्ती दूर भगाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दिन भर में बार-बार या अत्यधिक मात्रा में कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन करना शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है। कैफीन सीधे तौर पर एड्रिनल ग्लैंड्स को उत्तेजित करता है, जिससे रक्त में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर अचानक बहुत तेजी से बढ़ (Spike) जाता है।

जब आप दिन भर में तीन से चार कप से ज्यादा कॉफी या चाय पीते हैं, तो आपका शरीर बिना किसी वास्तविक खतरे के भी लगातार तनाव की स्थिति में बना रहता है। इसके कारण जातक को घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना और चिड़चिड़ेपन का अनुभव होने लगता है। पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि दोपहर के बाद, विशेषकर शाम 4 बजे के बाद कैफीन का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए, क्योंकि कैफीन शरीर में लगभग 6 से 8 घंटे तक सक्रिय रहता है, जो रात की नींद के चक्र (Melatonin Cycle) को बुरी तरह प्रभावित करता है। नींद पूरी न होने के कारण अगली सुबह शरीर में कोर्टिसोल का स्तर दोगुना बढ़ा हुआ मिलता है, जो तनाव का एक अंतहीन चक्र शुरू कर देता है।

रिफाइंड शुगर का अत्यधिक सेवन और ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव का खतरा

हमारी दूसरी सबसे खतरनाक डाइटरी आदत रिफाइंड शुगर, मीठे कोल्ड ड्रिंक्स, बेकरी प्रोडक्ट्स और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का नियमित सेवन करना है। जब हम किसी मानसिक तनाव या काम के दबाव में होते हैं, तो हमारा मन अक्सर ‘कम्फर्ट फूड’ के रूप में मीठी चीजें या चॉकलेट खाने की तीव्र इच्छा (Sugar Cravings) जताता है। लेकिन यह तात्कालिक आनंद शरीर के आंतरिक सिस्टम के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करता है। रिफाइंड शुगर से भरपूर इन खाद्य पदार्थों को खाते ही शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर अचानक बहुत तेजी से ऊपर चला जाता है।

रक्त में बढ़े हुए ग्लूकोज को नियंत्रित करने के लिए अग्न्याशय (Pancreas) को भारी मात्रा में इंसुलिन हार्मोन छोड़ना पड़ता है। इंसुलिन के इस अचानक स्राव से ब्लड शुगर का स्तर जितनी तेजी से ऊपर गया था, उतनी ही तेजी से अचानक नीचे गिर जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘शुगर क्रैश’ कहा जाता है। इस शुगर क्रैश की स्थिति को हमारा शरीर एक आंतरिक आपातकाल या खतरे के रूप में देखता है। इस आपातकाल से निपटने और ब्लड शुगर को दोबारा सामान्य करने के लिए मस्तिष्क तुरंत एड्रिनल ग्रंथियों को भारी मात्रा में कोर्टिसोल हार्मोन स्रावित करने का आदेश देता है। यह बार-बार होने वाला शुगर का उतार-चढ़ाव मूड स्विंग्स, एंग्जायटी और मानसिक तनाव को गंभीर रूप से बढ़ा देता है।

अनियमित भोजन का समय और भोजन छोड़ने (स्किपिंग मील) की आदत

आज के समय में सुबह के दफ्तर की जल्दबाजी में ब्रेकफास्ट (नाश्ता) छोड़ देना या देर रात को भारी डिनर करना लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन का कोई निश्चित समय न होना या लंबे समय तक भूखे रहना कोर्टिसोल हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ने वाली तीसरी सबसे बड़ी डाइटरी आदत है। जब आप सुबह का सबसे महत्वपूर्ण भोजन यानी नाश्ता छोड़ देते हैं, तो शरीर में ऊर्जा का संकट पैदा हो जाता है और ग्लूकोज का स्तर काफी नीचे गिर जाता है।

शरीर को सुचारू रूप से चलाने और अंगों तक ऊर्जा पहुंचाने के लिए हमारा डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो जाता है और कोर्टिसोल हार्मोन का स्राव बढ़ा देता है ताकि लीवर में संचित ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में बदला जा सके। लंबे समय तक भूखे रहने या अनियमित समय पर भोजन करने से शरीर लगातार एक जैविक तनाव (Biological Stress) की स्थिति में जीने लगता है। डॉक्टरों का कहना है कि दिन भर में तीन समय का संतुलित भोजन और बीच-बीच में हेल्दी स्नैक्स लेना बेहद आवश्यक है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म स्थिर रहता है, ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है और मस्तिष्क को लगातार यह संकेत मिलता रहता है कि शरीर पूरी तरह सुरक्षित है, जिससे कोर्टिसोल का स्तर सामान्य बना रहता है।

शरीर में कोर्टिसोल का बैलेंस बिगड़ने के मुख्य और छिपे हुए लक्षण

जब किसी व्यक्ति के शरीर में लंबे समय तक कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर असामान्य रूप से ऊंचा या असंतुलित बना रहता है, तो शरीर कई प्रकार के स्पष्ट और छिपे हुए संकेतों के जरिए इस खराबी की चेतावनी देने लगता है। इन लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। कोर्टिसोल असंतुलन का सबसे पहला लक्षण है ‘क्रोनिक फटीग’ यानी रात में पर्याप्त नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना। इसके अलावा, व्यक्ति के स्वभाव में अचानक चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी (Brain Fog) और छोटी-छोटी बातों पर अत्यधिक चिंता या घबराहट होने लगती है।

शारीरिक स्तर पर, कोर्टिसोल के बढ़ने से विशेष रूप से पेट के आस-पास की चर्बी (Visceral Fat) बहुत तेजी से बढ़ने लगती है, जिसे कम करना बेहद कठिन होता है। इसके साथ ही, चेहरे पर सूजन आना, त्वचा का पतला होना, मांसपेशियों में कमजोरी और बार-बार मीठा या नमकीन खाने की तीव्र इच्छा होना भी इसके प्रमुख लक्षण हैं। चिकित्सा शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि यदि कोर्टिसोल के इस असंतुलन का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह आगे चलकर उच्च रक्तचाप, गंभीर हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और महिलाओं में पीसीओडी (PCOD) जैसी गंभीर हार्मोनल समस्याओं के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

हार्मोनल संतुलन को सुधारने और तनाव दूर करने के अचूक स्वास्थ्य उपाय

  • पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार: अपने दैनिक भोजन में एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन (जैसे दालें, पनीर या अंडा) और हेल्दी फैट्स (जैसे बादाम, अखरोट और चिया सीड्स) को अनिवार्य रूप से शामिल करें। यह पोषक तत्व एड्रिनल ग्रंथियों को शांत रखने में मदद करते हैं।

  • हर्बल सप्लीमेंट्स और एडाप्टोजेन्स: स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, अपनी डाइट में अश्वगंधा, तुलसी और डार्क चॉकलेट (सीमित मात्रा में) जैसी चीजों को शामिल करें। इनमें मौजूद प्राकृतिक एडाप्टोजेन्स गुण शरीर की तनाव सहने की क्षमता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाते हैं और कोर्टिसोल को नियंत्रित करते हैं।

  • हाइड्रेशन और पर्याप्त पानी: शरीर में पानी की थोड़ी सी भी कमी (Dehydration) आंतरिक तनाव को बढ़ा देती है, जिससे कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है। इसलिए दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास साफ पानी या नारियल पानी का सेवन जरूर करें।

दैनिक जीवनशैली में किए जाने वाले महत्वपूर्ण और व्यावहारिक बदलाव

अपनी खान-पान की आदतों को सुधारने के साथ-साथ दैनिक जीवनशैली में कुछ छोटे लेकिन बेहद प्रभावी बदलाव करके आप कोर्टिसोल हार्मोन के संतुलन को पूरी तरह वापस पा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अपने सोने और जागने के समय को निश्चित करना है। प्रतिदिन रात को जल्दी सोने की आदत डालें और कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें। सोने से कम से कम एक घंटा पहले अपने मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन को पूरी तरह से बंद कर दें (डिजिटल डिटॉक्स), क्योंकि स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे स्लीप हार्मोन मेलाटोनिन को रोकती है, जिससे कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है।

इसके अलावा, अपने मानसिक तनाव को कम करने के लिए प्रतिदिन कम से कम 20 से 30 मिनट का समय योग, प्राणायाम, गहरी सांस लेने वाले व्यायाम (Deep Breathing Exercises) या ध्यान (Meditation) के लिए अवश्य निकालें। कार्यस्थल पर काम के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक्स लें और अपने पास हमेशा भुने हुए चने, मखाने या नट्स जैसे हेल्दी स्नैक्स रखें ताकि भूख लगने पर आप जंक फूड खाने से बच सकें। शाम के समय प्रकृति के साथ कुछ पल बिताना या पार्क में वॉक करना भी मस्तिष्क को शांत करने और कोर्टिसोल को नीचे लाने का एक बेहतरीन और प्राकृतिक तरीका है।

निष्कर्ष और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का आम जनता के लिए अंतिम संदेश

संक्षेप में कहा जाए तो, तनाव केवल हमारे विचारों या बाहरी परिस्थितियों से तय नहीं होता, बल्कि इसमें हमारी रोजाना की डाइटरी (Cortisol Balance) आदतों का बहुत बड़ा और सीधा हाथ होता है। कैफीन का सीमित उपयोग, रिफाइंड शुगर से दूरी और भोजन का एक निश्चित समय निर्धारित करके आप अपने शरीर के कोर्टिसोल हार्मोन को आसानी से संतुलित रख सकते हैं। पोषण विशेषज्ञों का अंतिम संदेश यही है कि अपने शरीर की जरूरतों को समझें, एक अनुशासित डाइट डायरी बनाएं और अपने भोजन को पूरी तरह से सात्विक और पौष्टिक रखें।

यदि जीवनशैली और खान-पान में बदलाव करने के बाद भी आपको लगातार अत्यधिक तनाव, अनिद्रा या थकान की शिकायत बनी रहती है, तो बिना किसी संकोच के तुरंत किसी योग्य एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या डॉक्टर से संपर्क करके अपने हार्मोनल स्तर की जांच करवाएं। जागरूक रहें, सही खाएं, मानसिक रूप से शांत रहें और एक स्वस्थ व ऊर्जावान जीवन का आनंद लें।

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