Forensic Science: चेहरे के वो 12 बिंदु जो उम्र भर नहीं बदलते, सड़े गले शवों की पहचान में मिलेगी अब बड़ी मदद

Forensic Science: चेहरे के वो 12 बिंदु जो उम्र भर नहीं बदलते, सड़े-गले शवों की पहचान में फॉरेंसिक टीम को मिलेगी बड़ी मदद

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Forensic Science: इंसान की उम्र ढलती है, चेहरा बदलता है, और वक्त के साथ यादें धुंधली हो जाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके चेहरे पर कुछ ऐसे स्थायी निशान या बिंदु होते हैं जो आपकी आखिरी सांस तक आपका साथ नहीं छोड़ते? फॉरेंसिक विज्ञान की दुनिया में एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है, जो न केवल अपराध सुलझाने में क्रांतिकारी साबित होगी, बल्कि उन परिवारों के लिए भी उम्मीद की किरण है, जो अपनों की तलाश में दर दर भटकते हैं। हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (HBTU) के शोधकर्ताओं ने चेहरे के 12 ऐसे खास बिंदुओं को चिन्हित किया है जो उम्र के किसी भी पड़ाव पर नहीं बदलते।

Forensic Science: सड़े गले शवों की पहचान की बड़ी समस्या का हल

पुलिस और फॉरेंसिक टीमों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण काम होता है उन शवों की शिनाख्त करना जो काफी समय बाद मिलते हैं। अक्सर ऐसी स्थिति में शरीर का चेहरा पहचान के लायक नहीं रहता। ऐसे में अंगूठे के निशान भी काम नहीं आते। इस नई रिसर्च ने इस पहेली को सुलझा दिया है। वैज्ञानिकों ने चेहरे की हड्डियों की संरचना और कुछ खास शारीरिक बिंदुओं को आधार बनाया है। ये बिंदु इतने स्थिर हैं कि अगर चेहरा कुछ हद तक नष्ट भी हो जाए, तब भी हड्डियों की बनावट के जरिए उस व्यक्ति तक पहुंचा जा सकता है। यह तकनीक अब फॉरेंसिक जांच में एक नई दिशा प्रदान कर रही है।

कौन से हैं वो 12 जादुई बिंदु?

दुनिया में हर शख्स की पहचान उसके चेहरे की बनावट से होती है, लेकिन ये 12 बिंदु इसे और भी विशिष्ट बना देते हैं। इनमें मुख्य रूप से दो आंखों के बीच की दूरी, नथुनों का निचला हिस्सा, नाक का ऊपरी हिस्सा यानी नोज ब्रिज, भौंहों के किनारे, होंठों के कोने, जबड़े की संरचना, आंखों के सॉकेट की हड्डी, नाक और आंख के बीच की दूरी, नाक और कान की दूरी, आइरिस का पैटर्न और नाक से ठोड़ी तक की दूरी शामिल है। शोध में पाया गया कि ये बिंदु पूरी तरह से व्यक्ति की ‘आइडेंटिटी’ को सुरक्षित रखते हैं। इनकी नकल करना नामुमकिन है क्योंकि ये हड्डियों की गहराई में स्थित हैं, जिन्हें बदला नहीं जा सकता।

98 फीसदी सटीकता के साथ तकनीक का कमाल

इस शोध की यात्रा साल 2011 में आईआईटी के सहयोग से शुरू हुई थी। ‘फेस रिकग्निशन फॉर द आइडेंटीफिकेशन एंड वैरिफिकेशन ऑफ ए पर्सन’ नामक इस प्रोजेक्ट ने समय के साथ खुद को आधुनिक बनाया है। शुरुआत में जहां 2D छवियों पर काम होता था, वहीं अब 3D इमेजिंग के जरिए इन्हें परखा जा रहा है। 3D तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह चेहरे की हड्डियों की गहराई को भी स्कैन कर सकती है, जिससे नतीजों की सटीकता 98 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित इस रिसर्च का लोहा अब पूरी दुनिया मान रही है।

Forensic Science: क्या कभी नष्ट हो सकते हैं ये निशान?

विज्ञान के सामने भी कुछ सीमाएं हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि ये 12 बिंदु आमतौर पर अटल रहते हैं, लेकिन कुछ असाधारण परिस्थितियों में इनकी स्थिति बिगड़ सकती है। यदि किसी ने कॉस्मेटिक सर्जरी करवाई हो, या फिर आग, तेजाब या किसी भयानक एक्सीडेंट में चेहरे की हड्डियां पूरी तरह से कुचल गई हों, तो इन बिंदुओं को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। ऐसी जटिल स्थितियों के लिए अब वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मल्टी डायमेंशनल तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है।

Forensic Science: AI और भविष्य की राह

अब इस शोध को और अधिक उन्नत बनाने के लिए AI का उपयोग किया जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अगर चेहरे की ऊपरी सतह पूरी तरह नष्ट भी हो गई हो, तब भी AI के जरिए चेहरे की और गहरी परतों को स्कैन किया जा सकेगा। यह तकनीक भविष्य में केवल शवों की पहचान ही नहीं, बल्कि सुरक्षा जांच और अपराधियों को पकड़ने में भी मिल का पत्थर साबित होगी।

यह तकनीक न केवल फॉरेंसिक विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि कानून व्यवस्था के लिए भी एक बहुत बड़ा संबल है। अब सड़े गले शवों की पहचान के लिए लंबी और थकाऊ कानूनी प्रक्रियाओं के बजाय वैज्ञानिक सटीकता का सहारा लिया जा सकेगा। उम्मीद है कि जल्द ही देश भर की फॉरेंसिक लैब में इस नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू होगा, जिससे न केवल समय बचेगा, बल्कि न्याय की राह भी आसान होगी।

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