PM Kisan Yojana: 24वीं किस्त से पहले किसानों के लिए बड़ी खबर, भारत-नीदरलैंड के बीच कृषि सहयोग होगा और मजबूत

भारत-नीदरलैंड कृषि सहयोग में आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और 25 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर जोर

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PM Kisan Yojana: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Yojana) की 24वीं किस्त की प्रतीक्षा कर रहे देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए कृषि क्षेत्र से एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। भारत और नीदरलैंड ने मिलकर कृषि, उन्नत बागवानी, उच्च गुणवत्ता वाले बीज और अत्याधुनिक कृषि नवाचार के क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के बीच आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कृषि उत्पादकता में क्रांतिकारी सुधार लाने, वैश्विक विशेषज्ञता साझा करने और किसानों को विश्वस्तरीय तकनीकों से जोड़ने पर गहन सहमति बनी है।

PM Kisan Yojana: भारत और नीदरलैंड के बीच कृषि क्षेत्र को लेकर हुई उच्चस्तरीय बैठक

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नीदरलैंड के कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा एवं प्रकृति मंत्री सिल्वियो एरकेंस के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्र में चल रही मौजूदा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और भावी सहयोग की रणनीतिक रूपरेखा तैयार की गई।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार दोनों देशों ने आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक नवाचार और ज्ञान के निरंतर आदान-प्रदान के जरिए प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया है। वार्ता के दौरान जलवायु अनुकूल खेती, जल संरक्षण, बागवानी फसलों के संवर्धन और संयुक्त कृषि अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्राथमिकता के साथ चर्चा की गई ताकि छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक खेती के साधनों का सीधा लाभ मिल सके।

देशभर में स्थापित 25 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की प्रगति की समीक्षा

भारत और नीदरलैंड के संयुक्त प्रयासों से देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित किए जा रहे 25 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (उत्कृष्टता केंद्र) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। ये केंद्र मुख्य रूप से पॉलीहाउस तकनीक, संरक्षित खेती, नियंत्रित वातावरण में सब्जी एवं फलों का उत्पादन और सटीक सिंचाई प्रणालियों के प्रदर्शन व प्रशिक्षण का मुख्य जरिया बन रहे हैं।

डच कृषि तकनीक को पूरी दुनिया में आधुनिक बागवानी और ग्रीनहाउस फार्मिंग के लिए सबसे उन्नत माना जाता है। इन 25 केंद्रों के जरिए भारतीय किसानों को नीदरलैंड की अत्याधुनिक कृषि पद्धतियों, रोगाणुरोधी वातावरण में पौध तैयार करने और फसल कटाई के बाद के प्रबंधन से सीधे परिचित कराया जा रहा है, जिससे उनकी आय में टिकाऊ बढ़ोतरी हो सके।

बीज तकनीक में मील का पत्थर साबित होगा नया रोडमैप

बैठक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू बीज क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग स्थापित करना रहा। दोनों देशों के कृषि मंत्रालयों ने मिलकर इस बात पर सहमति जताई है कि बीजों की उन्नत किस्में तैयार करने और जेनेटिक सुधार के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस प्रस्तावित योजना के तहत प्राथमिक फसलों और जलवायु परिवर्तन को सहने में सक्षम बीजों की पहचान की जाएगी।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फसल का बेहतर और रिकॉर्ड उत्पादन गुणवत्तापूर्ण बीजों पर निर्भर करता है। नीदरलैंड के उन्नत बीज अनुसंधान और भारत की विशाल कृषि विविधता के इस नए गठबंधन से भारतीय किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज सुलभ दरों पर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

PM Kisan की 24वीं किस्त को लेकर क्या है ताजा अपडेट

इस बड़े कूटनीतिक और तकनीकी विकास के बीच लाभार्थी किसानों की निगाहें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त पर भी टिकी हुई हैं। कृषि मंत्रालय ने अभी तक 24वीं किस्त की आधिकारिक रिलीज डेट घोषित नहीं की है। गौरतलब है कि इससे पूर्व 23वीं किस्त 20 जून 2026 को पात्र किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए सीधे अंतरित की गई थी।

आधिकारिक पोर्टल के नियमों के अनुसार 24वीं किस्त का लाभ पाने के लिए लाभार्थी किसानों का ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा होना अनिवार्य है। साथ ही बैंक खाते का आधार से लिंक होना और भू-सत्यापन (Land Seeding) की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे किस्त की तारीख को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें और आधिकारिक पोर्टल पर अपने स्टेटस की जांच करते रहें।

PM Kisan Yojana: रणनीतिक साझेदारी से आधुनिक खेती को मिलेगा नया आयाम

भारत और नीदरलैंड के बीच कृषि सहयोग अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर पूर्णतः विज्ञान और तकनीक आधारित हो चुका है। दोनों देशों ने मई 2026 में अपने संबंधों को रणनीतिक स्तर पर ले जाने की घोषणा की थी, जिसमें टिकाऊ कृषि और आधुनिक खाद्य प्रणालियों को केंद्रीय स्थान दिया गया था।

नीदरलैंड के साथ यह मजबूत होता गठजोड़ देश के किसानों को न केवल वैश्विक स्तर की कृषि तकनीकों से जोड़ेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में उत्पादन लागत घटाकर भारतीय फसलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में भी मील का पत्थर साबित होगा।

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