Premature Graying Hair: 20 की उम्र में ही सफेद हो रहे हैं बाल? इन गलतियों को तुरंत करें बंद

युवा उम्र में बाल सफेद होने की समस्या? इन 5 गलतियों को तुरंत रोकें, बालों को स्वस्थ रखें

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Premature Graying Hair: आजकल के युवाओं में 20 से 25 साल की उम्र में ही बाल सफेद होने की समस्या बेहद तेजी से बढ़ती जा रही है। पहले के समय में बालों का पकना या सफेद होना केवल उम्र बढ़ने का एक स्वाभाविक संकेत माना जाता था, लेकिन आज की आधुनिक जीवनशैली में यह युवाओं के बीच एक आम बीमारी का रूप ले चुका है। हमारे बालों का प्राकृतिक काला या भूरा रंग मेलानिन नामक एक विशेष पिगमेंट के कारण आता है। जब शरीर की कोशिकाएं इस पिगमेंट का उत्पादन कम कर देती हैं, तो बाल अपनी रंगत खोने लगते हैं और सफेद दिखने लगते हैं। चिकित्सा विज्ञान में समय से पहले बालों के इस तरह सफेद होने की प्रक्रिया को प्रीमेच्योर ग्रेयिंग (Premature Hair Greying) कहा जाता है।

यह समस्या न केवल किसी व्यक्ति की बाहरी दिखावट और लुक पर बुरा असर डालती है, बल्कि इसके कारण युवाओं का मानसिक आत्मविश्वास भी काफी कमजोर होने लगता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते अपनी कुछ गलत दैनिक आदतों को सुधार लिया जाए, तो इस समस्या को बढ़ने से काफी हद तक रोका जा सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं उन प्रमुख गलतियों के बारे में जिन्हें तुरंत बंद करना आपके बालों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

जेनेटिक्स का बड़ा रोल

यदि आपके परिवार में माता-पिता, दादा-दादी या किसी अन्य करीबी रक्त संबंधी के बाल भी कम उम्र में ही सफेद होने शुरू हो गए थे, तो आनुवंशिक (जेनेटिक) कारणों से यह समस्या आपको भी अपनी चपेट में ले सकती है। जेनेटिक झुकाव के कारण शरीर में मेलानिन पिगमेंट बनाने वाली ग्रंथियां उम्र के एक निश्चित पड़ाव से पहले ही प्रभावित या निष्क्रिय हो जाती हैं।

यद्यपि आनुवंशिक कारणों से होने वाले इस बदलाव को पूरी तरह से जड़ से रोका नहीं जा सकता है, लेकिन अपनी दैनिक आदतों में सकारात्मक और स्वस्थ बदलाव करके इसकी गति को काफी हद तक धीमा जरूर किया जा सकता है। यदि आपके परिवार में ऐसी कोई पुरानी मेडिकल हिस्ट्री रही है, तो आपको शुरुआत में ही किसी अच्छे त्वचा रोग विशेषज्ञ (ट्राइकोलॉजिस्ट) से मिलकर उचित परामर्श लेना चाहिए।

तनाव बढ़ा रहा समस्या

आज की अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में मानसिक तनाव मनुष्य के जीवन का एक हिस्सा बन चुका है। युवाओं पर पढ़ाई, करियर, नौकरी के टारगेट या फिर व्यक्तिगत रिश्तों का बढ़ता हुआ दबाव उनके बालों को सबसे ज्यादा गंभीर नुकसान पहुँचा रहा है। जब कोई व्यक्ति लगातार अत्यधिक मानसिक स्ट्रेस या अवसाद से गुजरता है, तो उसके शरीर के भीतर कई महत्वपूर्ण हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं, जिसका सीधा बुरा असर मेलानिन के उत्पादन पर पड़ता है।

इस मानसिक तनाव को कम करने और अपने बालों की प्राकृतिक रंगत को बचाने के लिए दैनिक जीवन में नियमित रूप से योग, प्राणायाम, ध्यान (मेडिटेशन) और रात को एक अच्छी गहरी नींद लेना बेहद अनिवार्य माना गया है। इसके साथ ही हर रोज सुबह हल्का व्यायाम करें और अपने मन को खुश रखने के लिए अपनी मनपसंद हॉबीज को समय दें, जिससे बालों की सेहत में तेजी से सुधार होने लगता है।

पोषण की कमी सबसे बड़ी वजह

हमारे शरीर और बालों के विकास के लिए कुछ विशेष पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जब आहार में विटामिन बी12, विटामिन डी, आयरन, कॉपर, जिंक और प्रोटीन जैसे आवश्यक तत्वों की भारी कमी हो जाती है, तो बालों की जड़ें अंदर से कमजोर होकर अपना रंग खोने लगती हैं। आज के युवाओं में बढ़ता हुआ फास्ट फूड, जंक फूड का क्रेज और अनियमित डाइट प्लान इस पोषण की कमी को और अधिक बढ़ावा दे रहा है।

बालों को असमय सफेद होने से बचाने के लिए अपनी दैनिक थाली में एक संतुलित और पौष्टिक आहार को प्राथमिकता दें। अपने भोजन में प्रचुर मात्रा में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे मौसमी फल, दालें, अंकुरित अनाज, नट्स और डेयरी प्रोडक्ट्स को अनिवार्य रूप से शामिल करें। आयुर्वेद के अनुसार आंवला, नारियल का पानी और भीगे हुए बादाम का नियमित सेवन बालों को लंबे समय तक काला और चमकदार बनाए रखने में रामबाण साबित होता है।

केमिकल प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल

आजकल के युवाओं में बालों पर नए-नए फैशन ट्रेंड्स आजमाने की होड़ लगी हुई है। बार-बार बालों में तरह-तरह के रासायनिक हेयर कलर लगाना, ब्लीच करना, स्ट्रेटनिंग कराना या फिर महंगे केमिकल बेस्ड हेयर ट्रीटमेंट्स लेना बालों की बाहरी और आंतरिक संरचना को पूरी तरह नष्ट कर देता है। इन प्रोडक्ट्स में मौजूद बेहद खतरनाक केमिकल्स बालों के भीतर छिपे मेलानिन पिगमेंट को स्थाई रूप से नष्ट कर देते हैं।

अपने बालों की सुरक्षा के लिए कृत्रिम चीजों के बजाय पूरी तरह से प्राकृतिक और घरेलू तरीके अपनाने का प्रयास करें। बालों को धोने के लिए हमेशा किसी सल्फेट-मुक्त हल्के हर्बल शैंपू का ही चुनाव करें और तेज धूप में बाहर निकलते समय बालों को सूती कपड़े से ढककर रखें। इसके अलावा हफ्ते में कम से कम एक बार शुद्ध नारियल के तेल या भृंगराज तेल से बालों की जड़ों की हल्के हाथों से मालिश अवश्य करें।

धूम्रपान और शराब का नुकसान

सिगरेट में मौजूद निकोटीन और अन्य नशीले तत्व हमारे शरीर की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देते हैं, जिससे बालों के फॉलिकल्स तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्वों की पर्याप्त सप्लाई पूरी तरह से बाधित हो जाती है। ठीक इसी प्रकार अत्यधिक शराब का सेवन भी शरीर को अंदर से डिहाइड्रेट करता है और लीवर व पाचन क्रिया को कमजोर बनाता है, जिससे बालों की जड़ें समय से पहले ही बूढ़ी और कमजोर होने लगती हैं।

यदि आप सचमुच अपने बालों को असमय सफेद और झड़ने से बचाना चाहते हैं, तो धूम्रपान और शराब की इन बुरी आदतों को तुरंत और पूरी तरह से छोड़ देना ही आपके लिए सबसे समझदारी भरा कदम होगा। एक स्वस्थ और नशामुक्त जीवनशैली अपनाने से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे पूरे शरीर के साथ-साथ आपके बालों को भी नया जीवन प्राप्त होता है।

निष्कर्ष: गलतियां सुधारें, बालों को स्वस्थ रखें

20 से 25 साल की शुरुआती युवा उम्र में बालों का सफेद होना किसी भी दृष्टिकोण से एक सामान्य लक्षण नहीं माना जा सकता है। ऊपर विस्तार से बताई गई इन मुख्य गलतियों और खराब आदतों को यदि आप आज से ही पूरी तरह बंद कर देते हैं, तो आप इस समस्या पर आसानी से काबू पा सकते हैं। एक अनुशासित जीवनशैली, संतुलित खान-पान और उचित देखभाल के जरिए आप अपने बालों को ताउम्र काला, घना और मजबूत बनाए रख सकते हैं।

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