Share Market Today: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 2000 अंक धड़ाम, निफ्टी भी 600 से ज्यादा अंक लुढ़का, मिडिल ईस्ट टेंशन और क्रूड ऑयल के उबाल ने बिगाड़ा खेल

मिडिल ईस्ट युद्ध और क्रूड 109$+ से बाजार धराशायी, सेंसेक्स 74,837 पर, निफ्टी 23,831; FPI बिकवाली 21,000 करोड़, मेटल-एनर्जी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

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Share Market Today: सोमवार 9 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में जो तबाही मची वह निवेशकों के लिए एक बुरे सपने जैसी रही। बाजार खुलते ही पहले कुछ मिनटों में ही BSE सेंसेक्स 2000 से अधिक अंक गिर गया और NSE निफ्टी भी 600 से ज्यादा अंक धराशायी हो गया। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण है पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में तेज होता सैन्य संघर्ष और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में आया जबरदस्त उबाल। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने दुनियाभर के बाजारों को हिला दिया है और भारतीय बाजार भी इस झटके से नहीं बच सका।

Share Market Today: ओपनिंग में ही बिखरा बाजार

आज सुबह 9 बजकर 17 मिनट पर BSE सेंसेक्स एक समय 2081.23 अंक की जोरदार गिरावट के साथ 74,837.67 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। यह गिरावट इतनी तेज और अचानक थी कि निवेशक संभलने का मौका भी नहीं पा सके। इसी समय NSE का निफ्टी 50 इंडेक्स भी 618.85 अंक फिसलकर 23,831.00 के स्तर पर आ गया। इससे पहले शुक्रवार को भी बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स शुक्रवार को 78,918.90 और निफ्टी 24,450.45 पर बंद हुआ था। अब इन दोनों स्तरों से और नीचे आकर बाजार ने निवेशकों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है।

किन शेयरों में आई सबसे ज्यादा गिरावट

आज की इस बड़ी गिरावट में धातु, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के शेयरों पर सबसे अधिक मार पड़ी। हिंडाल्को, टाटा स्टील, कोल इंडिया, ONGC और JSW स्टील में तेज गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियों और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर दोहरा बोझ पड़ा। एनर्जी, मेटल और रियल्टी इंडेक्स में भी 2 से 3 फीसदी तक की गिरावट देखी गई। IT सेक्टर के शेयर भी कमजोर रहे क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।

Share Market Today: मिडिल ईस्ट संघर्ष बना सबसे बड़ा विलेन

बाजार की इस दुर्दशा के पीछे सबसे बड़ी वजह है पश्चिम एशिया में भड़का युद्ध। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी में कई महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके बाद इजरायल ने तेहरान के तेल डिपो को निशाना बनाया। इस तेज होते टकराव ने दुनिया की सबसे व्यस्त तेल आपूर्ति लाइन होर्मुज जलडमरूमध्य को खतरे में डाल दिया है। दुनिया का करीब 20 फीसदी समुद्री तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है। इस अनिश्चितता के चलते ब्रेंट क्रूड आज 109 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया जो कुछ दिन पहले तक 90 डॉलर के आसपास था।

क्रूड ऑयल में 20 फीसदी की आग

कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेज बढ़ोतरी ने भारत जैसे देशों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 फीसदी से अधिक हिस्सा आयात से पूरा करता है। तेल महंगा होने का मतलब है व्यापार घाटे में बढ़ोतरी, रुपये पर दबाव, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना और महंगाई का खतरा। इन सभी कारकों ने मिलकर भारतीय बाजार को आज बुरी तरह तोड़ दिया। मध्य पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने भी उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है जिससे आपूर्ति और कम होने की आशंका है।

Share Market Today: एशियाई और वैश्विक बाजारों का हाल

भारतीय बाजार की यह गिरावट अकेली नहीं है। पूरी दुनिया के बाजारों में आज लाल रंग छाया हुआ है। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 6 फीसदी से अधिक गिरा। दक्षिण कोरिया का कोस्पो 6.68 फीसदी टूटा। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसैंग भी भारी गिरावट के साथ खुला। शुक्रवार को अमेरिकी डॉव जोन्स भी 0.95 फीसदी और S&P 500 इंडेक्स 1.33 फीसदी गिरकर बंद हुए थे। इस वैश्विक बिकवाली की लहर ने भारतीय बाजार पर और दबाव बढ़ाया।

FPI की बिकवाली से और बिगड़ी स्थिति

इस संकट में आग में घी डालने का काम किया है विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की जोरदार बिकवाली ने। पिछले हफ्ते 2 मार्च से 6 मार्च के बीच FPI ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 21,000 करोड़ रुपये निकाल लिए। आज की गिरावट में भी FPI की बिकवाली जारी रहने की आशंका है। जब विदेशी निवेशक इतने बड़े पैमाने पर पैसा निकालते हैं तो बाजार में तरलता कम होती है और गिरावट और तेज हो जाती है।

Share Market Today: निवेशक क्या करें?

बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि आज के माहौल में घबराहट में शेयर बेचना नुकसान को पक्का कर देता है। जो निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेशित हैं उन्हें धैर्य रखना चाहिए। फिलहाल नए निवेश के लिए बाजार की दिशा साफ होने का इंतजार करना ही बेहतर रहेगा। पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे-जैसे स्पष्ट होगी बाजार भी अपनी दिशा तलाशेगा।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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