Bihar Daroga Exam Protest: मेंस परीक्षा रद्द होने के खिलाफ पटना की सड़कों पर उतरे छात्र, किया जोरदार प्रदर्शन
Bihar Daroga Exam Protest: मेंस परीक्षा रद्द होने के खिलाफ पटना की सड़कों पर उतरे छात्र, किया जोरदार प्रदर्शन
Bihar Daroga Exam Protest: बिहार में दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ पटना में अभ्यर्थियों ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। गांधी मैदान से शुरू हुए मार्च के दौरान छात्रों ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लगभग 10,000 अभ्यर्थियों ने मेंस परीक्षा पास की थी और अब अचानक परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य संकट में पड़ गया है।
छात्र परीक्षा रद्द करने के फैसले को वापस लेने और शारीरिक दक्षता परीक्षा की नई तारीख घोषित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, विरोध जारी रहेगा। आइए जानते हैं इस विवाद और प्रदर्शन की पूरी डिटेल।
Bihar Daroga Exam Protest: पटना में दरोगा अभ्यर्थियों का प्रदर्शन कैसे शुरू हुआ?
सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे बिहार के विभिन्न जिलों से आए दरोगा अभ्यर्थी बड़ी संख्या में गांधी मैदान में एकत्र हुए। वहां से उन्होंने जेपी गोलंबर की ओर मार्च निकाला। जेपी गोलंबर के पास तैनात भारी पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। जब छात्र बैरिकेड तोड़कर डाकबंगला चौराहे की ओर आगे बढ़ने लगे तो स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ीं। इससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।
प्रशासन का कहना है कि इस तरह के हंगामे से आम जनता और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। छात्रों का आरोप है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और वे सिर्फ अपनी मांगें रखना चाहते थे।
दरोगा मेंस परीक्षा क्यों रद्द की गई और छात्र क्यों नाराज हैं?
छात्रों की मुख्य नाराजगी 1799 पदों के लिए आयोजित मुख्य परीक्षा को रद्द किए जाने को लेकर है। लगभग 10,000 अभ्यर्थियों ने इस मेंस परीक्षा में सफलता हासिल की थी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ गिने-चुने लोगों की शिकायतों के आधार पर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी। उनका कहना है कि अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई थी तो जांच कर सिर्फ दोषियों और संबंधित केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी, न कि पूरी परीक्षा पर पानी फेर दिया जाना चाहिए था।
मुख्य परीक्षा पास करने के बाद पिछले करीब चार महीने से छात्र शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा समाप्त होने या समाप्त होने की कगार पर है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं के लिए बार-बार पटना आना और तैयारी जारी रखना मुश्किल हो गया है।
प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
छात्र मेंस परीक्षा रद्द करने के आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं। साथ ही शारीरिक दक्षता परीक्षा की नई तारीख घोषित करने की भी मांग है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
छात्रों ने अपनी दलील में चुनाव का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि अगर किसी एक या दो मतदान केंद्र पर गड़बड़ी होती है तो पूरे राज्य का चुनाव रद्द नहीं किया जाता, बल्कि केवल संबंधित बूथ पर दोबारा मतदान कराया जाता है। इसी तर्क के आधार पर वे पूरी परीक्षा रद्द करने के फैसले का विरोध कर रहे हैं।
परीक्षा रद्द होने से छात्रों पर क्या असर पड़ा है?
मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद चार महीने की मेहनत और तैयारी अचानक व्यर्थ होने के डर से छात्र मानसिक और आर्थिक दबाव में हैं। कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा का संकट है। आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के युवा घर से पैसे मंगाकर पटना में रहकर तैयारी कर रहे थे। परीक्षा के अंतिम चरण में पहुंचकर यह झटका उनके परिवारों की उम्मीदों पर भी पानी फेरने वाला साबित हुआ है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है, लेकिन सामूहिक सजा सही नहीं है। वे चाहते हैं कि दोषी केंद्रों या व्यक्तियों पर कार्रवाई हो, लेकिन मेहनत करने वाले हजारों छात्रों को नुकसान न हो।
आगे क्या हो सकता है और प्रशासन का रुख क्या है?
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की सख्ती के बाद स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई। प्रशासन का जोर यातायात और आम जनजीवन को प्रभावित होने से रोकने पर है। छात्र पक्ष ने साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
अब देखना होगा कि बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग या राज्य सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है। छात्रों की मांगों पर विचार होता है या परीक्षा रद्द का फैसला बरकरार रहता है, इससे आगे की स्थिति तय होगी। दोनों पक्षों के बीच संवाद से ही विवाद का समाधान निकल सकता है।
कुल मिलाकर बिहार दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ पटना में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन सोमवार को जोरदार रहा। गांधी मैदान से शुरू हुए मार्च में बैरिकेड तोड़ने की कोशिश और पुलिस लाठीचार्ज की घटनाएं हुईं। लगभग 10,000 सफल अभ्यर्थी परीक्षा रद्द के फैसले को वापस लेने और शारीरिक परीक्षा की नई तारीख की मांग कर रहे हैं। आगे की कार्रवाई और प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
Read More Here:-