Ovarian Cancer: साइलेंट किलर है ओवेरियन कैंसर, इन 5 शुरुआती संकेतों को महिलाएं भूलकर भी न करें इग्नोर, समय पर जांच से बचेगी जान

Ovarian Cancer: महिलाओं के लिए 'साइलेंट किलर' है अंडाशय का कैंसर, ब्लोटिंग और बार-बार यूरिन आना हो सकते हैं शुरुआती संकेत।

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Ovarian Cancer: महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियों में ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) सबसे खतरनाक और चिंताजनक रोगों में से एक माना जाता है। चिकित्सा जगत में इसे ‘साइलेंट किलर’ का नाम दिया गया है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि महिलाएं अक्सर उन्हें गैस, अपच, मासिक धर्म का तनाव या सामान्य कमजोरी समझकर पूरी तरह नजरअंदाज कर देती हैं। ऑन्कोलॉजिस्ट्स और स्वास्थ्य संगठनों द्वारा जारी ताजा चेतावनियों के मुताबिक, पेट फूलना, भूख में कमी और बार-बार यूरिन आना जैसे सामान्य दिखने वाले संकेत वास्तव में ओवेरियन कैंसर की शुरुआत हो सकते हैं। समय रहते इन संकेतों की पहचान न होने से कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल जाता है, जिससे इलाज बेहद जटिल हो जाता है।

Ovarian Cancer: क्यों खतरनाक माना जाता है अंडाशय का कैंसर

ओवेरियन कैंसर महिलाओं के प्रजनन तंत्र के मुख्य अंग यानी ओवरी (अंडाशय) में कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होता है। भारत समेत दुनियाभर में हर साल इस बीमारी के कारण हजारों महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) के कैंसर की तरह ओवेरियन कैंसर का जल्द पता लगाने के लिए कोई रूटीन स्क्रीनिंग टेस्ट जैसे पैप स्मीयर उपलब्ध नहीं है। इसके लक्षण तब तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आते जब तक कि ट्यूमर का आकार काफी बड़ा नहीं हो जाता या वह पेट के निचले हिस्से (पेल्विस) में फैल नहीं जाता।

अस्पतालों के गायनेकोलॉजी विभागों से आने वाली रिपोर्ट्स बताती हैं कि ओवेरियन कैंसर के लगभग सत्तर प्रतिशत मामलों का पता तीसरी या चौथी स्टेज में चलता है। इसका मुख्य कारण जागरूकता की भारी कमी और लक्षणों की आम बनावट है। मध्यम और वरिष्ठ उम्र की महिलाओं के साथ-साथ अब युवा लड़कियों में भी इसके मामले देखे जा रहे हैं, जो इस बीमारी के बदलते स्वरूप की तरफ इशारा करते हैं। समय पर रोग की पहचान ही इस जानलेवा बीमारी से बचने का एकमात्र और सबसे प्रभावी रास्ता है।

पेट फूलना और ब्लोटिंग की समस्या कहीं बड़ी बीमारी का इशारा तो नहीं

आमतौर पर हर महिला को खानपान की गड़बड़ी या पीरियड्स के आसपास पेट फूलने की समस्या का सामना करना पड़ता है। लेकिन अगर पेट लगातार कई हफ्तों तक फूला हुआ महसूस हो और गैस की दवाइयां लेने के बाद भी ब्लोटिंग कम होने का नाम न ले, तो यह बेहद गंभीर संकेत है। ट्यूमर के बढ़ने के कारण पेट के भीतर तरल पदार्थ (एसाइटिस) जमा होने लगता है, जिससे अचानक पेट का आकार बढ़ने लगता है और रोजमर्रा के कपड़े कमर के पास से टाइट होने लगते हैं।

इसके अलावा, यदि सामान्य दिनों की तुलना में अचानक बार-बार यूरिन आने की समस्या शुरू हो जाए, तो इसे सिर्फ यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) मानकर बैठने की गलती नहीं करनी चाहिए। ओवरी में विकसित हो रहा ट्यूमर जब आकार में बड़ा होता है, तो वह सीधे तौर पर मूत्राशय (ब्लैडर) पर दबाव डालता है। इस दबाव के कारण महिलाओं को पानी कम पीने के बावजूद बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है और यूरिन को रोक पाने में असमर्थता महसूस होती है।

भूख न लगना और पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द होना

ओवेरियन कैंसर का एक और प्रमुख लक्षण है भूख की आदतों में अचानक बड़ा बदलाव आना। पीड़ित महिला को थोड़ा सा खाना खाने के बाद ही पेट पूरी तरह भरा हुआ महसूस होने लगता है। इस वजह से खानपान में भारी कमी आ जाती है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर का वजन बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के तेजी से घटने लगता है। बिना किसी कारण के आने वाली यह कमजोरी और लगातार बनी रहने वाली थकान दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित करती है।

इसके साथ ही, नाभि के नीचे यानी पेट के निचले भाग और पेल्विक हिस्से में लगातार दर्द या भारीपन का बने रहना भी इस कैंसर का बड़ा लक्षण है। यह दर्द कोई सामान्य क्रैम्प नहीं होता, बल्कि एक हल्का और लगातार रहने वाला दर्द होता है जो उठने-बैठने या चलने-फिरने पर और ज्यादा महसूस हो सकता है। यदि यह दर्द पीरियड्स खत्म होने के बाद भी कई हफ्तों तक लगातार बना रहता है, तो बिना देर किए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

प्रभावित वर्ग और एडवांस स्टेज में पहुंचने पर होने वाले नुकसान

अंडाशय के कैंसर से मुख्य रूप से 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं प्रभावित होती हैं, लेकिन बदलती जीवनशैली, जेनेटिक कारणों (बीआरसीए1 या बीआरसीए2 जीन म्यूटेशन) और देर से शादी या बच्चे न होने के कारण अब 30 से 40 वर्ष की महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं। जब महिलाएं इन शुरुआती लक्षणों को साधारण समझकर महीनों तक घरेलू नुस्खों या एंटासिड गोलियों के भरोसे बैठी रहती हैं, तो कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है।

एक बार कैंसर के तीसरे चरण में पहुंचने के बाद यह पेट की झिल्ली, आंतों और लिवर के ऊपरी हिस्से तक फैल जाता है। ऐसी स्थिति में केवल सर्जरी से ट्यूमर को निकालना संभव नहीं होता और मरीज को लंबी और दर्दनाक कीमोथेरेपी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पहली स्टेज में ही बीमारी पकड़ में आ जाए, तो पांच साल की जीवित रहने की दर (सजवाइवल रेट) नब्बे प्रतिशत से अधिक हो सकती है, जो आखिरी स्टेज में घटकर केवल तीस प्रतिशत रह जाती है।

Ovarian Cancer: बचाव के अचूक तरीके और रेगुलर हेल्थ चेकअप का महत्व

ओवेरियन कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए महिलाओं को अपनी जीवनशैली में आमूलचूल बदलाव करने की सख्त जरूरत है। सबसे पहले, एक स्वस्थ और संतुलित डाइट अपनाना बेहद जरूरी है, जिसमें मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थ और साबुत अनाज शामिल हों। रिफाइंड शुगर, जंक फूड और अत्यधिक तैलीय भोजन से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। इसके साथ ही, धूम्रपान और शराब का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है और कैंसर कोशिकाओं को पनपने में मदद करता है, इसलिए इन व्यसनों से पूरी तरह दूर रहना ही समझदारी है।

नियमित शारीरिक व्यायाम और वजन को नियंत्रण में रखना भी इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक टाल सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 35 वर्ष की आयु पार करने के बाद हर महिला को साल में कम से कम एक बार अपना संपूर्ण गायनेकोलॉजिकल चेकअप अवश्य कराना चाहिए। डॉक्टर की सलाह पर पेल्विक अल्ट्रासाउंड (टीवीएस) और रक्त की जांच जैसे सीए 125 (कैंसर एंटीजन 125) टेस्ट के जरिए ओवरी की सेहत का सटीक अंदाजा लगाया जा सकता है। शरीर में होने वाले किसी भी छोटे बदलाव को लेकर सतर्क रहना और तुरंत डॉक्टरी परामर्श लेना ही इस साइलेंट किलर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।

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