स्वस्थ बच्चे के लिए जरूरी है थैलेसीमिया स्क्रीनिंग: प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले कपल्स को क्यों कराना चाहिए ब्लड टेस्ट? एक्सपर्ट डॉ. महक अग्रवाल ने बताए बचाव के विकल्प
शादी या प्रेग्नेंसी से पहले थैलेसीमिया टेस्ट क्यों है अनिवार्य? जानें एक्सपर्ट्स की राय
Thalassemia Screening: माता-पिता बनना जीवन के सबसे सुखद अनुभवों में से एक है, लेकिन इस सुखद भविष्य की नींव रखने के लिए स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता भी उतनी ही अनिवार्य है। अक्सर कपल्स फैमिली प्लानिंग के दौरान आहार और लाइफस्टाइल पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन जेनेटिक बीमारियों के जोखिम को नजरअंदाज कर देते हैं। थैलेसीमिया एक ऐसी ही गंभीर अनुवांशिक बीमारी है, जो माता-पिता के माध्यम से अनजाने में बच्चों तक पहुंच सकती है। यदि आप भी बच्चे की योजना बना रहे हैं, तो एक छोटा सा ब्लड टेस्ट आपके आने वाले शिशु को जीवन भर के दर्द और संघर्ष से बचा सकता है। दिल्ली के एक्शन कैंसर हॉस्पिटल की डॉ. महक अग्रवाल के अनुसार, थैलेसीमिया टेस्ट केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और स्वस्थ पीढ़ी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।
थैलेसीमिया: एक जेनेटिक विकार और ‘कैरियर’ होने का खतरा
थैलेसीमिया रक्त से जुड़ी एक जेनेटिक बीमारी है जिसमें शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। हीमोग्लोबिन का मुख्य कार्य शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाना है, और इसकी कमी से गंभीर एनीमिया हो जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कोई व्यक्ति ‘थैलेसीमिया माइनर’ या ‘कैरियर’ हो सकता है, जिसका अर्थ है कि उसके शरीर में बीमारी के जीन मौजूद हैं लेकिन उसे स्वयं कोई लक्षण महसूस नहीं होते। वह एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जीता है, लेकिन विवाह के बाद यदि उसका साथी भी अनजाने में थैलेसीमिया कैरियर निकलता है, तो उनके होने वाले बच्चे को ‘थैलेसीमिया मेजर’ होने का 25% खतरा होता है।
भारत में थैलेसीमिया एक बड़ी चुनौती है क्योंकि यहाँ हर साल हजारों बच्चे इस गंभीर विकार के साथ पैदा होते हैं। थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चों को जीवित रहने के लिए हर 2 से 4 सप्ताह में रक्त चढ़ाने (Blood Transfusion) की आवश्यकता होती है। बार-बार रक्त चढ़ाने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जो हृदय और लिवर जैसे अंगों को नुकसान पहुँचा सकती है। इसका स्थायी समाधान बोन मैरो ट्रांसप्लांट है, लेकिन इसकी लागत और जटिलता हर परिवार के लिए संभव नहीं होती। इसीलिए, एक्सपर्ट्स का मानना है कि शादी से पहले या गर्भधारण से पूर्व कपल्स को अपनी जाँच अवश्य करानी चाहिए ताकि इस चक्र को तोड़ा जा सके।
Thalassemia Screening: थैलेसीमिया के लक्षण, जाँच और बचाव के विकल्प
थैलेसीमिया मेजर के लक्षण आमतौर पर शिशु के जन्म के 6 महीने बाद दिखने शुरू होते हैं। बच्चा पीला पड़ने लगता है, उसे भूख कम लगती है, चिड़चिड़ापन रहता है और उसका विकास धीमा हो जाता है। गंभीर मामलों में बच्चे की हड्डियों की बनावट में बदलाव और पेट फूलने जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं। इसकी जाँच के लिए ‘हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस’ या ‘HPLC’ नामक एक साधारण ब्लड टेस्ट किया जाता है, जो यह स्पष्ट कर देता है कि व्यक्ति कैरियर है या नहीं। यह टेस्ट किफायती है और लगभग सभी बड़े शहरों की लैब में आसानी से उपलब्ध है।
बचाव ही इस बीमारी का एकमात्र सबसे प्रभावी इलाज है। यदि जाँच के बाद पता चलता है कि दोनों पार्टनर कैरियर हैं, तो आधुनिक चिकित्सा विज्ञान कई विकल्प प्रदान करता है। कपल्स ‘प्री-इंप्लांटेशन जेनेटिक डायग्नोसिस’ (PGD) के साथ IVF का विकल्प चुन सकते हैं, जहाँ केवल स्वस्थ भ्रूण को ही गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसके अलावा, गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में ‘प्रीनेटल टेस्टिंग’ के जरिए भी यह पता लगाया जा सकता है कि गर्भ में पल रहा बच्चा स्वस्थ है या नहीं। जागरूकता और सही समय पर लिया गया निर्णय एक परिवार को उम्र भर के मानसिक और आर्थिक बोझ से बचा सकता है।
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