Stock Market Today: क्रूड ऑयल की तेजी से सेंसेक्स-निफ्टी पर दबाव, फ्लैट शुरुआत के बीच निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर

कच्चे तेल की तेजी से बाजार सुस्त, सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली बढ़त

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Stock Market Today: सोमवार 10 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत काफी सतर्क रही। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों फ्लैट ओपनिंग के साथ कारोबार में उतरे। बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी और वैश्विक संकेतों से कुछ सहारा मिला, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने बड़ी बढ़त पर ब्रेक लगा दिया। ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर के करीब पहुंचने से निवेशकों का मूड प्रभावित हुआ और बाजार में सुस्ती छाई रही।

शुरुआती कारोबार में बीएसई (BSE) का सेंसेक्स करीब 117 अंक की बढ़त के साथ 78,616 के स्तर पर खुला। वहीं एनएसई (NSE) का निफ्टी मामूली बढ़त दर्ज करते हुए 24,581 के आसपास कारोबार कर रहा था। बाजार में मिश्रित रुझान देखने को मिला, जिसमें कुछ शेयरों में खरीदारी तो कुछ में बिकवाली का दबाव बना रहा। कुल मिलाकर निवेशक कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं पर नजर बनाए हुए थे।

Stock Market Today: कच्चे तेल में उछाल और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की अनिश्चितता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 1 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 84.46 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 78.79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। तेल की कीमतों में यह उछाल मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण आया।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां से गुजरने वाले टैंकर वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा ढोते हैं। ईरान और ओमान के बीच नए शिपिंग रूट को लेकर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है। हालांकि ईरान का रुख साफ है कि रास्ता पूरी तरह खोलने के लिए अमेरिका को उसकी शर्तें माननी होंगी। इस अनिश्चितता के चलते तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है, जिससे कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।

कच्चे तेल की महंगाई भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होती है। इससे मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा पैदा होता है और कंपनियों की इनपुट लागत प्रभावित होती है। खासकर ऑटोमोबाइल, विमानन और अन्य ऊर्जा निर्भर क्षेत्रों पर इसका सीधा असर पड़ता है। इसी वजह से बाजार में बड़ी तेजी नहीं आ पा रही है।

एफआईआई की खरीदारी और वैश्विक संकेतों से मिला सहारा

बाजार को कुछ सहारा विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार खरीदारी से मिला। विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में सकारात्मक रुख अपनाए हुए हैं, जिससे घरेलू निवेशकों में भी कुछ विश्वास बना हुआ है। इसके अलावा विदेशी बाजारों से मिल रहे मजबूत संकेतों ने भी बाजार को सपोर्ट दिया।

वैश्विक स्तर पर कई प्रमुख सूचकांकों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला था। अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले संकेतों ने भारतीय निवेशकों को कुछ राहत दी। लेकिन घरेलू स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हो रही तेजी ने उत्साह को सीमित कर दिया। बाजार में अभी भी सतर्कता बनी हुई है और निवेशक आगे के विकास पर नजर रखे हुए हैं।

बाजार के विभिन्न सेक्टरों में मिश्रित रुझान

शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, आईटी और फार्मा जैसे कुछ सेक्टरों में हल्की खरीदारी देखने को मिली। वहीं ऑटो और एनर्जी से जुड़े शेयरों पर दबाव बना रहा। कच्चे तेल की महंगाई का सीधा असर इन सेक्टरों पर पड़ता है, इसलिए निवेशक इनमें सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। मेटल और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में भी सीमित हलचल देखने को मिली।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में बड़ी तेजी की उम्मीद कम है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर कोई स्पष्टता सामने आने पर ही तेल कीमतों में नरमी आ सकती है। तब तक निवेशक छोटे-छोटे मुनाफावसूली और सेलेक्टिव खरीदारी पर फोकस रख सकते हैं।

भू-राजनीतिक तनाव और बाजार पर असर

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान की शर्तों और अमेरिका के रुख के बीच बनी अनिश्चितता वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अगर यह मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो तेल आपूर्ति में बाधा आ सकती है, जिससे कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल सीधे रुपये की विनिमय दर और व्यापार घाटे को प्रभावित करता है। शेयर बाजार भी इन कारकों से प्रभावित होता है। निवेशक इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

निवेशकों के लिए आगे की रणनीति

मौजूदा परिस्थिति में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा स्तरों पर अच्छी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का मौका हो सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने तक बाजार में दिशा साफ नहीं हो सकती।

विश्लेषकों का कहना है कि एफआईआई की निरंतर खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। अगर विदेशी निवेशक अपना रुख बनाए रखते हैं तो घरेलू बाजार को सहारा मिलता रहेगा। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) भी मौके का फायदा उठा सकते हैं। कुल मिलाकर बाजार में सेलेक्टिव अप्रोच अपनाना बेहतर रहेगा।

Stock Market Today: आने वाले दिनों का परिदृश्य

आने वाले दिनों में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर कोई नया विकास बाजार की दिशा तय कर सकता है। अगर ईरान और संबंधित पक्षों के बीच कोई सहमति बनती है तो तेल कीमतों में नरमी आ सकती है, जिससे बाजार को राहत मिलेगी। वहीं अगर तनाव बना रहता है तो कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।

भारतीय शेयर बाजार फिलहाल वैश्विक घटनाक्रमों और घरेलू कारकों दोनों से प्रभावित हो रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी के मौजूदा स्तरों पर स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। निवेशक कॉर्पोरेट नतीजों (Q1 Earnings) और आर्थिक आंकड़ों पर भी नजर रखे हुए हैं। कुल मिलाकर 10 अगस्त का कारोबार सतर्क शुरुआत के साथ आगे बढ़ा और बाजार में सुस्ती का माहौल बना रहा।

कच्चे तेल की तेजी ने बाजार के मूड को प्रभावित जरूर किया, लेकिन एफआईआई की खरीदारी और वैश्विक सकारात्मक संकेतों ने इसे बड़ा नुकसान होने से बचाया। आगे बाजार की दिशा मुख्य रूप से तेल कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को इन कारकों पर नजर रखते हुए अपने निवेश फैसले लेने चाहिए।

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