नवरात्रि में कलश स्थापना से पहले क्यों जुटाई जाती है खास मिट्टी? बंगाल की ‘पुण्य माटी’ से जुड़ी है अनोखी परंपरा
घटस्थापना में मिट्टी-जौ से लेकर बंगाल की दुर्गा प्रतिमा तक, जानें ‘पुण्य माटी’ की अनोखी परंपरा
Navratri Kalash Sthapana: घटस्थापना में मिट्टी और जौ का गहरा आध्यात्मिक प्रतीक
बंगाल की ‘पुण्य माटी’ और दुर्गा प्रतिमा निर्माण का विधान
वर्जित चौखट की मिट्टी को क्यों माना गया परम पवित्र?
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पुण्य और पवित्रता का प्रतीक: एक बहुत पुरानी और लोकप्रिय मान्यता यह है कि जब कोई व्यक्ति किसी वेश्यालय की चौखट के भीतर कदम रखता है, तो वह अपनी सारी पवित्रता, शील, सदाचार और संचित पुण्य उस दहलीज के बाहर ही छोड़ जाता है। इस दार्शनिक दृष्टिकोण के अनुसार, उस चौखट के बाहर जमा मिट्टी समाज के सबसे शुद्ध और संचित पुण्यों से युक्त मानी जाती है, जिसके कारण उसे ‘पुण्य माटी’ कहा गया।
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सामाजिक समावेश और सम्मान: दूसरा और सबसे मानवीय दृष्टिकोण यह है कि मां दुर्गा को संपूर्ण सृष्टि और हर स्त्री का मूल रूप माना जाता है। समाज चाहे किसी वर्ग को कितना भी उपेक्षित, लांछित या बहिष्कृत क्यों न कर दे, लेकिन जगदंबा के दरबार में कोई भी अछूत या अवांछित नहीं है। उस दहलीज की मिट्टी को प्रतिमा का हिस्सा बनाकर यह संदेश दिया जाता है कि सामाजिक रूप से हाशिए पर धकेल दी गई स्त्रियां भी शक्ति स्वरूपा हैं और उनके योगदान के बिना देवी की पूर्णता संभव नहीं है।
प्रतिमा निर्माण में उपयोग की जाने वाली अन्य पारंपरिक सामग्रियां
Navratri Kalash Sthapana: बदलते समय में परंपरा का वर्तमान स्वरूप
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