Stock Market: Nifty सिर्फ 13% गिरा लेकिन आधे शेयर 30% से ज्यादा टूटे, क्या बाजार में आ चुका है Hidden Bear Market?
Nifty की सीमित गिरावट के बीच Nifty 500 के आधे शेयरों में बड़ी गिरावट ने बढ़ाई चिंता
Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में अक्टूबर महीने की शुरुआत भारी उतार-चढ़ाव और बिकवाली के दबाव के साथ हुई है। हेडलाइन इंडेक्स निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स के आंकड़े भले ही सामान्य करेक्शन का संकेत दे रहे हों, लेकिन अंदरूनी तौर पर व्यापक बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) पूरी तरह चरमरा चुकी है। ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के ब्रॉड-मार्केट इंडेक्स निफ्टी 500 में शामिल 500 प्रमुख कंपनियों में से 252 शेयर यानी 50.4 प्रतिशत शेयर अपने जीवनकाल के उच्चतम स्तर (All-Time High) से कम से कम 30 प्रतिशत से लेकर 45 प्रतिशत तक टूट चुके हैं।
इंडेक्स की ऊपरी स्थिरता और व्यक्तिगत शेयरों में आई इस भीषण गिरावट के इसी भारी अंतर को वित्तीय बाजार के विश्लेषक ‘हिडन बियर मार्केट’ (Hidden Bear Market) करार दे रहे हैं। सतह पर सब कुछ शांत दिखने के बावजूद खुदरा और संस्थागत निवेशकों के पोर्टफोलियो में भारी सेंध लग चुकी है, जिसके चलते दलाल स्ट्रीट पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।
Stock Market: निफ्टी में 14% की गिरावट और 22,500 के स्तर पर संघर्ष
इस वर्ष भारतीय इक्विटी बाजारों में जबरदस्त तेजी के दौर में निफ्टी 50 ने 26,325 का ऐतिहासिक ऑल-टाइम हाई बनाया था। हालांकि, उसके बाद से वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी के कारण बाजार में तेज बिकवाली देखी गई। 1 अक्टूबर के शुरुआती सत्र में निफ्टी 22,558.95 के स्तर पर और सेंसेक्स 72,389.51 के आसपास संघर्ष करता नजर आया।
यदि 26,325 के रिकॉर्ड शिखर से वर्तमान स्तर की तुलना की जाए, तो निफ्टी में अब तक लगभग 13 से 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय शब्दावली में यह गिरावट 10 से 19.9 प्रतिशत के दायरे में आती है, जिसे सामान्यतः ‘हेल्दी मार्केट करेक्शन’ माना जाता है। लेकिन यह 14 प्रतिशत की गिरावट बाजार के असली दर्द को छुपा रही है, क्योंकि इंडेक्स में भारी भारांक (Weightage) रखने वाले मुट्ठी भर शेयरों ने सूचकांक को एक सीमा से नीचे जाने से रोक रखा है।
निफ्टी 500 के 50.4% शेयर धराशायी: व्यापक बाजार में गहरा संकट
बाजार की आंतरिक सेहत को मापने के लिए सबसे विश्वसनीय पैमाना निफ्टी 500 को माना जाता है, जो भारतीय शेयर बाजार के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन के 90 प्रतिशत से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इस इंडेक्स का विश्लेषण करने पर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। कुल 500 कंपनियों में से 252 कंपनियों के शेयर अपने पीक से 30 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक नीचे कारोबार कर रहे हैं।
सरल शब्दों में समझें तो निफ्टी 500 में शामिल हर दो में से एक कंपनी का शेयर अपनी शीर्ष कीमत से लगभग एक तिहाई से ज्यादा मूल्य खो चुका है। यदि किसी निवेशक ने किसी शेयर को 100 रुपये के भाव पर खरीदा था, तो उसका मौजूदा बाजार मूल्य 70 रुपये या उससे भी कम रह गया है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि बाजार की कमजोरी किसी खास सेक्टर या चुनिंदा पेनी स्टॉक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि मिडकैप, स्मॉलकैप और यहां तक कि कई स्थापित लार्जकैप कंपनियों तक फैल चुकी है।
क्या होता है ‘हिडन बियर मार्केट’ और इंडेक्स की बनावट का खेल?
‘हिडन बियर मार्केट’ शेयर बाजार की वह विशिष्ट परिस्थिति है जब मुख्य सूचकांक ऊपर से स्थिर या मामूली गिरावट के साथ दिखते हैं, किंतु बाजार के बहुसंख्यक शेयरों में अनौपचारिक बियर मार्केट का तांडव चल रहा होता है। यह विरोधाभास इंडेक्स के ‘मार्केट-कैप वेटेड’ (Market-Cap Weighted) फॉर्मूले के कारण पैदा होता है। निफ्टी 50 जैसे इंडेक्स में शीर्ष 5 से 8 कंपनियों का कुल भारांक 40 प्रतिशत से अधिक होता है।
यदि रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईटीसी या कुछ चुनिंदा बैंक अपेक्षाकृत स्थिर रहते हैं या केवल 5 से 7 प्रतिशत गिरते हैं, तो इंडेक्स ज्यादा नीचे नहीं दिखाई देता। लेकिन इसी दौरान इंडेक्स के निचले पायदान पर मौजूद दर्जनों कंपनियां और मिडकैप-स्मॉलकैप वर्ग के सैकड़ों शेयर 30 से 40 प्रतिशत तक लुढ़क जाते हैं। यही कारण है कि आम निवेशकों का पोर्टफोलियो 25 से 35 प्रतिशत तक लाल निशान में आ चुका है, जबकि टीवी स्क्रीन पर निफ्टी केवल 13 प्रतिशत नीचे दिखाई देता है।
तकनीकी दृष्टिकोण: क्या आधिकारिक बियर मार्केट शुरू हो चुका है?
वैश्विक वित्तीय मानकों और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स (NISM) के अनुसार, किसी भी वित्तीय बाजार या सूचकांक को आधिकारिक रूप से ‘बियर मार्केट’ में तभी घोषित किया जाता है जब वह अपने हालिया उच्चतम स्तर से न्यूनतम 20 प्रतिशत या उससे अधिक टूट जाए। 10 से 19.9 प्रतिशत की गिरावट को केवल नियमित करेक्शन माना जाता है।
यदि निफ्टी 50 के 26,325 के ऑल-टाइम हाई के आधार पर 20 प्रतिशत की कटौती की गणना की जाए, तो इसका बियर मार्केट थ्रेशोल्ड लगभग 21,060 का स्तर निकलकर आता है। इसका अर्थ यह है कि तकनीकी और आधिकारिक तौर पर निफ्टी अभी बियर मार्केट के दायरे से लगभग 1,500 अंक ऊपर है। हालांकि, तकनीकी विश्लेषक मानते हैं कि परिभाषाएं अपनी जगह हैं, किंतु जब 50 प्रतिशत से अधिक व्यक्तिगत शेयर 30 प्रतिशत से अधिक टूट चुके हों, तो जमीनी स्तर पर बियर मार्केट का प्रभाव पहले ही पूरी तरह सक्रिय हो चुका होता है।
ब्लूचिप दिग्गजों पर भी बिकवाली का साया: आईटी और ऑटो बेहाल
यह गिरावट केवल सट्टेबाजी वाले या छोटी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कॉरपोरेट घरानों के शेयरों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार टीसीएस और इंफोसिस अपने सर्वकालिक शिखरों से क्रमशः 35 प्रतिशत और 37 प्रतिशत तक लुढ़क चुकी हैं। वैश्विक तकनीकी खर्च में सुस्ती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रूपांतरण दौर में अनिश्चितताओं ने इस सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया है।
इसी प्रकार एफएमसीजी दिग्गज हिंदुस्तान यूनिलीवर, प्राइवेट बैंकिंग क्षेत्र का दिग्गज एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑटोमोबाइल क्षेत्र की दिग्गज मारुति सुजुकी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र की हैवेल्स इंडिया जैसी कंपनियों में भी अपने पीक से 20 से 30 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। जब देश की शीर्ष 20 कंपनियों के शेयर इस कदर दबाव में आते हैं, तो यह सीधे तौर पर कॉरपोरेट अर्निंग्स और आर्थिक वृद्धि की गति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विदेशी निवेशकों (FIIs) की ऐतिहासिक पूंजी निकासी
बाजार में इस व्यापक गिरावट की सबसे मुख्य धुरी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की आक्रामक और निरंतर बिकवाली रही है। विदेशी फंड मैनेजर्स भारतीय इक्विटी बाजारों से रिकॉर्ड गति से पूंजी बाहर निकाल रहे हैं। अकेले 30 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 1.06 अरब डॉलर (करीब 8,800 करोड़ रुपये) के शेयर बेचे।
बीते पांच कारोबारी सत्रों में यह बिकवाली 3.6 अरब डॉलर के विशाल आंकड़े को पार कर गई है। वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों द्वारा की गई कुल बिकवाली ऐतिहासिक स्तरों को छू रही है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) और खुदरा एसआईपी (SIP) का प्रवाह बाजार को तरलता का सहारा दे रहा है, लेकिन विदेशी पूंजी की चौतरफा निकासी ने लार्जकैप और मिडकैप दोनों श्रेणियों के शेयरों के मूल्यांकन को बुरी तरह संकुचित कर दिया है।
कच्चा तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और 200-Day SMA का दबाव
बाजार पर चौतरफा दबाव बनाने वाले अन्य प्रमुख कारकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की अस्थिरता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर शामिल है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड के भाव ऊंचे बने हुए हैं, जो भारत के चालू खाता घाटे और राजकोषीय गणित के लिए लगातार जोखिम पैदा कर रहे हैं। वहीं, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों पर बने रहने से वैश्विक पूंजी जोखिम भरे उभरते बाजारों से निकलकर सुरक्षित अमेरिकी परिसंपत्तियों की ओर भाग रही है।
तकनीकी मोर्चे पर, निफ्टी 500 के 60 प्रतिशत से अधिक शेयर अपने 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (200-Day SMA) से नीचे फिसल चुके हैं। तकनीकी विश्लेषण में किसी भी शेयर का 200-दिवसीय औसत से नीचे आना उसके दीर्घकालिक बुलिश ट्रेंड के समाप्त होने और बियरिश चक्र में प्रवेश करने का स्पष्ट संकेत माना जाता है। जब तक अधिकांश शेयर इस महत्वपूर्ण औसत के ऊपर दोबारा बेस नहीं बना लेते, तब तक बाजार में किसी भी उछाल को केवल ‘डेड कैट बाउंस’ या शॉर्ट-कवरिंग रैली के रूप में ही देखा जाएगा।
Stock Market: निवेशकों के लिए सतर्कता और गुणवत्ता पर टिकने की घड़ी
भारतीय शेयर बाजार की वर्तमान स्थिति यह स्पष्ट संदेश देती है कि केवल हेडलाइन इंडेक्स देखकर बाजार की वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। निफ्टी में 13-14 प्रतिशत की गिरावट के पीछे 252 से अधिक शेयरों का 30 प्रतिशत से ज्यादा टूटना एक निर्विवाद ‘हिडन बियर मार्केट’ को प्रमाणित करता है।
आगामी दिनों में कंपनियों की दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणाम, रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और वैश्विक ऊर्जा संकट की दिशा ही बाजार का अगला मार्ग प्रशस्त करेगी। खुदरा निवेशकों के लिए यह समय घबराकर घाटे में शेयर बेचने का नहीं, बल्कि अपने पोर्टफोलियो की पुनर्समीक्षा करने का है। कमजोर फंडामेंटल वाली कंपनियों से दूरी बनाकर मजबूत कैश फ्लो, कम कर्ज और आकर्षक मूल्यांकन वाली गुणवत्तापूर्ण कंपनियों में चरणबद्ध रूप से बने रहना ही इस गुप्त मंदी से पार पाने की सबसे सुरक्षित रणनीति सिद्ध होगी।
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