RJD Raj Bhavan March: पटना में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में RJD का राजभवन मार्च, पेपर लीक, बेरोजगारी और सिवान पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमला
पेपर लीक, रोजगार और सिवान घटना को लेकर तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा
RJD Raj Bhavan March: बिहार की राजधानी पटना की सड़कें बुधवार को राजनीतिक हलचल और छात्र-युवा असंतोष का केंद्र बन गईं। राज्य में लगातार सामने आ रहे परीक्षा धांधली प्रकरणों, नौकरियों में अनियमितता और सिवान पुलिस कार्रवाई घटना के विरोध में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेतृत्व में विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया गया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav के नेतृत्व में यह राजभवन मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ आगे बढ़ा। इस आंदोलन के जरिए विपक्ष ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था के मौजूदा हालात और युवाओं के रोजगार से जुड़े ज्वलंत सवालों पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
RJD Raj Bhavan March: गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च और बदला हुआ रूट प्लान
आरजेडी की ओर से पूर्व में इस मार्च की शुरुआत पार्टी के राज्य मुख्यालय से करने की घोषणा की गई थी, लेकिन समर्थकों और छात्रों की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए अंतिम समय में इसमें बदलाव किया गया। सुबह 10 बजे ऐतिहासिक गांधी मैदान क्षेत्र के जेपी गोलंबर से इस मार्च का आगाज हुआ।
प्रदर्शनकारियों का कारवां जेपी गोलंबर से निकलकर डाकबंगला चौराहा, तारामंडल और इनकम टैक्स गोलंबर होते हुए राजभवन की दिशा में आगे बढ़ा। इस शक्ति प्रदर्शन में आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ पार्टी के विधायक, विधान पार्षद, सांसद, पूर्व जनप्रतिनिधि और प्रदेशभर से आए हजारों छात्र कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारी हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा, दलीय झंडे और मांगों से जुड़ी तख्तियां लेकर नारेबाजी करते दिखे।
सुरक्षा के सख्त इंतजाम और पटना ट्रैफिक पुलिस का डायवर्जन
मार्च की संवेदनशीलता को देखते हुए पटना जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। शहर के मुख्य चौराहों पर भारी संख्या में पुलिस बल, महिला कांस्टेबल और दंगा रोधी दस्तों की तैनाती की गई। कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की आवाजाही को संतुलित रखने के लिए पटना ट्रैफिक पुलिस ने कई प्रमुख सड़कों पर वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई और रूट डायवर्ट किया।
विशेष रूप से पटना जंक्शन से डाकबंगला चौराहा की ओर जाने वाले रास्ते पर कुछ समय के लिए वाहनों के प्रवेश को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया। वहीं गांधी मैदान के आसपास के इलाकों में व्यावसायिक वाहनों के आवागमन पर रोक रही। प्रशासन ने आयोजकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की हिदायत दी थी, वहीं विपक्ष ने आशंका जताई कि पुलिस बल प्रयोग के जरिए आंदोलन को दबाने की कोशिश कर सकती है।
सिवान घटना बनी आंदोलन का मुख्य कारण
इस बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के केंद्र में सिवान जिले की वह विवादास्पद घटना है, जिसने पूरे राज्य में आक्रोश की लहर पैदा कर दी। प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ हो रहे राज्यव्यापी बंद के दौरान सिवान में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस दौरान सोशल मीडिया पर एक पुलिसकर्मी द्वारा अत्याधुनिक हथियार से फायरिंग करने का वीडियो सामने आया था।
यद्यपि पुलिस प्रशासन का दावा है कि स्थिति बेकाबू होने पर सिपाही ने केवल आत्मरक्षा में हवा में गोलियां चलाईं, लेकिन घटना में तीन स्थानीय युवकों के घायल होने की बात सामने आई। सरकार ने कार्रवाई करते हुए संबंधित सिपाही को निलंबित किया और जांच के आदेश दिए, साथ ही स्थानीय पुलिस अधीक्षक का स्थानांतरण भी किया गया। हालांकि, तेजस्वी यादव ने इस प्रशासनिक कार्रवाई को नाकाफी बताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक जांच और आला अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
गर्दनीबाग से गर्माया छात्र आंदोलन और राजनीतिक समर्थन
राजभवन मार्च से पूर्व पटना का गर्दनीबाग इलाका हफ़्तों से आंदोलनरत परीक्षार्थियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ था। यहां विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र और शिक्षक अभ्यर्थी डोमिसाइल नीति लागू करने, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में यूजीसी नियमों का पारदर्शी पालन करने और 70वीं बीपीएससी परीक्षा से जुड़े विवादों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे।
छात्रों के इस असंतोष को उस समय और अधिक बल मिला जब कई राजनीतिक हस्तियों ने धरना स्थल का दौरा किया। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी अभ्यर्थियों से मिलने गर्दनीबाग पहुंचे थे। वहां उन्होंने छात्रों को आश्वस्त किया था कि सड़क से लेकर सदन तक उनके हक की लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी। आरजेडी ने इसके बाद ही सिवान घटना, पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दों को एक साथ जोड़कर बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार की।
‘पेपर लीक की राजधानी बना राज्य’: तेजस्वी यादव का सरकार पर हमला
आंदोलन के दौरान अपने संबोधन में नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे प्रश्नपत्र लीक प्रकरणों के कारण राज्य की साख को भारी धक्का लगा है और परीक्षा प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है।
तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि चाहे स्कूली स्तर की बोर्ड परीक्षाएं हों या फिर उच्च पदों के लिए आयोजित होने वाली आयोग की परीक्षाएं, हर बार प्रश्नपत्र सार्वजनिक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो दशकों से अधिक समय से सत्तारूढ़ सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है और तंत्र में बैठे दोषी लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि जब तक पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं होती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
RJD Raj Bhavan March: सत्ताधारी पक्ष का रुख और प्रशासनिक दलील
दूसरी ओर, सरकार और सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने इस मार्च को विपक्ष की विशुद्ध राजनीति करार दिया है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए लगातार विधायी और प्रशासनिक सुधार किए जा रहे हैं। नई शिक्षक भर्तियों का विज्ञापन जारी कर युवाओं को रोजगार देने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
प्रशासनिक स्तर पर कहा गया है कि किसी भी नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यदि कोई तत्व कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार अभ्यर्थियों की जायज मांगों पर बातचीत के लिए सदैव तत्पर है।
RJD Raj Bhavan March: युवा असंतोष और बिहार की भावी राजनीति
बिहार में सरकारी नौकरियों और पारदर्शी प्रतियोगी परीक्षाओं का मुद्दा अत्यंत संवेदनशील रहा है। राज्य में आबादी का एक बड़ा हिस्सा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगा हुआ है। ऐसे में पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और पुलिस कार्रवाई जैसे विषय सीधे तौर पर आम परिवारों से जुड़ते हैं।
राजभवन तक निकला यह मार्च केवल एक दिवसीय राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भर नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में राज्य के राजनीतिक समीकरणों को नया आकार देने का संकेत है। युवाओं के असंतोष को राजनीतिक मंच मिलने से सरकार पर प्रशासनिक सुधार और पारदर्शी बहाली प्रक्रिया लागू करने का दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ गया है।
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