US Canada Trade War: मार्क कार्नी सरकार ने 700 से अधिक अमेरिकी उत्पादों पर लगाया 50% तक जवाबी टैरिफ, ट्रंप ने दी ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलने की चेतावनी

कनाडा ने 700 से अधिक अमेरिकी उत्पादों पर 50% तक जवाबी टैरिफ का ऐलान किया

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US Canada Trade War: उत्तरी अमेरिका के दो सबसे बड़े रणनीतिक व आर्थिक साझेदार अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चला आ रहा व्यापारिक गतिरोध अब एक पूर्ण और आक्रामक ‘ट्रेड वॉर’ में तब्दील हो चुका है। वाशिंगटन में द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के अचानक विफल होने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा के 20 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों पर 50 प्रतिशत भारी शुल्क लगाने के फैसले के विरोध में कनाडा सरकार ने कड़ा जवाबी कदम उठाया है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार को अमेरिका के 700 से अधिक उत्पादों पर 15 से 50 प्रतिशत तक का जवाबी (काउंटर) टैरिफ लगाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
कनाडा का यह नया टैरिफ ढांचा 8 सितंबर से प्रभावी होगा। दोनों देशों के बीच दशकों पुराने मुक्त व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क पर इस निर्णय का गहरा असर पड़ने की संभावना है। कनाडाई वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिकी शुल्कों का जवाब ‘डॉलर के बदले डॉलर’ के आधार पर दे रहे हैं। इस कूटनीतिक और आर्थिक टकराव ने न केवल द्विपक्षीय ऑटोमोबाइल, स्टील और कृषि क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा कर दी है, बल्कि वैश्विक शेयर और कमोडिटी बाजारों में भी हलचल तेज कर दी है।

US Canada Trade War: 8 सितंबर से 700 से अधिक अमेरिकी वस्तुओं पर 50% तक आयात शुल्क

कनाडा सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अमेरिकी स्टील और एल्युमीनियम उत्पादों पर पूर्व में लागू 25 प्रतिशत शुल्क को बढ़ाकर दोगुना यानी 50 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त लगभग 700 अन्य अमेरिकी उपभोक्ता और औद्योगिक वस्तुओं पर 15%, 25% और 50% की विभिन्न श्रेणियों में प्रतिशोधात्मक शुल्क लगाए गए हैं। इन उत्पादों में प्रमुख रूप से डेयरी उत्पाद (पनीर और दूध), समुद्री मछली, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, मोटरसाइकिल, प्लाईवुड, प्लास्टिक और टूल्स शामिल हैं।
कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने इस फैसले का विवरण साझा करते हुए कहा कि यह जवाबी कदम अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित होने वाले कनाडाई उद्योगों और श्रमिकों को सुरक्षा प्रदान करने तथा घरेलू बाजार में उन्हें निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर देने के लिए उठाया गया है। इसके साथ ही ओटावा सरकार ने प्रभावित होने वाली कनाडाई कंपनियों और कामगारों की सहायता के लिए 5.4 अरब डॉलर के विशेष आर्थिक राहत पैकेज की भी घोषणा की है।

वाशिंगटन में द्विपक्षीय वार्ता का अचानक टूटना और ट्रंप का कड़ा अल्टीमेटम

इस व्यापार युद्ध की ताजा पृष्ठभूमि बीते शुक्रवार को वाशिंगटन में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के अप्रत्याशित रूप से टूटने से तैयार हुई। दोनों देशों के वार्ताकार नए व्यापारिक समझौते के करीब पहुंच रहे थे, किंतु अंतिम क्षणों में अमेरिकी पक्ष द्वारा रखी गई नई शर्तों और मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। वार्ता टूटने के ठीक अगले दिन शनिवार को ट्रंप प्रशासन ने कनाडा से आयात होने वाले व्हिस्की, डेयरी, खिलौने, कपड़े और खेल सामग्री समेत 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लागू कर दिया था।
वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडाई नेतृत्व को खुली चेतावनी देते हुए कहा था कि उन्हें अमेरिका की व्यापार नीतियों के अनुरूप ढलना होगा। ट्रंप ने घोषणा की कि यदि कनाडा ने अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया, तो 1 जनवरी 2027 से कनाडा से आयात होने वाले सभी वाहनों, ट्रकों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का दो-टूक जवाब: ‘कनाडा को अमेरिका की शाखा या अधीनस्थ नहीं बनने देंगे’

अमेरिकी दबाव के सामने झुकने से इनकार करते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बेहद तीखा और स्पष्ट रुख अपनाया। कार्नी ने राष्ट्रीय संबोधन में कहा कि बातचीत की मेज पर अमेरिका का रवैया कनाडा को अपने अधीन (Subsidiary) समझने जैसा था, जिसे कोई भी संप्रभु राष्ट्र स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान यह साफ हो गया था कि अमेरिकी पक्ष कनाडा के प्रमुख विनिर्माण उद्योगों—विशेष रूप से ऑटो, स्टील और एल्युमीनियम क्षेत्र—को कमजोर करना चाहता था।
मार्क कार्नी ने कड़े शब्दों में कहा कि जब किसी देश पर अनुचित आर्थिक हमला होता है, तो वह युद्ध की स्थिति होती है और कनाडा अपने हितों की रक्षा के लिए पूरी ताकत से पलटवार करेगा। उन्होंने कहा कि कनाडाई उद्योग और कामगार किसी भी एकतरफा दबाव के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। कार्नी के इस राष्ट्रहित से जुड़े बेबाक रुख को कनाडा के राजनीतिक दलों, मजदूर यूनियनों और स्थानीय व्यापारिक संगठनों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

ट्रंप का सोशल मीडिया पर हमला: 60 अरब डॉलर के व्यापार घाटे का आरोप और ‘लेक ओंटारियो’ पर विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कई पोस्ट लिखकर कनाडा की व्यापार नीतियों पर गंभीर आरोप लगाए। ट्रंप ने दावा किया कि कनाडा दशकों से अमेरिका को व्यापारिक रूप से नुकसान पहुंचा रहा है और कनाडाई उच्च शुल्कों के कारण अमेरिकी किसानों व उत्पादकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। ट्रंप ने दोनों देशों के बीच 60 अरब डॉलर के व्यापार घाटे का हवाला देते हुए कहा कि कनाडा को यह समझना चाहिए कि वह अमेरिका का कोई 51वां राज्य नहीं है।
विवाद को और गहरा करते हुए ट्रंप ने दोनों देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित प्रसिद्ध ‘लेक ओंटारियो’ (Lake Ontario) का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ (Lake America) करने पर विचार करने की बात कही। ट्रंप ने तर्क दिया कि चूंकि भविष्य में अमेरिका ओंटारियो प्रांत के साथ व्यापारिक संबंधों को सीमित करने जा रहा है, इसलिए इस भौगोलिक जल निकाय का नाम बदला जाना चाहिए। कनाडाई पक्ष ने ट्रंप के इस बयान को हास्यास्पद, अनावश्यक और कूटनीतिक मर्यादाओं के प्रतिकूल करार दिया है।

ऑटोमोबाइल, स्टील और ऊर्जा क्षेत्र पर मंडराया गहरा संकट: आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने का डर

अमेरिका और कनाडा के बीच सालाना 700 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार होता है। दोनों देशों का ऑटोमोबाइल सेक्टर एक-दूसरे की आपूर्ति श्रृंखला पर गहराई से निर्भर है, जहां किसी कार के पुर्जे अंतिम असेंबली से पहले कई बार सीमा पार आते-जाते हैं। 50 प्रतिशत तक के भारी शुल्कों के कारण वाहनों की उत्पादन लागत में भारी उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है, जिसका सीधा भार अमेरिकी और कनाडाई उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
इसके साथ ही अमेरिकी किसान अपनी फसलों के लिए जरूरी पोटाश उर्वरक की लगभग 80 प्रतिशत आपूर्ति के लिए कनाडाई निर्यातकों पर निर्भर हैं। स्टील और एल्युमीनियम पर लगे शुल्कों से दोनों देशों के बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स महंगे हो सकते हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि यह टैरिफ युद्ध लंबा खिंचता है, तो उत्तरी अमेरिका में महंगाई दर बढ़ सकती है और लाखों औद्योगिक नौकरियों पर सीधा खतरा मंडरा सकता है।

US Canada Trade War: 8 सितंबर की समय सीमा और संभावित कूटनीतिक रास्ते

कनाडा द्वारा घोषित जवाबी टैरिफ 8 सितंबर से प्रभावी होने हैं, जिसका अर्थ है कि दोनों पक्षों के पास सीधी आर्थिक तनातनी को टालने और नए सिरे से वार्ता की मेज पर लौटने के लिए लगभग दो सप्ताह का समय शेष है। हालांकि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की आक्रामक बयानबाजी को देखते हुए तात्कालिक समझौते की संभावनाएं फिलहाल बेहद क्षीण नजर आ रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि उत्तरी अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता (USMCA) पहले से ही तनाव के दौर से गुजर रहा है। यदि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और उसके सबसे करीबी पड़ोसी के बीच यह टैरिफ वार नहीं थमा, तो इसका असर वैश्विक व्यापार नियमों और पश्चिमी देशों के रणनीतिक गठबंधनों पर भी पड़ना तय है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश आर्थिक नुकसान को भांपते हुए कूटनीतिक समाधान तलाशते हैं या फिर यह व्यापार युद्ध और अधिक विकराल रूप धारण करेगा।

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