Kashmir digital terror network: कश्मीर में डिजिटल आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़, 5 जिलों में CIK की छापेमारी; ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन मॉड्यूल का खुलासा

CIK ने 5 जिलों में छापेमारी कर डिजिटल रेडिकलाइजेशन नेटवर्क से जुड़े ठिकाने खंगाले

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Kashmir digital terror network: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का स्वरूप अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर पूरी तरह से डिजिटल और सोशल मीडिया के माध्यमों तक फैल चुका है। काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए शनिवार तड़के उत्तर और दक्षिण कश्मीर के पांच जिलों में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान घाटी में युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेलने और आतंकी संगठनों में भर्ती करने के उद्देश्य से चलाई जा रही एक ‘ऑनलाइन वर्कशॉप’ और आतंकवादी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया गया है।

सीआईके की टीमों ने बारामूला, शोपियां, अनंतनाग, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों में कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। यह पूरी कार्रवाई स्लीपर सेल, ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं का ब्रेनवाश करने वाले डिजिटल नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने के उद्देश्य से की गई।

Kashmir digital terror network: गैर-कानूनी गतिविधियों और आतंकवाद के महिमामंडन पर एफआईआर, 5000 लोगों से पूछताछ के बाद खुला राज

यह व्यापक अभियान एक विशेष एफआईआर (FIR) के आधार पर चलाया गया, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए आतंकवाद का महिमामंडन करने, झूठे नैरेटिव गढ़ने और निर्दोष युवाओं को आतंकी ट्रेनिंग व भर्ती के लिए उकसाने के गंभीर आरोप शामिल हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाल ही में घाटी में हुई ‘टारगेट किलिंग’ की घटनाओं के बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई थी। पुलिस और सुरक्षा बलों ने संयुक्त अभियान चलाकर पूरी कश्मीर घाटी में लगभग 5,000 संदिग्ध लोगों से सघन पूछताछ की थी। इसी व्यापक पूछताछ के दौरान डिजिटल माध्यमों से सक्रिय स्लीपर सेल्स और ओवरग्राउंड वर्कर्स के गुप्त नेटवर्क की पुख्ता जानकारी मिली, जिसके बाद काउंटर इंटेलिजेंस ने शनिवार सुबह इस रणनीतिक छापेमारी को अंजाम दिया।

कुपवाड़ा, बांदीपोरा, पाटन और शोपियां में संदिग्धों के ठिकानों पर रेड

काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर ने स्थानीय पुलिस बल और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के सहयोग से कई विशिष्ट स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया:

  • कुपवाड़ा: कुपवाड़ा में बाबर डार नामक व्यक्ति के परिसर में छापेमारी की गई। उन पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए जारी सिम कार्ड्स का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया पर देश विरोधी और उकसाने वाली सामग्री प्रसारित करने का आरोप है।

  • बांदीपोरा: बांदीपोरा में अब्दुल राशिद डार की बेटी लाली के घर पर दबिश दी गई। उन पर भी अवैध सिम कार्ड्स का उपयोग कर ऑनलाइन माध्यमों से आतंकवाद को बढ़ावा देने की गतिविधियों में संलिप्तता का संदेह है।

  • पाटन (बारामूला): पाटन इलाके के अबरार नबी अहमद के आवास पर सघन तलाशी ली गई।

  • शोपियां: शोपियां के रहने वाले गुलजार अहमद वानी के घर पर भी रेड मारी गई। अधिकारियों के मुताबिक, गुलजार का बेटा उस्मान गुलजार पहले से ही गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA), आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत मध्य जेल में बंद है।

डिजिटल रेडिकलाइजेशन और टेरर फाइनेंसिंग का नया मॉड्यूल

जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि घाटी में आतंकियों का ‘डिजिटल रेडिकलाइजेशन नेटवर्क’ काफी गहराई तक जड़ें जमा चुका था। यह मॉड्यूल विभिन्न एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को लक्षित करता था।

इस नेटवर्क का मुख्य काम आतंकवाद को महिमामंडित करने वाले वीडियो, ऑडियो और भ्रामक संदेशों के माध्यम से युवाओं की मानसिकता को प्रभावित करना था। इसके अलावा, ऑनलाइन माध्यमों से टेरर फाइनेंसिंग (आतंकी फंडिंग) जुटाने और विदेशों में बैठे आकाओं से निर्देश प्राप्त करने के साक्ष्य भी मिले हैं। सुरक्षा बलों ने कई संदिग्धों के ठिकानों से स्मार्टफोन, सिम कार्ड, हार्ड ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

मोबाइल स्क्रीन तक पहुंचा खतरा: डिजिटल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की मुस्तैदी

किसी समय कश्मीर में आतंकवाद का दायरा केवल घने जंगलों, पहाड़ों और सीमापार घुसपैठ तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब यह तकनीक के सहारे आम युवाओं के मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच गया है। फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स और अवैध सिम कार्ड्स का इस्तेमाल कर युवाओं में भावनात्मक असंतोष पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

इस डिजिटल खतरे का मुकाबला करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने भी अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब साइबर सुरक्षा विंग और काउंटर-इंटेलिजेंस इकाइयां इंटरनेट पर 24 घंटे डिजिटल फुटप्रिंट्स की निगरानी कर रही हैं। 5,000 लोगों से पूछताछ और उसके बाद की गई यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि सुरक्षा बल पारंपरिक अभियानों के साथ-साथ डिजिटल मोर्चे पर भी पूरी तरह से सतर्क और आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।

Kashmir digital terror network: युवाओं की सुरक्षा, सामाजिक जागरूकता और आगे की जांच

डिजिटल रेडिकलाइजेशन को आज के समय में युवाओं के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है। सुरक्षा अधिकारियों ने परिवारों, अभिभावकों और शैक्षणिक संस्थानों से अपील की है कि वे युवाओं की ऑनलाइन गतिविधियों और सोशल मीडिया व्यवहार पर नजर रखें ताकि उन्हें किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार या असामाजिक तत्वों के प्रभाव में आने से बचाया जा सके।

जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों से मिलने वाले डेटा के आधार पर आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं। टेरर फाइनेंसिंग के वित्तीय स्रोतों को ट्रैक करने के लिए भी जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि आतंकवाद के इस नए डिजिटल अवतार को जड़ से समाप्त करने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता दोनों का एक साथ होना अनिवार्य है।

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