Rain Alert June 2026: दिल्ली-यूपी से राजस्थान तक 3 दिन आंधी-तूफान और ओले, केरल में 4 जून को मानसून की दस्तक, IMD ने जारी किया येलो अलर्ट

3 दिन आंधी-ओले की चेतावनी, केरल में 4 जून को मानसून दस्तक, IMD का येलो अलर्ट जारी

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Rain Alert June 2026: देश के उत्तर, पश्चिम और मध्य भागों में मौसम की चाल एक बार फिर तेजी से बदलने वाली है। चिलचिलाती धूप और उमस के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के लगभग 15 राज्यों के लिए एक बड़ा अपडेट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, 3 जून 2026 से अगले तीन दिनों तक दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत देश के एक बड़े हिस्से में तेज रफ्तार आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश होने की आशंका है। इस दौरान कुछ संवेदनशील इलाकों में ओलावृष्टि (ओले गिरना) की भी प्रबल संभावना जताई गई है, जिसके चलते जान-माल और फसलों की सुरक्षा को लेकर येलो अलर्ट जारी कर दिया गया है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर-पश्चिम भारत के वायुमंडल में एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से मैदानी इलाकों में 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में पिछले दिनों हुई हल्की बूंदाबांदी से जो मामूली राहत मिली थी, वह अब बड़े बदलाव में बदलने जा रही है। आज दोपहर के बाद से ही राजधानी के आसमान में घने बादलों की आवाजाही शुरू होने और देर शाम तक तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। इस दौरान अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की जाएगी जो 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच सिमट सकता है।

दिल्ली और एनसीआर में धूल भरी आंधी के साथ बदलेगा मिजाज

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) जैसे गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में आज मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने जा रहा है। मौसम विभाग की रिपोर्ट कहती है कि दिन के शुरुआती हिस्से में उमस परेशान करेगी, लेकिन दोपहर ढलते ही तेज हवाओं का दौर शुरू हो जाएगा। एनसीआर के कई इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से धूल भरी आंधियां चलने की आशंका है, जिससे सड़कों पर दृश्यता (विजिबिलिटी) कम हो सकती है। इसके साथ ही गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली चमकने और मध्यम स्तर की बारिश होने की पूरी संभावना बनी हुई है।

इस संभावित मौसमी बदलाव को देखते हुए प्रशासन और मौसम विभाग ने आम जनता को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे विशेष रूप से सुबह 10 बजे से लेकर शाम 6 बजे के बीच, जब आंधी की तीव्रता सबसे अधिक हो सकती है, अनावश्यक रूप से घरों या सुरक्षित इमारतों से बाहर न निकलें। यात्रा करने वाले वाहन चालकों को भी हिदायत दी गई है कि वे आंधी के दौरान अपने वाहनों को पेड़ों या कमजोर होर्डिंग्स के नीचे पार्क न करें, क्योंकि तेज हवाओं के कारण इनके गिरने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। 4 और 5 जून को भी दिल्ली-एनसीआर में इसी तरह की आंख-मिचौली देखने को मिल सकती है।

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों में ओलावृष्टि को लेकर प्रशासन मुस्तैद

उत्तर प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्रों में इस नए मौसमी सिस्टम का असर सबसे व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी आंधी-तूफान के साथ ओले गिरने की गंभीर चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी के दायरे में मथुरा, आगरा, मेरठ, एटा, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और महामाया नगर जैसे प्रमुख कृषि प्रधान जिले शामिल हैं। इन इलाकों में चक्रवाती हवाओं की गति सामान्य से कहीं अधिक हो सकती है, जो कमजोर निर्माणों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा सकती है।

दूसरी तरफ पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे प्रयागराज, वाराणसी और राजधानी लखनऊ में भी मौसम शुष्क नहीं रहेगा। लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में कल शाम से ही बादलों की आवाजाही का सिलसिला शुरू हो चुका है, जिससे आज अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास सिमटने की उम्मीद है। हालांकि, इस बारिश और ओलावृष्टि के कारण उत्तर प्रदेश के किसानों की चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को तुरंत अपनी तैयार फसलों और कटी हुई उपज को सुरक्षित थ्रेसिंग क्षेत्रों या तिरपाल से ढककर रखने का निर्देश दिया है, ताकि ओलों और पानी से अनाज खराब न हो।

बिहार और राजस्थान में तेज हवाओं का तांडव और जलभराव का खतरा

बिहार के मैदानी और तराई वाले इलाकों में भी अगले 48 से 72 घंटों के दौरान प्रकृति का कड़ा रुख देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग पटना के अनुसार, राज्य के मध्य और उत्तरी हिस्सों में स्थित पटना, गया, नवादा, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। इन क्षेत्रों में 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली आंधी न सिर्फ पेड़ों को उखाड़ सकती है बल्कि निचले इलाकों में अचानक तेज बारिश के कारण जलभराव की स्थिति भी पैदा कर सकती है। आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं को रोकने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को खेतों में अकेले न रहने की चेतावनी दी है।

रेगिस्तानी राज्य राजस्थान में भी इस बार पश्चिमी विक्षोभ का असर चौकाने वाला रहने वाला है। राज्य के पश्चिमी हिस्से, जो आमतौर पर सूखे और भीषण लू की चपेट में रहते हैं, वहां 3 से 5 जून के बीच तेज धूल भरी हवाओं के साथ बादलों की गर्जना और बारिश होने के आसार हैं। पूर्वी राजस्थान के जयपुर, अलवर और भरतपुर संभागों में भी 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भविष्यवाणी की गई है। इस मौसमी बदलाव से राज्य में चल रही भीषण हीटवेव के प्रकोप से तो राहत मिलेगी, लेकिन अचानक आने वाले इस तूफान से शहरी और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को संभालना एक चुनौती होगी।

देश के अन्य 11 राज्यों में भी येलो अलर्ट का साया

मौसम का यह व्यापक बदलाव केवल दो-चार राज्यों तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। आईएमडी द्वारा जारी राष्ट्रीय बुलेटिन के अनुसार, देश के कुल 15 राज्यों में किसी न किसी रूप में इस मौसमी उथल-पुथल का असर दिखेगा। पहाड़ी राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तेज हवाओं के साथ भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में मूसलाधार बारिश के कारण भूस्खलन (लैंडस्लाइड) का खतरा बढ़ गया है, जिससे चारधाम यात्रा और पर्यटन मार्गों पर चलने वाले वाहनों को नियंत्रित किया जा रहा है। इसके अलावा हरियाणा और पंजाब के मैदानी भागों में भी धूल भरी आंधी का दौर जारी रहेगा।

पूर्वी और मध्य भारत के राज्यों की बात करें तो झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में प्री-मानसून की गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं। इन राज्यों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जिससे तापमान में 3 से 5 डिग्री तक की भारी गिरावट देखी जा सकती है। दक्षिण भारत के तटीय राज्य तमिलनाडु और केरल में भी बादलों का घेरा पूरी तरह मजबूत हो चुका है, जहां भारी मानसूनी वर्षा की शुरुआत होने की कगार पर है। इन सभी राज्यों के जिला प्रशासनों को किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है।

केरल के तट पर 4 जून को टकराएगा दक्षिण-पश्चिम मानसून

तमाम आंधी और तूफान की खबरों के बीच देश की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर भी सामने आ रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक ने पुष्टि की है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति की परिस्थितियां अब पूरी तरह से अनुकूल हो चुकी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी 4 जून को मानसून आधिकारिक रूप से केरल के तटीय इलाकों में अपनी दस्तक दे देगा। हालांकि, सामान्य तौर पर मानसून के आगमन की तिथि 1 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने विपरीत हवाओं के दबाव के कारण इसमें तीन दिनों की मामूली देरी दर्ज की गई है।

राहत की बात यह है कि देरी के बावजूद मानसून के आगे बढ़ने की रफ्तार काफी संतोषजनक देखी जा रही है। वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम अरब सागर, संपूर्ण लक्षद्वीप द्वीप समूह, केरल के बाहरी तटीय हिस्सों, दक्षिणी तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी के मध्य भागों में मानसूनी हवाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि केरल में प्रवेश करने के बाद यदि इन हवाओं को हिंद महासागर से पर्याप्त नमी मिलती रही, तो यह बिना रुके देश के आंतरिक हिस्सों की ओर बढ़ेंगी, जिससे समय पर पूरे देश को भीषण गर्मी से मुक्ति और पर्याप्त पानी मिल सकेगा।

मौसम वैज्ञानिकों की कृषि और आम जनता को महत्वपूर्ण गाइडलाइन

अचानक आने वाले इस मौसमी बदलाव और आंधी-तूफान को देखते हुए मौसम विभाग और कृषि मंत्रालयों ने संयुक्त रूप से एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को विशेष रूप से आगाह किया गया है कि वे इस दौरान ऊंचे पेड़ों, बिजली के ट्रांसफार्मर या खुले मैदानों में शरण लेने से बचें। यदि आंधी के समय वे खेत में काम कर रहे हों, तो तुरंत किसी पक्के मकान या ढके हुए ऊंचे स्थान पर चले जाएं। ओलावृष्टि की संभावना वाले क्षेत्रों के पशुपालकों को अपने मवेशियों को खुले आसमान के नीचे बांधने के बजाय कंक्रीट या मजबूत शेड के नीचे रखने की सलाह दी गई है।

शहरी क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों के लिए भी सुरक्षा उपाय जारी किए गए हैं। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने घरों की छतों पर रखी हल्की वस्तुओं, गमलों या टिन शेड को पहले से ही मजबूती से बांध लें ताकि वे उड़कर किसी राहगीर पर न गिरें। इसके अलावा, बिजली विभाग को भी निर्देश दिया गया है कि तूफान के दौरान शॉर्ट सर्किट और तारों के टूटने से होने वाले हादसों को रोकने के लिए संवेदनशील फीडरों की बिजली आपूर्ति को अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाए। नागरिक अपने स्मार्टफोन पर मौसम विभाग के आधिकारिक ऐप्स के जरिए पल-पल की लाइव सैटेलाइट ट्रैकिंग देखते रहें ताकि वे अपनी यात्राओं को सुरक्षित रूप से प्लान कर सकें।

मानसून 2026 का दीर्घकालिक पूर्वानुमान और इसके मायने

दीर्घकालिक आर्थिक और कृषि परिदृश्य के नजरिए से देखें तो साल 2026 का मानसून देश के लिए बेहद उम्मीदों भरा रहने वाला है। आईएमडी के शुरुआती मॉडल विश्लेषणों से संकेत मिले हैं कि इस साल पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान होने वाली कुल वर्षा अपने सामान्य कोटे के आसपास या उससे थोड़ी बेहतर (Normal to Above Normal) रह सकती है। अल नीनो के प्रभाव के धीरे-धीरे कमजोर होने और ला नीना की परिस्थितियों के सक्रिय होने की संभावना के कारण वैज्ञानिक मान रहे हैं कि जुलाई और अगस्त के मुख्य महीनों में देश के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश होगी।

समय पर और बेहतर मानसून होने का सीधा सकारात्मक असर भारत के कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा, जहां किसान खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, बाजरा, कपास और तिलहन की बुआई के लिए अपनी जमीनों को तैयार कर चुके हैं। पर्याप्त मानसूनी बारिश से न केवल ग्रामीण इलाकों में रोजगार और समृद्धि बढ़ेगी, बल्कि देश के बड़े जलाशयों और बांधों का जलस्तर भी सुधरेगा, जिससे आने वाले सर्दियों के महीनों में जल संकट और बिजली उत्पादन की समस्याओं से राहत मिलेगी। हालांकि, जून की इस शुरुआती आंधी-तूफान और ओलावृष्टि से पैदा होने वाले तात्कालिक अवरोधों से पूरी सावधानी और मुस्तैदी के साथ निपटना होगा, ताकि मानसून के इस पावन आगमन का स्वागत देश सुरक्षित और खुशहाल तरीके से कर सके।

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