Best Food For Summer: भीषण गर्मी और लू का प्रकोप, आयुर्वेद के जरिए शरीर को रखें अंदर से कूल, इन देसी नुस्खों से हीट वेव होगी बेअसर
45°C पार गर्मी में आयुर्वेदिक डाइट से रखें शरीर ठंडा, जानें सत्तू, छाछ, आम पना जैसे फायदेमंद उपाय
Best Food For Summer: अप्रैल के आखिरी सप्ताह में उत्तर भारत समेत कई राज्यों में पारा 42-45 डिग्री के पार पहुंच चुका है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में लगातार हीट वेव की चेतावनी जारी है। सुबह 9 बजे के बाद सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। लोग घरों में एसी और कूलर के सहारे जिंदा हैं लेकिन बाहर निकलना जैसे सजा बन गया है। ऐसे में सिर्फ बाहर से ठंडक नहीं बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा रखना बहुत जरूरी हो गया है। आयुर्वेद के विशेषज्ञों के मुताबिक सही डाइट और कुछ घरेलू पेय पदार्थ लू लगने, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं से बचाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। स्वामी रामदेव समेत कई आयुर्वेदाचार्यों का कहना है कि प्रकृति में उपलब्ध कुछ साधारण चीजें गर्मी के मौसम में शरीर के पित्त दोष को संतुलित रखती हैं और तापमान को नियंत्रित करती हैं।
हीट वेव का बढ़ता जोखिम: क्यों जरूरी है सावधानी?
इस साल अप्रैल में हीट वेव पहले से ज्यादा तीखी है। मौसम विभाग के अनुसार कई इलाकों में तापमान सामान्य से 4-6 डिग्री ऊपर दर्ज किया जा रहा है। इससे शरीर का तापमान बढ़ता है, पसीना ज्यादा आता है और पानी-इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है। नतीजा होता है थकान, चक्कर, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में ऑर्गन फेलियर तक। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और बीमार लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। काम पर जाने वाले लोग दोपहर की धूप में निकलते ही थकान महसूस करने लगते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बाहरी गर्मी के साथ अगर आहार भी गर्म तासीर वाला हो तो शरीर का तापमान और बढ़ जाता है। इसलिए डाइट में बदलाव करके हीट वेव से लड़ना सबसे प्रभावी तरीका है।
पित्त दोष का संतुलन: क्या कहता है आयुर्वेद का विज्ञान?
आयुर्वेद में गर्मी को पित्त दोष से जोड़ा जाता है। जब पित्त बढ़ता है तो शरीर में जलन, प्यास, चिड़चिड़ापन और त्वचा संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं। ठंडक देने वाले आहार पित्त को शांत करते हैं और शरीर के अंदरूनी तापमान को नियंत्रित रखते हैं। ये आहार न सिर्फ पानी की कमी पूरी करते हैं बल्कि विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भी देते हैं जो इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। स्वामी रामदेव कहते हैं कि गर्मी के मौसम में सत्तू, छाछ और पुदीना जैसी चीजें शरीर को प्राकृतिक ठंडक देती हैं। इनका नियमित सेवन लू और हीट स्ट्रोक की आशंका को काफी हद तक कम कर देता है।
गर्मी के खास सुपरफूड्स: जो शरीर को देंगे कुदरती ठंडक
गर्मी के मौसम में सबसे पहले पेय पदार्थों पर ध्यान देना चाहिए। सत्तू गर्मी में सबसे लोकप्रिय और फायदेमंद विकल्प है। जौ या चने से बना सत्तू फाइबर से भरपूर होता है। इसे पानी में घोलकर नमक, जीरा और नींबू मिला लें तो यह पेट को ठंडक देता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता। छाछ या लस्सी तो घर-घर में उपलब्ध है। दही को पानी के साथ फेंटकर बनाई गई छाछ प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है जो पाचन सुधारती है और शरीर को हाइड्रेट रखती है। इसमें थोड़ा सा पुदीना और जीरा मिलाने से स्वाद के साथ-साथ ठंडक भी दोगुनी हो जाती है।
आम का पना गर्मी का राजा माना जाता है। कच्चे आमों को उबालकर गूदा निकाल लें और इसमें पानी, भुना जीरा, काला नमक और मिश्री मिलाकर पिया जाए तो प्यास बुझने के साथ शरीर का तापमान भी कम होता है। गन्ने का रस भी बेहतरीन विकल्प है लेकिन इसे सुबह या शाम के समय ही लें। दोपहर में गन्ने का रस पीने से बचें क्योंकि उस समय यह शरीर को ज्यादा गर्म कर सकता है। शिकंजी नींबू, पानी, मिश्री और थोड़े से नमक से बनती है। यह इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखती है और तुरंत एनर्जी देती है।
इनके अलावा मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और नारियल पानी को डाइट में जरूर शामिल करें। ये सब पानी से भरपूर होते हैं और शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखते हैं। हल्का भोजन लें। दाल-चावल, रोटी और सब्जियों के साथ सलाद जरूर खाएं। भारी तला-भुना भोजन और मसालेदार चीजें पित्त बढ़ाती हैं इसलिए इनसे दूर रहें।
सॉफ्ट ड्रिंक्स और कोल्ड ड्रिंक्स के नुकसान: प्यास बुझाने का गलत तरीका
बाजार के ठंडे सॉफ्ट ड्रिंक्स और कोल्ड ड्रिंक्स प्यास बुझाने का सबसे आसान तरीका लगते हैं लेकिन ये शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। इनमें शुगर और केमिकल्स की मात्रा ज्यादा होती है जो डिहाइड्रेशन बढ़ा देते हैं। आयुर्वेद में इन्हें गर्म तासीर वाला माना जाता है। ये शरीर को अंदर से गर्म करते हैं और लंबे समय में पेट की समस्याएं पैदा करते हैं। इसके बजाय घरेलू पेय पदार्थों का इस्तेमाल करें जो न सिर्फ ठंडक देते हैं बल्कि पोषण भी प्रदान करते हैं।
प्राकृतिक जूस और आयुर्वेदिक शर्बत: सेहत का सुरक्षा कवच
आयुर्वेद में कई जूस और शर्बत गर्मी के लिए खासतौर पर बताए गए हैं। सेब का सिरका पानी के साथ मिलाकर पीने से पाचन ठीक रहता है और शरीर ठंडा रहता है। गिलोय का जूस इम्यूनिटी बढ़ाता है और बुखार जैसी स्थिति में भी राहत देता है। बेल का शर्बत पेट की गर्मी को शांत करता है। चंदनासव और खस का शर्बत तो ठंडक के लिए प्रसिद्ध हैं। खस की जड़ें शरीर के अंदर गर्मी को कम करती हैं। इनका सेवन डॉक्टर की सलाह से करें तो बेहतर परिणाम मिलते हैं।
फटाफट राहत के लिए प्रभावी घरेलू नुस्खे
गर्मी में कई छोटे-छोटे घरेलू उपाय बहुत काम आते हैं। धनिये और पुदीने का जूस बनाकर पीने से पेट ठंडा रहता है और उल्टी-दस्त की शिकायत कम होती है। सब्जियों का हल्का सूप विटामिन्स देता है और हाइड्रेशन बनाए रखता है। भुने प्याज और जीरे का मिश्रण पाचन सुधारता है। नींबू पानी में शहद मिलाकर पीने से एनर्जी मिलती है और शरीर हाइड्रेट रहता है। ये सभी उपाय रोजाना अपनाए जा सकते हैं।
नेचुरल थेरेपी: लू उतारने के पारंपरिक तरीके
केवल खान-पान ही नहीं बल्कि कुछ थेरेपी भी गर्मी में फायदेमंद साबित होती हैं। प्याज के रस से छाती पर मालिश करने से शरीर की गर्मी बाहर निकलती है। इमली के पानी से हाथ-पैर की मालिश रक्त संचार सुधारती है। बर्फ से स्पाइन यानी रीढ़ की हड्डी पर हल्की मालिश करने से तुरंत ठंडक महसूस होती है। ये थेरेपी घर पर आसानी से की जा सकती हैं।
लाइफस्टाइल में बदलाव: तपिश से बचने के अन्य उपाय
गर्मी में कपड़ों का चुनाव भी अहम है। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें जो शरीर को सांस लेने दें। पूरा शरीर ढककर रखें ताकि धूप सीधे न पड़े। पानी की बोतल हमेशा साथ रखें। दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। हल्का व्यायाम सुबह या शाम करें। योगासन जैसे शीतली प्राणायाम और चंद्रभेदी प्राणायाम शरीर को ठंडक देते हैं।
विशेष देखभाल: बच्चों और बुजुर्गों के लिए जरूरी गाइड
बच्चों को गर्मी में ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। उन्हें फल, छाछ और सत्तू ज्यादा दें। खेलते समय बार-बार पानी पिलाएं। बुजुर्गों को डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है इसलिए उनके आहार में पानी वाली चीजें बढ़ाएं। कामकाजी लोगों को ऑफिस में छोटे-छोटे ब्रेक लेकर पानी पीना चाहिए। लंच में हल्का खाना लें।
हाइड्रेशन की अहमियत: मेडिकल साइंस का नजरिया
आधुनिक चिकित्सा भी आयुर्वेद की बातों से सहमत है। शरीर में 70 प्रतिशत पानी होता है। गर्मी में पसीना ज्यादा आने से पानी की कमी हो जाती है। सही पेय पदार्थ न सिर्फ पानी देते हैं बल्कि सोडियम और पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी सप्लाई करते हैं। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट नियंत्रित रहता है। फल और सब्जियां एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं जो सेल डैमेज को रोकती हैं।
Best Food For Summer: अंतिम सावधानी और परामर्श
हीट वेव के मौसम में हर व्यक्ति को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए। अगर लक्षण जैसे चक्कर, उल्टी या बेहोशी दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। दवाइयों का सेवन बिना सलाह के न करें।
इस गर्मी में सही डाइट और आयुर्वेदिक उपायों से न सिर्फ हीट वेव से बचा जा सकता है बल्कि सेहत भी अच्छी रहती है। प्रकृति ने हर मौसम के लिए समाधान दिया है। इन्हें अपनाकर इस अप्रैल की तपती गर्मी को भी आरामदायक बनाया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए सुझाव केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट बदलाव से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। इंडिया टीवी या किसी भी मीडिया संस्थान इन दावों की पुष्टि नहीं करता है।
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