28 अप्रैल को रखा जाएगा व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, मधुसूदन द्वादशी की पूजा विधि और संतान सुख के लिए विशेष उपाय।

भगवान विष्णु के छठे अवतार को समर्पित है यह पावन व्रत; 28 अप्रैल को श्रद्धालु रखेंगे उपवास।

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Parashuram Dwadashi 2026: सनातन धर्म में वैशाख मास की शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि को परशुराम द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना की जाती है। इसे रुक्मिणी द्वादशी और मधुसूदन द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष परशुराम द्वादशी 28 अप्रैल 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। हाल ही में 19 अप्रैल को परशुराम जयंती मनाई गई थी, अब द्वादशी व्रत श्रद्धालुओं के लिए विशेष अवसर लेकर आ रहा है।

जो भक्त इस दिन पूरे विधि-विधान से व्रत रखते हैं, उन्हें संतान सुख, समृद्धि और जीवन के संकटों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। यह व्रत न सिर्फ धार्मिक आस्था को मजबूत करता है बल्कि व्यक्ति को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है।

Parashuram Dwadashi 2026: परशुराम द्वादशी 2026 की तिथि और समय

ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, इस वर्ष व्रत और पारण का सटीक समय निम्नलिखित है:

  • द्वादशी तिथि प्रारंभ: 27 अप्रैल 2026, शाम 06:15 बजे से।

  • द्वादशी तिथि समापन: 28 अप्रैल 2026, शाम 06:51 बजे तक।

  • व्रत की तिथि: 28 अप्रैल 2026 (पूरे दिन का उपवास)।

  • पारण का शुभ मुहूर्त: 29 अप्रैल 2026, सुबह 05:42 बजे से 08:21 बजे तक।

श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे सूर्योदय के बाद ही पारण करें और तिथि के नियमों का पूर्ण पालन करें।

Parashuram Dwadashi 2026: परशुराम द्वादशी व्रत की पूजा विधि

परशुराम द्वादशी के दिन पूजा विधि सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है:

  1. प्रातः काल: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु अथवा परशुराम जी का स्मरण करें।

  2. स्थापना: घर के मंदिर में भगवान की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।

  3. अर्पण: फूल, फल, मिठाई और शुद्ध भोग अर्पित करें। भगवान विष्णु के मधुसूदन स्वरूप की पूजा भी इस दिन अत्यंत फलदायी होती है।

  4. कथा पाठ: परशुराम द्वादशी की कथा का पाठ अवश्य करें, जिसमें उनके वीरतापूर्ण जीवन और माता-पिता के प्रति समर्पण का वर्णन होता है।

  5. आरती व दान: पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें। इस दिन ब्राह्मणों को दान देना और गरीबों को भोजन कराना पुण्यदायी माना जाता है।

Parashuram Dwadashi 2026: धार्मिक महत्व और पौराणिक प्रेरणा

भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने अपनी वीरता से पृथ्वी को कई बार अधर्म से मुक्त किया।

  • संतान सुख: मान्यता है कि जो दंपति संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी है।

  • संकट मुक्ति: आर्थिक संकट, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और पारिवारिक कलह दूर करने में यह व्रत कारगर माना जाता है।

  • आदर्श: परशुराम जी का जीवन माता-पिता की सेवा और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष का अद्भुत उदाहरण है। आधुनिक समय में यह कथा युवाओं को साहस और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा देती है।

Parashuram Dwadashi 2026: व्रत के दौरान सावधानियां और उपाय

  • स्वास्थ्य: वर्तमान गर्मी के मौसम को देखते हुए व्रत के दौरान पर्याप्त जल का सेवन करते रहें।

  • फलाहार: मौसमी फल, दूध और सात्विक व्यंजनों का ही प्रयोग करें।

  • विशेष उपाय: इस दिन भगवान परशुराम के मंत्रों का जाप करना और वृक्षारोपण जैसे पुण्य कार्य करना श्रेष्ठ माना गया है।

निष्कर्ष: आशीर्वाद पाने का उत्तम अवसर

28 अप्रैल 2026 को आने वाली परशुराम द्वादशी श्रद्धालुओं के लिए सुख और समृद्धि का संदेश लेकर आ रही है। सही तिथि और शुभ मुहूर्त में पूजा, कथा पाठ और दान से इस व्रत को पूर्ण बनाएं। यह दिन न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि हमारे नैतिक मूल्यों को भी मजबूत करता है।

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