Sonia Gandhi Book Controversy: ‘बिलॉन्गिंग’ पेंगुइन इंडिया ने की थी अध्यायों में कटौती की मांग, असहमति के बाद रद्द हुई भारतीय प्रकाशन डील

पेंगुइन इंडिया ने राजनीतिक अंशों में बदलाव सुझाए, असहमति के बाद समझौता खत्म

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Sonia Gandhi Book Controversy: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ (Belonging: A Journey of Love) के भारतीय संस्करण के प्रकाशन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के कानूनी सलाहकारों द्वारा किताब के कई अध्यायों में बड़े बदलाव करने और संवेदनशील राजनीतिक अंशों को हटाने की सिफारिश के बाद लेखक पक्ष और प्रकाशक के बीच बात बिगड़ गई।
लगभग दो महीने तक चले गहन विचार-विमर्श और गतिरोध के उपरांत भारत में इसके प्रकाशन का समझौता आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया गया है। वैश्विक स्तर पर यह किताब पेंगुइन रैंडम हाउस के प्रतिष्ठित डिवीजन ‘अल्फ्रेड ए. नॉफ’ द्वारा 10 नवंबर को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मूल रूप में ही प्रकाशित की जाएगी।

Sonia Gandhi Book Controversy: किन अध्यायों और राजनीतिक मुद्दों पर वकीलों ने जताई थी आपत्ति?

सूत्रों के अनुसार पेंगुइन इंडिया की कानूनी टीम ने पांडुलिपि की समीक्षा के दौरान कई समकालीन राजनीतिक विषयों से जुड़े अंशों पर कड़ा ऐतराज जताया था। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के शासनकाल की तीखी समीक्षा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की वैचारिक भूमिका, देश में बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, दंगों की घटनाएं, अल्पसंख्यकों की स्थिति और भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़े संदर्भ शामिल थे।
कानूनी टीम ने इन अंशों को संभावित मानहानि और विधिक विवादों के दायरे में मानते हुए हटाने या भाषा को काफी हद तक नरम करने की एक विस्तृत सूची लेखक पक्ष को सौंपी थी। लेखक टीम का मानना था कि इन कटौतियों को स्वीकार करने से किताब का मूल स्वरूप और विचार प्रभावित होंगे तथा भारत के पाठकों को एक सेंसर किया गया अधूरा संस्करण पढ़ने को मिलेगा, जो वैश्विक संस्करण से पूरी तरह अलग होगा।

लेखक पक्ष का रुख: ‘यह जीवन का प्रामाणिक सच, दोहरे संस्करण स्वीकार्य नहीं’

सोनिया गांधी की ओर से तैयार की गई इस पांडुलिपि में उनके निजी जीवन के साथ-साथ स्वतंत्रता के बाद के छह दशकों के भारतीय सामाजिक-आर्थिक व राजनीतिक बदलावों का प्रत्यक्षदर्शी विवरण दर्ज है। लेखक पक्ष का तर्क था कि किताब का अंतिम खंड भारतीय राजनीति की वर्तमान दिशा पर उनके स्पष्ट व्यक्तिगत विचारों को दर्शाता है, जिसे सेंसर नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि बातचीत के दौरान लेखक पक्ष ने कुछ सामान्य संपादकीय सुझावों पर सहमति जताई, किंतु कुछ विशिष्ट राजनीतिक अध्यायों में भारी फेरबदल के सुझावों को खारिज कर दिया गया। जब प्रकाशक के वकीलों ने अपनी आपत्तियों को वापस लेने से मना कर दिया, तो लेखक पक्ष ने इस समझौते को आगे न बढ़ाते हुए डील समाप्त करने की सूचना दे दी।

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की सफाई: ‘बाहरी दबाव नहीं, फैक्ट-चेक सामान्य प्रक्रिया’

विवाद सामने आने के बाद पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उनके ऊपर किसी भी प्रकार का राजनीतिक या बाहरी दबाव नहीं था। प्रकाशक ने कहा कि वे इस ऐतिहासिक कृति को प्रकाशित करने के लिए बेहद उत्सुक थे और लेखक के साथ कई दौर की सकारात्मक बातचीत हुई थी, जिसमें कई बिंदुओं पर आपसी सहमति भी बनी थी।
प्रकाशक ने जोर देकर कहा कि किसी भी संवेदनशील पांडुलिपि का कानूनी फैक्ट-चेक करना और कानूनी सिफारिशें देना प्रकाशन प्रक्रिया का एक सामान्य और पेशेवर हिस्सा है। दुर्भाग्यवश एक विशिष्ट मुद्दे पर अंतिम सहमति न बन पाने के चलते लेखक टीम ने आगे न बढ़ने का फैसला लिया, जिसका वे पूरा सम्मान करते हैं।

कांग्रेस नेताओं का आरोप: ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सच पर हमला’

भारत में प्रकाशन रद्द होने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार करार दिया है।
नेताओं ने सवाल उठाया कि जब पेंगुइन का वैश्विक डिवीजन बिना किसी बदलाव के पूरी दुनिया में इस किताब को छापने के लिए तैयार है, तो भारत में ही ऐसे बदलावों और सेंसरशिप की मांग क्यों की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल के दबाव के चलते प्रकाशक ऐतिहासिक तथ्यों और सच को प्रकाशित करने से कतरा रहे हैं।

Sonia Gandhi Book Controversy: 10 नवंबर को वैश्विक रिलीज, भारत में नए प्रकाशक की तलाश

‘अल्फ्रेड ए. नॉफ’ द्वारा 10 नवंबर को वैश्विक स्तर पर पहली प्रिंटिंग में एक लाख प्रतियों के साथ इस आत्मकथा को रिलीज किया जाएगा। वहीं भारतीय बाजार में इस किताब को उसके मूल रूप में लाने के लिए अब अन्य प्रमुख प्रकाशकों के साथ बातचीत की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
सोनिया गांधी के लंबे सार्वजनिक और व्यक्तिगत जीवन के अनछुए पहलुओं को समेटने वाली यह किताब अंतरराष्ट्रीय पाठकों के साथ-साथ भारतीय पाठकों के बीच भी काफी उत्सुकता का केंद्र बनी हुई है, और इस ताजा विवाद ने इसके विमोचन को लेकर चर्चाओं को और तीव्र कर दिया है।

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