Ranchi University PhD Admission 2026: रांची यूनिवर्सिटी में सीधे PhD एडमिशन का नया नियम, चार वर्षीय ग्रेजुएशन में 75% अंक हासिल करने वाले छात्र कर सकेंगे आवेदन

Ranchi University PhD Admission 2026: रांची यूनिवर्सिटी में सीधे PhD एडमिशन का नया नियम, चार वर्षीय ग्रेजुएशन में 75% अंक हासिल करने वाले छात्र कर सकेंगे आवेदन

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Ranchi University PhD Admission 2026: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए रांची यूनिवर्सिटी ने करीब डेढ़ दशक बाद पीएचडी एडमिशन से जुड़े नियमों में ऐतिहासिक संशोधन किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के वर्ष 2022 के रेगुलेशन के प्रावधानों के तहत इन नए नियमों को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। यूनिवर्सिटी के कुलपति सरोज शर्मा ने पीएचडी की डिग्री प्रदान करने के लिए न्यूनतम मानकों और प्रक्रियाओं से जुड़ी अधिसूचना जारी कर दी है। इन नए बदलावों के बाद अब शिक्षा जगत में अकादमिक गतिविधियों का दायरा काफी व्यापक हो गया है, जिससे उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं को अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने में आसानी होगी।

Ranchi University PhD Admission 2026: चार वर्षीय ग्रेजुएशन के बाद बिना मास्टर डिग्री के सीधा प्रवेश

रांची यूनिवर्सिटी के नए और संशोधित नियमों के अनुसार अब चार वर्षीय स्नातक यानी ग्रेजुएशन कोर्स में कम से कम पचहत्तर प्रतिशत अंक हासिल करने वाले छात्र सीधे शोध कार्य के लिए आवेदन कर सकेंगे। ऐसे मेधावी छात्रों के लिए पीएचडी में एडमिशन लेने के वास्ते पोस्ट ग्रेजुएशन यानी स्नातकोत्तर की डिग्री होना अनिवार्य नहीं रहेगा। इसके अलावा पारंपरिक रूप से दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में कम से कम पचहत्तर फीसदी के बजाय पचहत्तर प्रतिशत अंक लाने वाले उम्मीदवार भी इसके लिए पात्र होंगे। हालांकि, आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को नियमों के तहत न्यूनतम पात्रता अंकों में पांच प्रतिशत की विशेष छूट दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है, ताकि समाज के हर वर्ग के छात्रों को इसका पूरा लाभ मिल सके।

प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होगा चयन

विश्वविद्यालय के नए प्रावधानों के तहत पीएचडी में दाखिला केवल प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार यानी इंटरव्यू के माध्यम से ही संभव होगा। प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की फाइनल मेरिट लिस्ट परीक्षा और इंटरव्यू में उनके द्वारा प्राप्त किए गए अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी, जिसमें दोनों का वेटेज सत्तर और तीस का रखा गया है। एंट्रेंस टेस्ट में कुल पूछे जाने वाले सवालों में आधे प्रश्न रिसर्च मेथोडोलॉजी से जुड़े होंगे जबकि बाकी आधे सवाल संबंधित विषय पर आधारित होंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी नेट या जेआरएफ उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों को लिखित प्रवेश परीक्षा से पूरी तरह छूट दी गई है, और उनका चयन सीधे साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा।

शोध की समय सीमा और महिला शोधार्थियों के लिए विशेष प्रावधान

पीएचडी में एडमिशन मिलने के बाद प्रत्येक रिसर्चर को बारह क्रेडिट का कोर्स वर्क सफलताપూర్वक पूरा करना अनिवार्य होगा, जिसके बाद ही वे अपने मुख्य शोध कार्य को आगे बढ़ा सकेंगे। नए नियमों के अनुसार इस डिग्री को पूरा करने का न्यूनतम समय तीन वर्ष निर्धारित किया गया है, जबकि अधिकतम अवधि छह वर्ष तक हो सकती है। इसके बाद भी यदि जरूरत पड़ी तो रिसर्चर दो साल के लिए दोबारा रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं, हालांकि इसके बाद किसी अन्य विस्तार का प्रावधान नहीं रखा गया है। महिला शोधार्थियों और चालीस प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले छात्रों को विशेष राहत देते हुए दो साल की अतिरिक्त छूट दी गई है। इसके अलावा महिला शोधकर्ताओं को पूरे शोध कार्यकाल के दौरान दो सौ चालीस दिन तक मातृत्व या चाइल्ड केयर लीव मिलने का भी प्रावधान किया गया है।

Ranchi University PhD Admission 2026: अकादमिक जगत में बदलाव की शुरुआत और आगे की प्रक्रिया

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम से उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि चार साल के स्नातक पाठ्यक्रम के बाद सीधे शोध का अवसर मिलने से छात्रों का बहुमूल्य समय बचेगा और वे कम उम्र में ही वैज्ञानिक तथा शैक्षणिक अनुसंधान से जुड़ सकेंगे। यूनिवर्सिटी के इस नए फैसले से न केवल झारखंड बल्कि आसपास के राज्यों के विद्यार्थियों को भी अपनी उच्च शिक्षा की योजना बनाने में बड़ी मदद मिलेगी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस नई व्यवस्था के तहत आगामी सत्र में कितनी सीटों पर आवेदन आते हैं और छात्र इस सुनहरे अवसर का किस प्रकार लाभ उठाते हैं।

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