Deoria Soldier: ‘देश सेवा करूं या परिवार की रक्षा, न्याय नहीं मिला तो खुद को मार लूंगा गोली’; पुलिस ने बताया जमीनी विवाद का पूरा सच

LOC पर तैनात जवान ने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, पुलिस ने विवाद की जांच शुरू की

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Deoria Soldier: सरहद पर देश की हिफाजत में तैनात एक सैनिक जब अपनी जान हथेली पर रखकर मातृभूमि की रक्षा करता है, तब उसका एकमात्र संबल यही विश्वास होता है कि देश और समाज उसके पीछे खड़े परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। किंतु उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद से सामने आए एक अत्यंत भावुक और विचलित करने वाले घटनाक्रम ने शासन, प्रशासन और नागरिक समाज की प्राथमिकताओं पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LOC) की शून्य से नीचे तापमान वाली अग्रिम चौकियों पर तैनात भारतीय सेना के जांबाज जवान वीर बहादुर सिंह ने सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा साझा करते हुए एक हृदयविदारक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो संदेश में उन्होंने अपने बूढ़े माता-पिता, छोटी बहन और गर्भवती बहन की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है और प्रशासनिक तंत्र से तत्काल न्याय की गुहार लगाई है।

वायरल वीडियो में जवान ने बेहद व्यथित मन से कहा है कि यदि उनके निर्दोष परिवार को दबंगों और पट्टीदारों के निरंतर उत्पीड़न से मुक्ति नहीं मिली और समय रहते निष्पक्ष न्याय नहीं दिया गया, तो वे या तो अत्याचारियों को गोली मार देंगे या फिर स्वयं को गोली मारकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर लेंगे। एक वर्दीधारी सैनिक द्वारा इस प्रकार की चरम लाचारी और आक्रोश व्यक्त किए जाने के बाद यह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर तेजी से वायरल हो गया। मामले की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सैनिक के पारिवारिक सरोकारों को देखते हुए देवरिया जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने गांव पहुंचकर मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी है और दोनों पक्षों के दावों की पड़ताल की जा रही है।

Deoria Soldier: वायरल वीडियो में सैनिक का मार्मिक विलाप और कानूनी व्यवस्था से तीखे सवाल

देवरिया जनपद के लार थाना अंतर्गत चुरिया गांव के निवासी वीर बहादुर सिंह भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और वर्तमान समय में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के अत्यंत संवेदनशील सीमावर्ती सेक्टर में है। मोबाइल कैमरे के सामने सेना की वर्दी में रिकॉर्ड किए गए अपने वीडियो में वीर बहादुर सिंह ने अपनी उस असहनीय मानसिक प्रताड़ना का खुलासा किया है, जिससे वे पिछले कई महीनों से अग्रिम मोर्चे पर जूझ रहे हैं। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि एक फौजी जब सीमा पर बंदूक थामकर दुश्मनों की गोलियों का सामना कर रहा होता है, तब यदि उसे दिन-रात अपने घर में बुजुर्ग माता-पिता और बहनों की जान पर मंडरा रहे खतरे की चिंता सताए, तो वह अपनी सैन्य जिम्मेदारियों का निर्वहन एकाग्रता से कैसे कर पाएगा।

जवान का आरोप है कि उनके गृह जनपद में उनके ही सगे चाचा और गांव के कुछ दबंग प्रवृत्ति के लोग मिलकर उनके परिवार का मानसिक और शारीरिक शोषण कर रहे हैं। घर पर रहने वाले वृद्ध पिता, माता, छोटी बहन और विशेष रूप से गर्भवती बहन के साथ लगातार गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। वीडियो में सैनिक की आंखों में आंसू और जुबां पर व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर यह प्रश्न दागा है कि वह देश की सीमाओं की रखवाली करें या फिर अपनी ड्यूटी छोड़कर घर की रक्षा के लिए लौटें। उनके इस भावुक वीडियो ने देश भर के पूर्व सैनिकों, नागरिक संगठनों और आम जनता के दिलों को झकझोर दिया है और लोग इंटरनेट पर सैनिक परिवार के लिए तत्काल सुरक्षा और हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

पुश्तैनी मकान और जमीन के बंटवारे की पूरी पृष्ठभूमि: क्या है विवाद की जड़

सोशल मीडिया पर फौजी का वीडियो वायरल होते ही देवरिया पुलिस ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए विवाद के ऐतिहासिक और कानूनी पहलुओं की गहन पड़ताल शुरू की। सलेमपुर क्षेत्र के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) गौरव सिंह द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ में पुश्तैनी आवासीय मकान और पारिवारिक जमीन के बंटवारे का पुराना विवाद निहित है। चुरिया गांव में रहने वाले तीन सगे भाइयों—राजा सिंह (जवान वीर बहादुर सिंह के पिता), रामनारायण सिंह और सुग्रीव सिंह—के बीच लंबे समय से पैतृक संपत्ति के विभाजन और स्वामित्व को लेकर तनाव चला आ रहा था।

प्रशासनिक अभिलेखों और स्थानीय पंचायत के दस्तावेजों के अनुसार, तीनों भाइयों के आपसी मतभेदों को समाप्त करने के लिए 31 दिसंबर 2025 को गांव के गणमान्य लोगों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में एक विस्तृत पंचायती समझौता संपन्न हुआ था। इस सामाजिक समझौते के तहत यह सर्वसम्मति बनी थी कि राजा सिंह अपने हिस्से की पुश्तैनी जमीन और मकान के अधिकार को तीन लाख पचहत्तर हजार रुपये की तयशुदा रकम के एवज में अपने तीसरे भाई सुग्रीव सिंह को हस्तांतरित करेंगे। इसी प्रकार दूसरे भाई रामनारायण सिंह ने भी अपने हिस्से की जमीन दो लाख पचास हजार रुपये में सुग्रीव सिंह को सौंपने पर लिखित सहमति दी थी।

बैंक खाते में पैसे का अंतरण और समझौते से मुकरने के आरोप-प्रत्यारोप

पुलिस जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि पंचायत में निर्धारित शर्तों के अनुसार सुग्रीव सिंह ने दूसरे भाई रामनारायण सिंह को उनकी पूरी तयशुदा रकम का भुगतान कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने शांतिपूर्वक अपने हिस्से का कब्जा छोड़ दिया। वहीं राजा सिंह के तयशुदा हिस्से में से अग्रिम भुगतान के तौर पर कुल एक लाख सत्तासी हजार रुपये की धनराशि सीधे उनके फौजी पुत्र वीर बहादुर सिंह के बैंक खाते में डिजिटल माध्यम से ट्रांसफर कर दी गई थी। समझौते की दूसरी मुख्य शर्त यह थी कि शेष बची हुई राशि का भुगतान तब किया जाएगा, जब राजा सिंह का परिवार पुराने पुश्तैनी मकान को पूरी तरह खाली करके नए स्थान पर स्थानांतरित हो जाएगा।

किंतु विवाद तब गहरा गया जब सुग्रीव सिंह ने अपने हिस्से के पुराने जर्जर मकान को ध्वस्त करके उस पर नए सिरे से पक्का निर्माण कार्य शुरू कराया। राजा सिंह का परिवार मकान के आगे वाले एक कमरे में लगातार निवास करता रहा और उन्होंने मकान खाली करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही राजा सिंह पक्ष ने पंचायत द्वारा पूर्व में तय किए गए समझौते की शर्तों और वित्तीय मूल्यांकन को मानने से सिरे से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य कहीं अधिक है और उन्हें दबाव में लाकर समझौता कराया गया था। इसी गतिरोध के चलते दोनों पक्षों के बीच अविश्वास और तनाव की खाई गहरी होती चली गई।

थाना लार में दर्ज मारपीट का मुकदमा और न्यायालय में विचाराधीन कानूनी प्रक्रिया

संपत्ति के इस अनसुलझे विवाद ने 26 फरवरी 2026 को उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब निर्माण कार्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी के बाद लाठी-डंडों से मारपीट हो गई। इस घटना के तत्काल बाद राजा सिंह के परिवार की ओर से लार थाने में नामजद तहरीर दी गई, जिसके आधार पर पुलिस ने सुग्रीव सिंह और उनके सहयोगियों के विरुद्ध मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने की सुसंगत धाराओं में आपराधिक मुकदमा पंजीकृत किया था।

क्षेत्राधिकारी सलेमपुर गौरव सिंह ने स्पष्ट किया कि लार पुलिस ने उस आपराधिक घटना की निष्पक्ष और समयबद्ध विवेचना पूरी करते हुए न्यायालय के समक्ष विधिवत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। वर्तमान में यह आपराधिक मामला संबंधित सक्षम न्यायालय के विचाराधीन है। इसके अतिरिक्त सिविल न्यायालय में भी संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर दीवानी वाद लंबित है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर दोनों पक्षों को बैठाकर शांति समिति और संभ्रांत नागरिकों के जरिए कई बार सुलह-समझौते के गंभीर प्रयास किए, किंतु दोनों पक्षों के अड़ियल रुख के कारण सहमति का कोई सर्वमान्य रास्ता नहीं निकल सका।

सैनिक परिवारों की सुरक्षा और प्रशासनिक संवेदनशीलता की अनिवार्यता

भारत की भौगोलिक और सामरिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि सीमाओं पर तैनात सैनिकों को महीनों तक कठिन और दुर्गम इलाकों में अपने परिजनों से कटे रहकर देश सेवा करनी पड़ती है। ऐसे में जब उनके गृह क्षेत्रों से परिवार पर हमलों, भूमि विवादों या स्थानीय दबंगई की खबरें सामने आती हैं, तो उसका सीधा असर सरहद पर तैनात जवान के मनोवैज्ञानिक संतुलन और मनोबल पर पड़ता है। देवरिया की यह घटना केवल एक सामान्य पारिवारिक विवाद नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक प्रशासनिक तंत्र की परीक्षा है, जिसे सैनिकों के परिवारों की शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने का स्पष्ट सरकारी शासनादेश प्राप्त है।

विशेषज्ञों और रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्रत्येक जनपद में गठित ‘सैनिक कल्याण बंधु’ जैसी संस्थाओं और स्थानीय उपजिलाधिकारियों को ऐसे संवेदनशील मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर त्वरित मध्यस्थता करनी चाहिए। यदि किसी फौजी के घर में बुजुर्ग माता-पिता और गर्भवती बहन की सुरक्षा दांव पर लगी हो, तो स्थानीय पुलिस चौकी और तहसील प्रशासन को नियमित गश्त और सुरक्षा का ठोस भरोसा दिलाना अनिवार्य हो जाता है। जब तक जवान को यह यकीन नहीं होगा कि उसका परिवार अपने घर में पूरी तरह सुरक्षित और सम्मानित है, तब तक उसका सीमा पर निश्चिंत होकर कर्तव्य निभाना अत्यंत कठिन हो जाता है।

Deoria Soldier: पुलिस का त्वरित एक्शन, सुरक्षा का आश्वासन और आगामी कानूनी समाधान

वीर बहादुर सिंह का मार्मिक वीडियो सोशल मीडिया के शीर्ष ट्रेंड्स में शामिल होने और उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचने के बाद लार थाना पुलिस पूरी तरह हरकत में आ गई है। पुलिस की एक विशेष टीम ने फौजी के पैतृक गांव चुरिया में जाकर उनके पिता राजा सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों से विस्तृत बातचीत की है। पुलिस अधिकारियों ने सैनिक के परिवार को आश्वस्त किया है कि जब तक मामला न्यायालय से निस्तारित नहीं हो जाता, तब तक किसी भी पक्ष को कानून हाथ में लेने, बल प्रयोग करने या धमकी देने की अनुमति कतई नहीं दी जाएगी।

जिला पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गांव में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों को कड़ी चेतावनी दी गई है और एहतियातन स्थानीय बीट कांस्टेबल को नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से भी सैनिक वीर बहादुर सिंह से संपर्क साधकर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराने और परिवार की पूर्ण सुरक्षा का वचन देने की प्रक्रिया जारी है। अब सबकी निगाहें न्यायालय के अंतिम आदेश और प्रशासनिक मध्यस्थता पर टिकी हैं, ताकि पुश्तैनी जमीन के इस विवाद का एक शांतिपूर्ण, न्यायसंगत और सम्मानजनक समाधान निकल सके और देश की सीमाओं की हिफाजत में जुटा यह वीर सैनिक बिना किसी पारिवारिक भय के अपने राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा कर सके।

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