PM Narendra Modi: पीएम मोदी ने Economic Times World Leaders Forum में कहा, राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता भारत की सबसे बड़ी ताकत, सुधारों से विकास को मिली नई रफ्तार

पीएम मोदी ने राजनीतिक स्थिरता, सुधारों और भारत की आर्थिक मजबूती को बताया बड़ी ताकत

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PM Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ को संबोधित करते हुए भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, राजनीतिक स्थिरता और प्रशासनिक सुधारों का एक व्यापक और स्पष्ट खाका प्रस्तुत किया। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनावों, आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितताओं और विभिन्न देशों के बीच संसाधनों को हथियार बनाने की बढ़ती प्रवृत्तियों के बीच प्रधानमंत्री ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आशा, विकास और दृढ़ विश्वास का सबसे चमकदार केंद्र करार दिया।
फोरम में उपस्थित वैश्विक नीति निर्माताओं, शीर्ष उद्योगपतियों, अर्थशास्त्रियों और वैश्विक विचारकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी के भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक नीतियों में बनी निरंतरता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में सुधार किसी राजनीतिक मजबूरी या दबाव में नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि यह देश के विकास और नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता और दृढ़ विश्वास का परिणाम है।

PM Narendra Modi: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता

प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिदृश्य की जटिलताओं का विश्लेषण करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया विकास की धीमी गति, बढ़ती महंगाई और आपसी अविश्वास के माहौल से जूझ रही है। कई विकसित और विकासशील देश राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं, जिसके कारण उनकी आर्थिक नीतियों में बार-बार बदलाव देखने को मिलते हैं। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी भारत ने दुनिया के सामने यह साबित किया है कि एक मजबूत, स्थिर और दूरदर्शी लोकतांत्रिक सरकार कैसे देश को निरंतर प्रगति के पथ पर आगे ले जा सकती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक निवेशक और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान आज भारत को एक भरोसेमंद, सुरक्षित और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं। भारत की राजनीतिक स्थिरता ने निवेशकों के भीतर यह विश्वास पैदा किया है कि यहां लिए गए नीतिगत निर्णय अल्पकालिक नहीं होते, बल्कि वे दशकों के भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं। 2014 के बाद से लागू किए गए संरचनात्मक सुधारों ने देश की अर्थव्यवस्था की बुनियादी नींव को इतना सुदृढ़ कर दिया है कि वह किसी भी वैश्विक झटके को आसानी से झेलने में सक्षम है।

लाल किले के विजन का उल्लेख: सात प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा भविष्य का फोकस

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम दिए गए अपने संबोधन का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने रेखांकित किया कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को सिद्ध करने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को सात प्रमुख और भविष्योन्मुखी क्षेत्रों के इर्द-गिर्द केंद्रित किया जा रहा है। इन मुख्य क्षेत्रों में उन्नत मैन्युफैक्चरिंग, आधुनिक कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन, ग्रीन इकोनॉमी तथा समुद्री संसाधनों से जुड़ी ब्लू इकोनॉमी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सरकार केवल वर्तमान की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही है, बल्कि ‘नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स’ यानी अगली पीढ़ी के नीतिगत सुधारों को धरातल पर उतार रही है। इन सुधारों का प्राथमिक उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण का एक मजबूत केंद्र बनाना और घरेलू उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है ताकि भविष्य में आने वाली किसी भी वैश्विक तकनीकी या आर्थिक चुनौती का देश मजबूती से सामना कर सके।

पुरानी व्यवस्था बनाम नई सोच: प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट से प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव तक का सफर

प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों के दौर की आर्थिक नीतियों और अपनी सरकार की सोच के बीच के बुनियादी अंतर को एक बेहद रोचक और प्रभावी उदाहरण के जरिए समझाया। उन्होंने कहा कि पहले के समय में देश में एक विकृत और संकीर्ण मानसिकता वाली व्यवस्था प्रभावी थी, जिसे ‘प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट’ (PLP) कहा जा सकता है। उस व्यवस्था में यदि कोई उद्यम, व्यापारी या फैक्ट्री अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक उत्पादन करने का प्रयास करती थी, तो उसे सरकार द्वारा नोटिस भेजे जाते थे, दंडित किया जाता था और उत्पादित अतिरिक्त माल को नष्ट करने तक के लिए विवश किया जाता था।
उन्होंने कहा कि उस पुरानी सोच का मूल उद्देश्य देश में जानबूझकर आवश्यक वस्तुओं की किल्लत बनाए रखना था ताकि आम नागरिक और उद्योग जगत हमेशा सरकारी अनुग्रह और अधिकारियों के आगे हाथ जोड़े खड़ा रहे। इस व्यवस्था ने देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों का गला घोंट दिया था। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने इस नकारात्मक सोच को पूरी तरह समाप्त करते हुए ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ (PLI) योजना की शुरुआत की है। आज सरकार उद्यमियों को रिकॉर्ड उत्पादन करने, निर्यात बढ़ाने और नई नौकरियां पैदा करने के लिए करोड़ों रुपये का सीधा वित्तीय प्रोत्साहन दे रही है। मेक इन इंडिया का उपहास उड़ाने वालों की सोच को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि नीतियों में आया यह बुनियादी बदलाव देश के औद्योगिक पुनरुत्थान का आधार बना है।

गवर्नेंस सुधार और रेगुलेशन की नई फिलॉसफी: विश्वास आधारित प्रशासन

प्रधानमंत्री ने प्रशासनिक सुधारों की चर्चा करते हुए कहा कि पूर्व में सरकारों की आदत केवल सुधारों की लोकलुभावन घोषणाएं करके उन्हें ठंडे बस्ते में डाल देने की होती थी। वर्तमान सरकार ने गवर्नेंस के हर पहलू में क्रांतिकारी बदलाव लाने का एक स्पष्ट और पारदर्शी रोडमैप तैयार किया है। उन्होंने बताया कि 21वीं सदी के नए भारत में सरकार केवल पुराने कानूनों और नियमों को नहीं बदल रही है, बल्कि रेगुलेशन की पूरी दार्शनिक सोच (Philosophy) को ही बदल रही है।
प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताया कि पहले प्रशासनिक दृष्टिकोण ‘प्रोहिबिटेड अनलेस परमिटेड’ (जब तक विशेष अनुमति न हो तब तक सब कुछ प्रतिबंधित) का था, जिसमें हर छोटे-बड़े काम के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। सरकार ने इस औपनिवेशिक मानसिकता को बदलकर ‘परमिटेड अनलेस प्रोहिबिटेड’ (जब तक विशेष रूप से मना न किया गया हो तब तक सब कुछ अनुमत) के सिद्धांत को लागू किया है। इस दृष्टिकोण ने नौकरशाही की अनावश्यक बाधाओं, लालफीताशाही और बेवजह के कंप्लायंस के बोझ को समाप्त कर दिया है। आज सरकार और देश के नागरिकों व उद्यमियों के बीच का संबंध अविश्वास पर नहीं, बल्कि परस्पर विश्वास और पारदर्शिता पर टिका हुआ है।

रेलवे सुरक्षा में ऐतिहासिक बदलाव और इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण

संबोधन में प्रधानमंत्री ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक सुरक्षा में आए ऐतिहासिक सुधारों का तथ्यात्मक विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि भारतीय रेल के नेटवर्क को आधुनिक और मानवीय भूलों से मुक्त बनाने के लिए मिशन मोड में काम किया गया है। आज देश भर के 6,500 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली सफलतापूर्वक स्थापित की जा चुकी है, जिससे मानवीय चूक के कारण होने वाली ट्रेन दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगी है।
इसके साथ ही देश भर के सभी ब्रॉड गेज रेलवे नेटवर्कों से मानवरहित समपार फाटकों (अनमैन्ड क्रॉसिंग) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जहां पूर्व में प्रतिवर्ष हजारों निर्दोष लोगों की जान चली जाती थी। इन ठोस और सुनियोजित सुरक्षा उपायों का ही परिणाम है कि देश में गंभीर रेल दुर्घटनाओं के मामलों में 90 प्रतिशत तक की अभूतपूर्व कमी दर्ज की गई है। 12 वर्ष पूर्व जहां देश में हर वर्ष औसतन लगभग 150 रेल हादसे दर्ज होते थे, वहीं आधुनिक सुरक्षा तकनीकों के कारण यह संख्या घटकर मात्र 12 से 15 तक सीमित रह गई है।

संसदीय कार्यप्रणाली और जनहितकारी कानूनों का निर्माण

संसदीय व्यवस्था और लोकतांत्रिक कामकाज की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने हाल ही में संपन्न हुए संसद के मानसून सत्र का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोधियों और विपक्षी दलों द्वारा लगातार पैदा किए जाने वाले गतिरोधों और हंगामों के बावजूद सरकार ने देश के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को रुकने नहीं दिया।
उन्होंने हाल ही में संसद द्वारा पारित किए गए ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल 2026’ का उदाहरण देते हुए कहा कि बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली को डिजिटल युग के अनुकूल बनाने के लिए ऐसे कड़े और आधुनिक कानूनों का निर्माण अत्यंत आवश्यक था। सरकार का स्पष्ट ध्येय है कि राजनीतिक बाधाओं की परवाह किए बिना देश के नागरिकों के कल्याण और आर्थिक सुधारों के लिए आवश्यक विधायी कार्य निरंतर और निर्बाध रूप से चलते रहने चाहिए।

PM Narendra Modi: वैश्विक मंच पर ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ का व्यावहारिक क्रियान्वयन

वैश्विक संदर्भों में भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते कुछ वर्षों के वैश्विक घटनाक्रमों ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था अलग-थलग रहकर विकसित नहीं हो सकती। आज संपूर्ण विश्व का भविष्य एक-दूसरे के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। भारत ने अपनी जी20 अध्यक्षता के दौरान ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ (एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य) का जो मानवीय दृष्टिकोण दुनिया के समक्ष रखा था, वह आज की भू-राजनीतिक चुनौतियों का एकमात्र स्थायी समाधान है।
प्रधानमंत्री ने दोहराया कि भारत अपनी घरेलू शक्ति, राजनीतिक स्थिरता और सतत विकास के जरिए न केवल अपने 140 करोड़ नागरिकों का जीवन स्तर सुधार रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता और खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा में भी एक अग्रणी और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में अपना योगदान दे रहा है। भारत की विकास यात्रा विश्व के अन्य विकासशील देशों के लिए भी आशा और स्वावलंबन का एक नया मार्ग प्रशस्त कर रही है।

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