Fatty Liver में नाश्ते की ये 5 आम चीजें पड़ सकती हैं भारी, जानें पोहा, उपमा और चाय-बिस्कुट में क्या बदलें
Fatty Liver में पोहा, उपमा, बटर-जैम सैंडविच, चाय-बिस्कुट और पैकेज्ड सीरियल कितने सही हैं? जानें इन्हें बेहतर बनाने के आसान तरीके और संतुलित नाश्ते की प्लेट।
Fatty Liver: सुबह की शुरुआत ज्यादातर घरों में चाय-बिस्कुट, पोहा, उपमा या ब्रेड-जैम जैसे झटपट नाश्ते से होती है। इन्हें हम अक्सर हल्का और सेहतमंद मानकर बिना सोचे खा लेते हैं। लेकिन फैटी लिवर की समस्या में नाश्ते की प्लेट पर थोड़ा ध्यान देना जरूरी हो जाता है। ये चीजें अपने आप में पूरी तरह खराब नहीं हैं, पर बनाने का तरीका, मात्रा और साथ में खाई जाने वाली चीजें असर तय करती हैं। आइए सवाल-जवाब के रूप में समझते हैं।
Fatty Liver में कैसा नाश्ता बेहतर माना जाता है?
फैटी लिवर में ऐसा नाश्ता अच्छा माना जाता है, जिसमें फाइबर और प्रोटीन का संतुलन हो और अतिरिक्त चीनी तथा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट कम हों। नाश्ता छोड़ देना या अपनी हर पसंदीदा चीज पर पूरी तरह रोक लगा देना जरूरी नहीं है।
कोशिश यह रहे कि प्लेट में फाइबर, प्रोटीन और बेहतर किस्म के कार्बोहाइड्रेट तीनों मौजूद हों। ओट्स, साबुत अनाज, फल, सब्जियां, अंडे, दालें और बीज ऐसे विकल्प हैं, जो इस संतुलन में मदद कर सकते हैं।
क्या पोहा और उपमा फैटी लिवर में खा सकते हैं?
हां, लेकिन सही तरीके से। पोहा हल्का नाश्ता जरूर है, पर अगर उसमें सब्जियां या प्रोटीन का कोई स्रोत नहीं है और मात्रा भी ज्यादा है, तो वह लगभग पूरी तरह कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन बन जाता है। इसे बेहतर बनाने के लिए पोहे में सब्जियां और थोड़ी मूंगफली डालें और साथ में दही लें।
सूजी का उपमा भी घरों का आम नाश्ता है। सिर्फ सूजी का बड़ा कटोरा खाने के बजाय उसमें भरपूर सब्जियां मिलाएं और साथ में प्रोटीन वाली चीज जोड़ें। फैटी लिवर में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट सीमित रखने की सलाह दी जाती है, इसलिए मात्रा का भी ध्यान रखें।
बटर-जैम सैंडविच और चाय-बिस्कुट से क्यों सावधानी रखें?
सफेद ब्रेड, बटर और मीठा जैम स्वाद में अच्छा लगता है, लेकिन इस मेल में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अतिरिक्त चीनी और सैचुरेटेड फैट बढ़ सकते हैं। जरूरत हो तो 100 प्रतिशत होल-ग्रेन ब्रेड चुनें और जैम की जगह बिना चीनी वाला नट बटर या कोई प्रोटीन वाला विकल्प लें।
“दो बिस्कुट और एक कप चाय” वाला नाश्ता भी हल्का दिखता है, मगर उसमें फाइबर और प्रोटीन कम होते हैं। चाय में ज्यादा चीनी और बिस्कुट में रिफाइंड आटा व चीनी इसे रोजाना के लिए कमजोर विकल्प बना देते हैं। फैटी लिवर में मीठे पेय और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट घटाना फायदेमंद माना जाता है। इसलिए चाय में चीनी कम करें और बिस्कुट की जगह भुने चने, फल या मुट्ठीभर मेवे लें।
पैकेट वाले सीरियल क्या सच में हेल्दी होते हैं?
कॉर्नफ्लेक्स और दूसरे पैकेज्ड सीरियल देखने में झटपट और सेहतमंद लगते हैं, लेकिन कई उत्पादों में अतिरिक्त चीनी मिली होती है। रोजाना ज्यादा मीठे सीरियल खाना फैटी लिवर वालों के लिए सही नहीं माना जाता।
खरीदते समय पैकेट पर लिखी सामग्री और चीनी की मात्रा जरूर देखें। बेहतर विकल्प के तौर पर बिना अतिरिक्त चीनी वाले होल-ग्रेन सीरियल, ओट्स या दलिया चुन सकते हैं। इनमें फल, बीज या नट्स मिलाने से फाइबर और पोषण दोनों बढ़ जाते हैं।
Fatty Liver: डाइट में बदलाव से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
फैटी लिवर में सही डाइट हर व्यक्ति की स्थिति, वजन, शुगर लेवल और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के हिसाब से अलग हो सकती है। इसलिए किसी एक सूची को सभी पर लागू न मानें। खानपान में बड़ा बदलाव करने से पहले डाइटीशियन या डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
साथ ही चीनी, रिफाइंड कार्ब्स और तले-प्रोसेस्ड खाने से दूरी बनाए रखने की सलाह आम तौर पर दी जाती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में योग्य चिकित्सक या डाइटीशियन की सलाह जरूर लें।
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