Operation Economic Outcast: अमेरिका ने ईरान पर कसा शिकंजा, 5 बड़े सेक्टर्स पर प्रतिबंध से तेल तस्करी और वैश्विक वित्तीय नेटवर्क पर बढ़ा दबाव

अमेरिका ने ईरान के वित्तीय और तेल नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाकर बढ़ाया दबाव

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Operation Economic Outcast: संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के वैश्विक वित्तीय संपर्कों, तेल तस्करी नेटवर्क और विदेशी व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा, आक्रामक और चौतरफा आर्थिक अभियान शुरू कर दिया है। व्हाइट हाउस की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Department of the Treasury) के सचिव स्कॉट बेसेंट ने वाशिंगटन स्थित ट्रेजरी मुख्यालय में एक उच्चस्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ (Operation Economic Outcast) के आधिकारिक शुभारंभ का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन ने इस कदम को एक अभूतपूर्व आर्थिक हमला करार देते हुए दुनिया भर के देशों और बहुराष्ट्रीय निगमों को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे तुरंत प्रभाव से तेहरान के साथ अपने सभी व्यापारिक और वित्तीय संबंध समाप्त कर लें, अन्यथा उन्हें अमेरिकी द्वितीयक प्रतिबंधों (Secondary Sanctions) और वैश्विक डॉलर भुगतान प्रणाली से बेदखली का गंभीर परिणाम भुगतना होगा।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि यह निर्णायक वित्तीय अभियान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्पष्ट निर्देशों के तहत शुरू किया गया है। बेसेंट ने इस अभियान की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के ऐतिहासिक ‘डी-डे’ (D-Day) सैन्य अभियान से करते हुए इसे आधुनिक इतिहास का ‘इकोनॉमिक डी-डे’ बताया है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन अब ईरानी खतरे को केवल प्रबंधित करने या सीमित रखने के पुराने कूटनीतिक ढर्रे से पूरी तरह बाहर निकल चुका है और अब इस खतरे को हमेशा के लिए समाप्त करने के अंतिम दौर (Endgame) में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका का स्पष्ट रणनीतिक उद्देश्य ईरान की उन तमाम आर्थिक जीवन रेखाओं को एक-एक करके काटना है, जिनके सहारे वहां की सत्ता और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) अपने रक्षा कार्यक्रमों और क्षेत्रीय गतिविधियों को वित्तीय पोषण प्रदान करते हैं।

ईरान के सामने दो दो-टूक रास्ते: पूर्ण वैश्विक अलगाव या सामान्यीकरण की वापसी

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने तेहरान के राजनीतिक नेतृत्व के समक्ष अत्यंत स्पष्ट और कठोर विकल्प रखे हैं। प्रेस वार्ता के दौरान स्कॉट बेसेंट ने रेखांकित किया कि मौजूदा दौर में ईरान के सामने केवल दो ही रास्ते शेष रह गए हैं। पहला विकल्प यह है कि वह पूर्ण वैश्विक अलगाव, अंतरराष्ट्रीय बहिष्कार और केवल जीवन निर्वाह (Subsistence Economy) के स्तर पर सिमट जाने वाली एक ढहती अर्थव्यवस्था को स्वीकार करे। वहीं दूसरा विकल्प यह है कि वह अपनी आक्रामक व अस्थिर करने वाली नीतियों का सर्वथा त्याग करे और वैश्विक नियमों का पालन करते हुए अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में दोबारा शामिल होने की राह चुने।
अमेरिका ने साफ कर दिया है कि ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के माध्यम से तेहरान के पास मौजूद अन्य सभी मध्यवर्ती विकल्पों को हमेशा के लिए बंद किया जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि पिछले कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने ग्रे-मार्केट और मध्यस्थों के सहारे अपनी अर्थव्यवस्था को चलाए रखा, लेकिन अब ‘जीरो लीकेज’ नीति के तहत किसी भी प्रकार की रियायत या ढिलाई की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। जो भी देश या संस्था ईरान की अर्थव्यवस्था को जीवनदान देने की कोशिश करेगी, उसे वाशिंगटन की दंडात्मक कार्रवाई की पूरी ताकत का सीधे तौर पर सामना करना पड़ेगा।

ईरान के तेल तस्करी नेटवर्क की पूरी मैपिंग और अमेरिकी डॉलर सिस्टम से निष्कासन का खतरा

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग, विदेश मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों ने मिलकर उस संपूर्ण गुप्त लॉजिस्टिक्स और बैंकिंग ढांचे की विस्तृत मैपिंग पूरी कर ली है जिसका इस्तेमाल ईरान वर्षों से तेल तस्करी और विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए करता रहा है। बेसेंट ने बताया कि ट्रेजरी विभाग ने ईरान के इस गुप्त व्यापार से जुड़े हर नोड, हर वित्तीय ब्रोकर, कागजी मुखौटा कंपनियों और जहाजी नेटवर्क की सटीक पहचान कर ली है। अब अमेरिकी सरकार दुनिया भर की संबंधित सरकारों से संपर्क कर रही है और उन्हें इन अवैध नेटवर्कों को तुरंत ध्वस्त करने के लिए विशिष्ट इनपुट्स सौंप रही है।
वाशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि विदेशी सरकारों को इन गैर-कानूनी आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए एक निश्चित समय-सीमा दी गई है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय, ट्रेजरी और रक्षा विभाग की संयुक्त टीमें विभिन्न देशों के अपने समकक्षों के साथ लगातार बैठकें कर रही हैं ताकि उन्हें अमेरिकी उम्मीदों और कानूनी बाध्यताओं से अवगत कराया जा सके। बेसेंट ने सख्त लहजे में कहा कि अमेरिका का धैर्य असीम नहीं है और यदि कोई भी विदेशी बैंक, एक्सचेंज या व्यापारिक घराना ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग अथवा धन के अवैध ट्रांसफर में सहयोग करता पाया गया, तो उसे अमेरिकी डॉलर क्लियरिंग प्रणाली और फेडरल रिजर्व की बैंकिंग सुविधाओं से स्थायी रूप से निष्कासित कर दिया जाएगा।

पांच प्रमुख क्षेत्रों पर नए सेक्टोरल प्रतिबंध: डिजिटल एसेट्स, सोना, तकनीक, विमानन और शिपिंग

‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के शुरुआती चरण में ही अमेरिकी ट्रेजरी के ‘विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय’ (OFAC) ने ईरान के परमाणु, मिसाइल, साइबर और तेल तस्करी तंत्र से जुड़ी लगभग 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर तत्काल प्रभाव से नए कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। इसके साथ ही कार्यकारी आदेश संख्या 13902 के अंतर्गत ईरानी अर्थव्यवस्था के पांच सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील उद्योगों को लक्षित करते हुए नए सेक्टोरल प्रतिबंधों की घोषणा की गई है। ये पांच सेक्टर डिजिटल एसेट्स (क्रिप्टोकरेंसी), उन्नत तकनीक, सोना व कीमती धातुएं, नागरिक व सैन्य विमानन और समुद्री परिवहन व शिपिंग हैं।
इनमें डिजिटल एसेट्स को पहली बार इस स्तर पर लक्षित किया गया है ताकि आईआरजीसी द्वारा प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए क्रिप्टो एक्सचेंजों के उपयोग पर पूरी तरह नकेल कसी जा सके। सोने के व्यापार पर लगी रोक से ईरानी हुकूमत अपनी लगातार गिरती मुद्रा को सहारा देने में असमर्थ हो जाएगी। वहीं उन्नत इलेक्ट्रॉनिक चिप्स, विमानन कलपुर्जों और समुद्री शिपिंग बेड़े (शैडो फ्लीट) पर लगे प्रतिबंधों से ईरान के लिए हथियारों का निर्माण, मिसाइल अपग्रेडेशन और कच्चे तेल का गुप्त समुद्री निर्यात लगभग असंभव हो जाएगा। इन नियमों के प्रभावी होने के बाद दुनिया का कोई भी तीसरा पक्ष यदि इन क्षेत्रों में ईरान को सेवाएं प्रदान करता है, तो वह स्वतः ही अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में आ जाएगा।

मबना इंस्टीट्यूट पर साइबर हमलों का शिकंजा और आईआरजीसी के शीर्ष नेतृत्व पर इनाम

इस व्यापक अभियान के तहत अमेरिका ने ईरान समर्थित साइबर अपराधों और जासूसी नेटवर्क पर भी कड़ा कानूनी प्रहार किया है। टीआरएम लैब्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) और ट्रेजरी विभाग ने ईरान स्थित ‘मबना इंस्टीट्यूट’ से जुड़े कई प्रमुख साइबर ऑपरेटरों को प्रतिबंधित और अभियोजित किया है, जिन्होंने ईरानी सेना और आईआरजीसी के इशारे पर अमेरिका व दुनिया भर के 300 से अधिक विश्वविद्यालयों, रक्षा कंपनियों और सरकारी एजेंसियों के कंप्यूटर नेटवर्क्स से 31 टेराबाइट से अधिक बौद्धिक संपदा और संवेदनशील शैक्षणिक डेटा की चोरी की थी।
इसके साथ ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय के ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत ईरानी सैन्य तंत्र के शीर्ष रणनीतिकारों पर भारी नकद इनामों की घोषणा की गई है। आईआरजीसी से जुड़े प्रमुख रणनीतिकारों और सैन्य कमांडरों पर 10 मिलियन डॉलर तक का इनाम रखा गया है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान के साइबर युद्ध और पारंपरिक सैन्य हमलों में सहायक बनने वाली तमाम तकनीकी व वित्तीय कड़ियों को हमेशा के लिए कमजोर कर देगी।

Operation Economic Outcast: ईरानी संसद के स्पीकर गलिबाफ की तीखी प्रतिक्रिया और तेहरान का पलटवार

अमेरिकी वित्त मंत्रालय की इस आक्रामक घोषणा के तुरंत बाद तेहरान की ओर से भी तीखी और आक्रामक प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान की संसद (मजलिस) के स्पीकर मोहम्मद बाकर गलिबाफ ने वाशिंगटन की इन चेतावनियों को केवल ‘बयानबाजी’ और ‘खोखली धमकी’ करार देते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया। गलिबाफ ने दावा किया कि ईरान के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदार अमेरिकी हुक्मनामे के आगे झुकने वाले नहीं हैं और वे किसी भी एकतरफा प्रतिबंध को स्वीकार किए बिना अपने पारंपरिक द्विपक्षीय व्यापार को जारी रखेंगे।
ईरान लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंध उसकी संप्रभुता पर हमला हैं और वह अपने तेल निर्यात व क्षेत्रीय प्रभाव को बनाए रखने के लिए हर संभव विकल्प का इस्तेमाल करता रहेगा। हालांकि ईरानी नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से दिखाई जा रही इस दृढ़ता के बावजूद देश के भीतर गहराते आर्थिक संकट, मुद्रा (रियाल) के रिकॉर्ड अवमूल्यन और आसमान छूती महंगाई ने तेहरान के नीति निर्माताओं के लिए आंतरिक चुनौतियां काफी बढ़ा दी हैं। संसद में कई प्रतिनिधियों ने यह चिंता भी जताई है कि यदि यह आर्थिक नाकेबंदी लंबे समय तक जारी रही, तो घरेलू उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखना बेहद कठिन हो जाएगा।

Operation Economic Outcast: भविष्य की कूटनीतिक राह, आगामी प्रतिबंधों की लहर और अंतिम विश्लेषण

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान आने वाले महीनों में अमेरिकी विदेश नीति का सबसे केंद्रीय और निर्णायक पहलू बना रहेगा। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों और हफ्तों में प्रतिबंधों की नई और अधिक कठोर लहरें सामने आएंगी, जिनमें तेहरान को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मदद पहुंचाने वाले कुछ बड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान और शिपिंग कॉरपोरेट्स भी सीधे तौर पर शामिल हो सकते हैं।
कुल मिलाकर ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के जरिए अमेरिका ने दुनिया के सामने एक अत्यंत स्पष्ट कूटनीतिक विभाजन रेखा खींच दी है। अब यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय और वैश्विक व्यापारिक भागीदारों पर निर्भर करता है कि वे अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम से बचने के लिए तेहरान से अपने आर्थिक रिश्ते तोड़ते हैं या फिर अमेरिकी शक्ति के पूरे प्रभाव का सामना करने के लिए तैयार होते हैं। आने वाले हफ्तों में इस बहुआयामी आर्थिक घेराबंदी के वास्तविक परिणाम और इसके वैश्विक भू-राजनीतिक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुलकर सामने आएंगे।

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