Share Market 1 October 2026: सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में, जानें गिरावट की वजह
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ग्लोबल दबाव के बीच बाजार कमजोर, ऑटो-मेटल शेयरों पर दबाव
Share Market 1 October 2026: अक्टूबर महीने के पहले कारोबारी दिन भारतीय घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत सतर्कता और बिकवाली के दबाव के साथ हुई। गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को सुबह के सत्र में दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक—सेंसेक्स और निफ्टी 50—गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करते दिखे। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) से मिले कमजोर संकेतों के बाद बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली का माहौल बन गया, जिसने निवेशकों की धारणा को रक्षात्मक बना दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की मजबूती, डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता का सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर दिखाई दिया।
शुरुआती कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स लगभग 156 अंकों की कमजोरी के साथ 72,323 के स्तर के पास आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 करीब 76 अंक टूटकर 22,545 के आसपास संघर्ष करता दिखा। व्यापक बाजार में भी नकारात्मक रुझान हावी रहा, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सुस्ती दर्ज की गई। बाजार में गिरने वाले शेयरों की संख्या चढ़ने वाले शेयरों के मुकाबले अधिक रही, जिससे मार्केट ब्रेड्थ स्पष्ट रूप से बिकवाली के पक्ष में झुका नजर आया।
Share Market 1 October 2026: सेंसेक्स और निफ्टी के प्रमुख स्तर
सुबह के शुरुआती दौर में सेंसेक्स ने 72,187 से 72,450 के सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव दिखाया। निफ्टी 50 भी मनोवैज्ञानिक स्तर 22,500 के आसपास अपनी स्थिति बचाने की जद्दोजहद में जुटा रहा। बाजार विश्लेषकों के अनुसार तकनीकी चार्ट पर निफ्टी के लिए 22,500 से 22,550 का दायरा अत्यंत महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है और यह स्तर टूटता है, तो सूचकांक में और गहरी गिरावट का जोखिम बन सकता है। वहीं ऊपरी स्तरों पर 22,800 का स्तर मजबूत प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) का कार्य कर रहा है, जिसे पार करने के बाद ही बाजार में नई तेजी की उम्मीद की जा सकती है।
बुधवार के कारोबारी सत्र में भी बाजार लगातार तीसरे दिन गिरावट पर बंद हुआ था, जहां सेंसेक्स 48.78 अंक गिरकर 72,480.29 पर और निफ्टी 95.75 अंक फिसलकर 22,620.45 पर बंद हुआ था। बीते सितंबर महीने में सेंसेक्स में लगभग 5.8 प्रतिशत और निफ्टी में करीब 6 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जो पिछले कई महीनों में भारतीय बाजार का सबसे कमजोर मासिक प्रदर्शन रहा है।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और वैश्विक दबाव
बाजार में जारी इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार से लगातार पूंजी की निकासी करना है। विदेशी निवेशक पिछले कई सत्रों से शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं और बुधवार को भी उन्होंने दस हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) लगातार लिवाली कर बाजार को सहारा देने का प्रयास कर रहे हैं, किंतु विदेशी बिकवाली की आक्रामकता घरेलू तरलता पर भारी पड़ती दिख रही है।
वैश्विक मोर्चे पर पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल के भाव ऊंचे स्तरों पर बने हुए हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू मुद्रास्फीति और कंपनियों के परिचालन मार्जिन पर सीधा नकारात्मक असर डालती हैं। इसके अतिरिक्त अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर रुख को लेकर अनिश्चितता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की मजबूती ने भी वैश्विक इक्विटी बाजारों के आकर्षण को कम किया है।
सेक्टोरल रुझान: आईटी और चुनिंदा बैंकों में सहारा, ऑटो व मेटल में तेज गिरावट
गुरुवार के शुरुआती कारोबार में सेक्टोरल आधार पर मिश्रित रुझान देखने को मिला। आईटी इंडेक्स ने बाजार को नीचे गिरने से बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। टीसीएस, इन्फोसिस और एचसीएल टेक जैसे प्रमुख दिग्गज आईटी शेयरों में खरीदारी लौटने से इस सेक्टर में मजबूती दर्ज की गई। निजी बैंकिंग क्षेत्र में भी अपेक्षाकृत स्थिरता रही, जहां शीर्ष प्रबंधन से जुड़ी सकारात्मक खबरों और वित्तीय मजबूती के चलते कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में अच्छी बढ़त देखी गई।
इसके विपरीत ऑटोमोबाइल सेक्टर आज के कारोबार में सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ। कई अग्रणी ऑटो कंपनियों के शेयरों में दो प्रतिशत से अधिक की तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण आगामी त्योहारी सीजन से पूर्व इन्वेंट्री दबाव और मार्जिन को लेकर बनी चिंताएं रहीं। इसके साथ ही मेटल, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया और फार्मास्युटिकल सेक्टर के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे सूचकांकों की रिकवरी सीमित हो गई।
तीन दिन का लंबा वीकेंड और तकनीकी परिदृश्य
कारोबारियों और निवेशकों के लिए आज का दिन अपनी रणनीतियों को रीसेट करने का है, क्योंकि 2 अक्टूबर 2026 को महात्मा गांधी जयंती के राष्ट्रीय पर्व के उपलक्ष्य में भारतीय शेयर बाजार बंद रहेगा। शुक्रवार के अवकाश के बाद शनिवार और रविवार का नियमित साप्ताहिक अवकाश रहेगा, जिसके चलते बाजार को तीन दिनों का लंबा अंतराल मिलेगा। ऐसे लंबे वीकेंड से पहले अक्सर बड़े संस्थागत ट्रेडर अपनी ओवरनाइट पोजीशन को हल्का करने और जोखिम से बचने के लिए मुनाफावसूली करते हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर की तीव्र बिकवाली के बाद कई सेक्टर्स ओवरसोल्ड जोन में पहुंच चुके हैं, जिससे किसी भी सकारात्मक वैश्विक संकेत पर शॉर्ट-कवरिंग रैली देखने को मिल सकती है। हालांकि एक स्थायी और मजबूत सुधार के लिए विदेशी निवेशकों की वापसी, रुपये में स्थिरता और कच्चे तेल के दामों में नरमी बेहद आवश्यक होगी। आगामी सप्ताह में आने वाले घरेलू कंपनियों के दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणाम भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
Share Market 1 October 2026: निवेशकों के लिए सतर्कता और चयन का समय
अक्टूबर महीने की शुरुआत बाजार में सतर्कता और दबाव के साथ हुई है, जो यह स्पष्ट करती है कि बाजार में अनिश्चितता अभी समाप्त नहीं हुई है। विश्लेषकों की राय है कि खुदरा निवेशकों को इस अस्थिरता में घबराकर बिकवाली करने के बजाय गुणवत्तापूर्ण और मजबूत फंडामेंटल वाली लार्जकैप कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा करेक्शन चुनिंदा आईटी और निजी बैंकिंग शेयरों में चरणबद्ध निवेश का अवसर प्रदान कर सकता है। फिलहाल वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और कच्चे तेल के रुख पर नजर रखते हुए प्रतीक्षा करने की रणनीति ही सर्वाधिक उपयुक्त मानी जा रही है।
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