Bihar Flood: 7 जिलों में पौने तीन लाख लोग प्रभावित, राहत के लिए वायुसेना से मांगी मदद
नेपाल में भारी बारिश से गंडक समेत कई नदियां उफान पर, तटबंध टूटने से गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
Bihar Flood: बिहार में मानसून की विदाई की बेला में उत्तर बिहार का एक बड़ा भूभाग एक बार फिर जलप्रलय की चपेट में आ गया है। पड़ोसी देश नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों और गंडक नदी बेसिन में हुई भारी बारिश के बाद नेपाल से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी ने सीमावर्ती और मैदानी इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। राज्य के सात प्रमुख जिलों—पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सुपौल—में बाढ़ का पानी तेजी से रिहायशी बस्तियों और कृषि भूमि में प्रवेश कर गया है।
ताजा सरकारी और प्रशासनिक आकलनों के अनुसार, इन सात जिलों की लगभग पौने तीन लाख की आबादी बाढ़ की विभीषिका से गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी है। दर्जनों गांव मुख्य सड़कों से पूरी तरह कट गए हैं, जिससे धरातल पर राहत सामग्री पहुंचाना अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के साथ-साथ जलमग्न और अगम्य क्षेत्रों में राहत सामग्री गिराने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) से तत्काल हवाई सहायता मांगी है।
Bihar Flood: नेपाल में भारी बारिश बनी तबाही का सबब, उफान पर नदियां
उत्तर बिहार में आई इस आकस्मिक बाढ़ का मुख्य कारण नेपाल के हिमालयी जलग्रहण क्षेत्रों में बीते दिनों हुई मूसलाधार बारिश है। गंडक, कोसी, बागमती और बूढ़ी गंडक जैसी प्रमुख सदानीरा नदियों का उद्गम और बड़ा बेसिन नेपाल में स्थित होने के कारण वहां की बारिश का सीधा प्रभाव बिहार के तराई क्षेत्रों पर पड़ता है। नेपाल के गंडक बेसिन में अत्यधिक जलप्रवाह दर्ज किए जाने के बाद वाल्मीकिनगर बराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया, जिससे डाउनस्ट्रीम के जिलों में जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया।
लगातार बढ़ते दबाव और पानी के तेज बहाव ने सुरक्षात्मक तटबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। पश्चिम चंपारण जिले के बगहा क्षेत्र में चंपारण तटबंध में कई स्थानों पर भीषण कटाव देखा गया और कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। इसी तरह पूर्वी चंपारण के अरेराज अंचल और गोपालगंज के शीतलपुर-बंजारी क्षेत्र में सुरक्षा तटबंधों के टूटने से बाढ़ का पानी अनियंत्रित होकर दर्जनों रिहायशी गांवों में घुस गया, जिससे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
सात जिलों में जलप्रलय: पौने तीन लाख आबादी पर सीधा संकट
बाढ़ के इस ताजा दौर ने उत्तर बिहार के सात जिलों में भारी जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। गोपालगंज और सारण जिलों में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। सारण और मुजफ्फरपुर के कई ग्रामीण इलाकों में पानी राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) और मुख्य राज्य मार्गों के ऊपर से बह रहा है, जिसके चलते भारी वाहनों का आवागमन ठप पड़ गया है और कई प्रखंड मुख्यालयों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है।
दरभंगा और सुपौल जिलों में भी नदियों के उफान और जलजमाव के कारण निचले इलाकों में स्थित बस्तियां पानी से घिर गई हैं। प्रशासन द्वारा जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, इन सात जिलों की लगभग 2.75 लाख आबादी वर्तमान में बाढ़ के पानी से घिरी हुई है। खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसलें पूरी तरह डूब चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण, वायुसेना से मांगी एयरड्रॉपिंग मदद
बाढ़ की भयावहता का प्रत्यक्ष जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उत्तर बिहार के अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक हवाई सर्वेक्षण किया। हवाई निरीक्षण के दौरान उन्होंने जलमग्न गांवों, टूटे तटबंधों और अवरुद्ध सड़कों की स्थिति का बारीकी से मुआयना किया। मुख्यमंत्री ने पटना लौटते ही आपदा प्रबंधन विभाग, जल संसाधन विभाग और संबंधित जिलाधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरतने के कड़े निर्देश दिए।
चूंकि कई सुदूरवर्ती पंचायतें और टोले चारों तरफ से कई फीट गहरे पानी से घिर चुके हैं और वहां नावों का पहुंचना भी कठिन और धीमा साबित हो रहा है, इसलिए मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना से संपर्क साधते हुए विशेष हेलिकॉप्टरों की तैनाती की मांग की है। वायुसेना के हेलिकॉप्टरों के माध्यम से इन जलमग्न बस्तियों में तैयार भोजन के पैकेट, सुरक्षित पेयजल की बोतलें, ओआरएस, बेबी फूड और आवश्यक एंटी-वेनम व दवाइयों की एयरड्रॉपिंग कराई जाएगी ताकि कोई भी परिवार भुखमरी या बीमारी की चपेट में न आए।
एसडीआरएफ और एनडीआरएफ का महा-अभियान, नावों से रेस्क्यू जारी
जमीनी स्तर पर राहत और बचाव कार्यों के लिए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की कई दर्जन अतिरिक्त कंपनियों को संवेदनशील जिलों में झोंक दिया गया है। मुजफ्फरपुर, सारण और गोपालगंज में प्रशासन ने निजी और सरकारी स्तर पर सैकड़ों मोटरबोट्स और देसी नावों को अधिग्रहित कर बचाव अभियान में लगाया है।
बाढ़ के पानी में फंसे बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और मवेशियों को सुरक्षित निकालकर ऊंचे स्थानों, राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारों और प्राथमिक विद्यालयों में बनाए गए अस्थायी राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल टीमों को तैनात किया है ताकि दूषित पानी के कारण फैलने वाले डायरिया, हैजा और अन्य जलजनित संक्रामक रोगों की रोकथाम की जा सके। इसके साथ ही प्रभावित पंचायतों में सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) शुरू की गई हैं, जहां विस्थापित लोगों को दोनों समय गर्म और ताजा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
टूटे तटबंधों की युद्धस्तर पर मरम्मत और लगातार मॉनिटरिंग
बाढ़ के पानी के फैलाव को सीमित करने के लिए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंताओं और तकनीकी कर्मियों का दल प्रभावित स्थलों पर कैंप कर रहा है। जिन स्थानों पर तटबंधों में दरारें आई हैं या कटाव हुआ है, वहां बालू की बोरियों (सैंडबैग्स), बोल्डर क्रेटिंग और जियो-बैग्स की मदद से रात-दिन फ्लड फाइटिंग कार्य किया जा रहा है। संवेदनशील तटबंधों पर 24 घंटे लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है ताकि किसी नए कटाव की स्थिति में समय रहते ग्रामीणों को अलर्ट किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि बिहार में सितंबर के महीने में भी गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण कई जिले जलमग्न हुए थे, जिसका जायजा लेने स्वयं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। अब मानसून की अंतिम बारिश के दौरान गंडक बेसिन का यह उफान राज्य प्रशासन के लिए एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा बन गया है।
Bihar Flood: आने वाले 48 घंटे बेहद संवेदनशील
उत्तर बिहार के सात जिलों में आई इस ताजा बाढ़ ने एक बार फिर राज्य की प्राकृतिक संवेदनशीलता और नेपाल से आने वाले अनियंत्रित जलप्रवाह की समस्या को उजागर कर दिया है। पौने तीन लाख से अधिक विस्थापित और प्रभावित नागरिकों तक त्वरित भोजन, शुद्ध जल और चिकित्सा सहायता पहुंचाना इस समय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
आगामी 48 घंटे राहत अभियानों और जलस्तर की निगरानी के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में वर्षा की तीव्रता में कमी आती है और बराजों से पानी का डिस्चार्ज घटता है, तभी नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज होगी और स्थिति में क्रमिक सुधार की संभावना बनेगी। तब तक प्रशासन, एसडीआरएफ और वायुसेना का यह संयुक्त प्रयास ही संकटग्रस्त जनता के लिए जीवनरेखा का काम करेगा।
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