Modi Cabinet Reshuffle: युवा चेहरों और महिलाओं को मिल सकता है मौका, 12 से अधिक खाली पदों को भरने की कवायद तेज
12 से अधिक खाली पद भरने की चर्चा, युवा और महिला चेहरों को मिल सकता है मौका
Modi Cabinet Reshuffle: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संगठनात्मक ढांचे में हुए हालिया बदलावों और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नई टीमों के गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में विस्तार और व्यापक फेरबदल की अटकलें राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार आगामी महीनों में अपने तीसरे कार्यकाल के पहले बड़े कैबिनेट विस्तार की तैयारी कर रही है। इस फेरबदल का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता को गति देना, कई मंत्रियों पर से दोहरे विभागों का बोझ कम करना और युवा पीढ़ी व महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देकर सरकार की छवि को और अधिक गतिशील बनाना है।
वर्तमान समय में संवैधानिक प्रावधानों के तहत मंत्रिपरिषद में 12 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। इसके अतिरिक्त हाल ही में संगठन में नई जिम्मेदारियां पाने वाले नेताओं, राज्यसभा से निवृत्त हो रहे मंत्रियों और प्रदर्शन के आधार पर तय होने वाले मानकों के चलते रिक्तियों की यह संख्या और अधिक बढ़ सकती है। आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों तथा वर्ष 2029 के आम चुनावों की दीर्घकालिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए यह पुनर्गठन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Modi Cabinet Reshuffle: 12 खाली पद और 70 पार के वरिष्ठ मंत्रियों का संतुलन
संविधान के अनुच्छेद 75(1ए) के अनुसार, लोकसभा की कुल सदस्य संख्या का अधिकतम 15 प्रतिशत ही मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है, जिसके तहत केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री सहित अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार में 29 कैबिनेट मंत्री, 5 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 34 राज्य मंत्री शामिल हैं, जिससे कुल संख्या प्रधानमंत्री समेत 69 पर पहुंचती है। इस संवैधानिक व्यवस्था के आधार पर मंत्रिपरिषद में वर्तमान में कम से कम 12 पद सीधे तौर पर रिक्त हैं।
मंत्रिमंडल में आयु के मौजूदा संतुलन की बात करें तो 65 प्रतिशत से अधिक मंत्री 51 से 70 वर्ष के आयु वर्ग में आते हैं, जबकि 31 से 50 वर्ष वाले युवा नेताओं की हिस्सेदारी मात्र 24 प्रतिशत के आसपास है। वर्तमान सरकार में 70 वर्ष से अधिक उम्र के 12 वरिष्ठ कैबिनेट और राज्य मंत्री अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें सबसे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री 81 वर्षीय जीतन राम मांझी हैं और सबसे युवा 38 वर्षीय के. राम मोहन नायडू हैं। शिक्षा, अल्पसंख्यक कल्याण और रेलवे जैसे मंत्रालयों में पूर्व में हुए इस्तीफों के बाद से यह पद खाली चल रहे हैं, जिन्हें अब नए व ऊर्जावान चेहरों से भरे जाने की प्रबल संभावना है।
‘एक व्यक्ति, एक पद’ का सिद्धांत और संगठन में गए मंत्रियों की जगह नए नाम
भाजपा की स्थापित संगठनात्मक परंपरा ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत भी मंत्रिमंडल में कई बड़े बदलाव तय माने जा रहे हैं। हाल ही में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को संगठन में पार्टी कोषाध्यक्ष का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है।
इसके साथ ही पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। ऐसे में संगठनात्मक जिम्मेदारियों और संसदीय कार्यकाल के समीकरणों को देखते हुए इन पदों पर नए नेताओं को अवसर दिया जा सकता है। पार्टी हाईकमान प्रदर्शन के आधार पर तैयार की गई गोपनीय रिपोर्ट कार्ड के आधार पर भी कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल या उन्हें पूर्णकालिक संगठनात्मक कार्यों में लगाने पर विचार कर रहा है।
14 शीर्ष मंत्रियों के पास दोहरे प्रभार: प्रशासनिक बोझ हल्का करने की तैयारी
वर्तमान मोदी कैबिनेट में लगभग 14 प्रमुख मंत्रियों के पास एक से अधिक भारी-भरकम मंत्रालयों का कार्यभार है। इनमें गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ऊर्जा व शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल, भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी, पीयूष गोयल, ललन सिंह, प्रल्हाद जोशी, अश्विनी वैष्णव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, गजेंद्र सिंह शेखावत, किरेन रिजिजू, मनसुख मांडविया और जी. किशन रेड्डी शामिल हैं।
कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का प्रभार एक ही मंत्री के पास होने के कारण नीतिगत निर्णयों और विभागीय समीक्षाओं पर अतिरिक्त दबाव रहता है। इस संभावित फेरबदल के माध्यम से सरकार इन अतिरिक्त विभागों को नए स्वतंत्र प्रभार या राज्य मंत्रियों को सौंपकर कार्यभार को संतुलित करना चाहती है, जिससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और अंतर-विभागीय समन्वय में और तेजी लाई जा सके।
चुनावी राज्यों और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए युवा चेहरों की एंट्री
कैबिनेट विस्तार में उन राज्यों को विशेष प्राथमिकता मिलने की संभावना है जहां आगामी वर्षों में विधानसभा चुनाव होने हैं अथवा जहां पार्टी को नए सामाजिक व क्षेत्रीय समीकरण साधने हैं। उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों से नए व युवा सांसदों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की मजबूत चर्चा है।
महाराष्ट्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दल शिवसेना के बढ़ते प्रभाव और सांसदों की संख्या को देखते हुए श्रीकांत शिंदे जैसे युवा चेहरों को केंद्र में भागीदारी मिल सकती है। इसके अलावा पंजाब और गैर-भाजपा शासित राज्यों में संगठन को मजबूती देने के लिए राज्यसभा के सक्रिय सदस्यों और अन्य दलों से आए वरिष्ठ नेताओं को भी प्रतिनिधित्व दिए जाने की अटकलें हैं।
Modi Cabinet Reshuffle: युवा संवाद, महिला सशक्तिकरण और 2029 की दीर्घकालिक दिशा
देश में युवा आकांक्षाओं और डिजिटल संवाद के बदलते दौर के बीच केंद्र सरकार अपनी मंत्रिपरिषद में युवाओं और महिला नेतृत्व की संख्या बढ़ाने को प्राथमिकता दे रही है। हाल के दिनों में युवाओं से जुड़े मुद्दों और रोजगार के अवसरों पर सरकार के बढ़ते फोकस के मद्देनजर नए मंत्रिमंडल में आधुनिक सोच, तकनीकी समझ और जमीनी पकड़ रखने वाले युवा सांसदों को स्वतंत्र प्रभार या राज्य मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है।
यह फेरबदल केवल रिक्त पदों को भरने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि यह वर्ष 2029 के आम चुनावों और आने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए एनडीए गठबंधन को और अधिक सर्वसमावेशी व मजबूत बनाने का एक स्पष्ट राजनीतिक और प्रशासनिक रोडमैप पेश करेगा। आधिकारिक स्तर पर यद्यपि इस पर अभी कोई औपचारिक तिथि तय नहीं की गई है, किंतु सत्ता के शीर्ष गलियारों में बैठकों का दौर जारी है।
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