Saifullah Kasuri: पहलगाम हमले के आरोपी सैफुल्लाह कसूरी का भड़काऊ बयान

पाकिस्तान में सार्वजनिक मंच से दिए बयान को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की नजर, NIA कोर्ट पहले जारी कर चुका है गैर-जमानती वारंट

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Saifullah Kasuri: पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का कुख्यात कमांडर और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले का मुख्य आरोपी सैफुल्लाह कसूरी एक बार फिर अपनी भड़काऊ और उन्मादी बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में है। हाल ही में पाकिस्तान में आयोजित एक बड़े धार्मिक जलसे में खुलेआम मंच पर नजर आए कसूरी ने इजरायल और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर बेहद उग्र बयान दिया। रक्षा विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कसूरी की इस बयानबाजी का असल मकसद इजरायल विरोधी माहौल की आड़ में धार्मिक उन्माद फैलाना, लश्कर-ए-तैयबा के लिए भारी फंडिंग जुटाना और संगठन से भटके कैडरों में नई जान फूंकना है।

Saifullah Kasuri: खत्म-ए-नबुवत सम्मेलन में उगला जहर

रिपोर्टों के अनुसार, कसूरी पिछले सप्ताह पाकिस्तान में आयोजित ‘खत्म-ए-नबुवत’ सम्मेलन में प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल हुआ था। इस दौरान हजारों की भीड़ को संबोधित करते हुए उसने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना सऊदी अरब के पवित्र धार्मिक स्थलों की रक्षा करेगी और इजरायल को दुनिया के नक्शे से मिटा देगी।
कसूरी ने अपने भाषण में पाकिस्तानी सेना को सीधे तौर पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के अग्रिम मोर्चे पर लड़ने वाले पक्ष के रूप में पेश करने का प्रयास किया। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के उन्मादी बयानों के जरिए वह पाकिस्तानी आवाम की धार्मिक भावनाओं को भुनाकर आतंकी संगठनों की अवैध गतिविधियों को सामाजिक वैधता दिलाने की कोशिश कर रहा है।

पहलगाम हमले के बाद से सार्वजनिक मंचों पर बढ़ा दबदबा

लश्कर-ए-तैयबा का तथाकथित डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले की जांच में मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर वांछित है। इसके बावजूद पाकिस्तान की धरती पर उसकी बेरोकटोक आवाजाही और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिरकत लगातार जारी है।
पहलगाम हमले के बाद कसूरी को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के कई शहरों में रैलियों और धार्मिक सम्मेलनों को संबोधित करते देखा गया है। इन आयोजनों के माध्यम से वह सीधे तौर पर जिहाद के नाम पर चंदा (फंडिंग) जुटाने और स्थानीय युवाओं को ब्रेनवाश कर लश्कर के नेटवर्क में भर्ती करने का अभियान चला रहा है। जनवरी 2026 में भी ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई थीं जिनमें कसूरी को सरकारी और सैन्य प्रतिष्ठानों से जुड़े आयोजनों में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने के दावे किए गए थे, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की दोहरी नीति को बेनकाब किया था।

हमास, लश्कर और जैश का खतरनाक गठजोड़

कसूरी का यह ताजा इजरायल विरोधी बयान उस चिंताजनक अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ का हिस्सा माना जा रहा है जो पिछले एक साल से पाकिस्तान में आकार ले रहा है। हालिया खुफिया रिपोर्टों में यह तथ्य सामने आ चुका है कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और फलस्तीनी आतंकी गुट हमास के बीच लगातार समन्वय बैठकों का सिलसिला चल रहा है।
पिछले वर्ष हमास के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बहावलपुर में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य मुख्यालय का गोपनीय दौरा किया था। इसके अलावा, फरवरी में PoK के रावलकोट में ‘कश्मीर एकजुटता दिवस’ के मंच से हमास के शीर्ष नेताओं ने वीडियो लिंक और संदेशों के जरिए कश्मीरी अलगाववाद को फलस्तीनी संघर्ष से जोड़ने की वकालत की थी। कसूरी अब इसी वैचारिक सांठगांठ को लश्कर की भर्ती नीति का मुख्य आधार बना रहा है।

युवाओं का ब्रेनवॉश और सोशल मीडिया प्रोपेगैंडा

खुफिया एजेंसियों की चिंता का बड़ा कारण कसूरी का बदलता हुआ डिजिटल प्रोपेगैंडा है। लश्कर समर्थक सोशल मीडिया हैंडल्स, टेलीग्राम चैनलों और व्हाट्सएप नेटवर्क्स पर कसूरी के भाषणों, वीडियो क्लिप्स और पोस्टर्स को तेजी से वायरल किया जा रहा है।
मार्च में कसूरी ने खुले तौर पर पाकिस्तान सरकार को चेतावनी देते हुए ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) का किसी भी रूप में हिस्सा न बनने की धमकी दी थी। इसके बाद मई के अंत में लाहौर में आयोजित एक रैली में उसने गर्व से स्वीकार किया कि पहलगाम हमले के बाद उसकी पहचान और स्वीकार्यता किस कदर बढ़ी है। वह वैश्विक इस्लामी मुद्दों को उठाकर युवाओं को भावनात्मक रूप से कट्टरपंथ की ओर धकेल रहा है ताकि कश्मीर घाटी में घुसपैठ के लिए नए आतंकियों का दस्ता तैयार किया जा सके।

Saifullah Kasuri: भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का शिकंजा

सैफुल्लाह कसूरी की सीमा पार से जारी विध्वंसक गतिविधियों पर भारतीय खुफिया एजेंसियां और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) लगातार पैनी नजर रखे हुए हैं। सितंबर 2026 में जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत ने आतंकी गतिविधियों के संचालन, भारत में हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी, और हवाला के जरिए टेरर फंडिंग कराने के पुख्ता सबूतों के आधार पर सैफुल्लाह कसूरी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था।
जांच में यह प्रमाणित हुआ है कि पाकिस्तान की सुरक्षित पनाहगाहों में बैठकर कसूरी जम्मू-कश्मीर में सक्रिय अपने स्लीपर सेल्स और ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को सीधे दिशा-निर्देश और लॉजिस्टिक सहायता मुहैया करा रहा है। कसूरी का यह हालिया बयान स्पष्ट करता है कि अंतरराष्ट्रीय निगरानी और वित्तीय दबावों के बावजूद पाकिस्तान का डीप स्टेट अपनी जमीन से भारत विरोधी आतंकी ढांचे और लश्कर के कमांडरों को संरक्षण देने की नीति से पीछे नहीं हटा है।

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